Skip to content

Booksellers & Trade Customers: Sign up for online bulk buying at trade.atlanticbooks.com for wholesale discounts

Booksellers: Create Account on our B2B Portal for wholesale discounts

Joseph Anton

by Salman Rushdie
Save 35% Save 35%
Current price ₹650.00
Original price ₹999.00
Original price ₹999.00
Original price ₹999.00
(-35%)
₹650.00
Current price ₹650.00

Ships in 7-10 Days

Free Shipping in India on orders above Rs. 500

Request Bulk Quantity Quote
+91
Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9789350729991
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 660
  • Original Price: INR 999.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 500 grams
  • BISAC Subject(s): Linguistics / General

फरवरी 14, 1989, वेलेंटाइन डे के दिन सलमान रुश्दी को बीबीसी की एक पत्रकार ने फोन करके बताया कि उन्हें आयतुल्ला खोमैनी ने 'मृत्युदंड' सुनाया है। पहली बार उसने शब्द 'फतवा' सुना। उसका अपराध ? उपन्यास 'द सेटेनिक वर्सिस' लिखना जिस पर 'इस्लाम, पैगम्बर एवं कुरान' के विरुद्ध होने का आरोप था।ऐसे प्रारम्भ हुई असाधारण कहानी कि कैसे एक लेखक को पुलिस सुरक्षादल की निरन्तर उपस्थिति में भूमिगत होने, एक मकान से दूसरे मकान में जाने के लिए विवश होना पड़ा। उन्हें एक उपनाम रखने के लिए कहा गया जिससे पुलिस उन्हें पुकार सके। उन्होंने अपने प्रिय लेखकों एवं उनके नामों को जोड़कर बनने वाले नामों के विषय में सोचा, और ऐसे नाम उभरा कोनरेड एवं चेखव-जोसेफ एण्टन ।एक लेखक एवं उसका परिवार नौ वर्ष से अधिक समय तक हत्या की धमकी के साथ कैसे जीता है? कैसे वह काम करता रहता है? कैसे वह प्यार में पड़ता और निकलता है? निराशा उसके विचारों एवं कार्यों को कैसे प्रभावित करती है, वह कैसे और क्यों लड़खड़ाता है और कैसे वह वापस लड़ना सीखता है? इस असाधारण संस्मरण में रुश्दी यह कहानी पहली बार बताते हैं, हमारे युग की, हमारे समय की वाणी की स्वतन्त्रता की एक महत्त्वपूर्ण, एक कड़ी लड़ाई की कहानी। वे कभी सशस्त्र पुलिसकर्मियों के साथ रहने की कठोर और कभी हास्यास्पद सच्चाइयों की और कभी अपने रक्षकों के साथ हो गये घनिष्ठतम सम्बन्ध की बात करते हैं और कभी सरकारों, खुफिया एजेंसी प्रमुखों, प्रकाशकों, पत्रकारों और साथी लेखकों से सहयोग एवं उनके द्वारा समझे जाने के अपने संघर्ष और कैसे उन्होंने स्वतन्त्रता पुनः प्राप्त की-के विषय में बात करते हैं।असाधारण स्पष्टवादिता एवं ईमानदारी लिए हुए यह पुस्तक, प्रेरणात्मक, मर्मस्पर्शी एवं अत्यधिक महत्त्व की है क्योंकि जो सलमान के साथ हुआ वह नाटक का पहला अंक था जो विश्व में प्रतिदिन कहीं-न-कहीं घटित हो रहा है।

सलमान रुश्दी ग्यारह उपन्यासों, एक लघु कथा-संग्रह एवं तीन गैर-कथात्मक पुस्तकों के लेखक एवं 'द विंटेज बुक ऑफ इंडियन राइटिंग' के सह-सम्पादक हैं। वर्ष 1993 में उनके उपन्यास 'द मिडनाइट्स चिल्ड्रन' को द बेस्ट ऑफ बुकर अर्थात् चालीस वर्ष इतिहास में बुकर विजेता रहे उपन्यासों में श्रेष्ठ घोषित किया गया। 'द मूर्ज़ लास्ट साइ' को वर्ष 1995 में व्हिट्ब्रेड पुरस्कार और 1996 में साहित्य के लिए यूरोपियन यूनियन का एरिस्टियन पुरस्कार प्राप्त हुआ। सलमान रुश्दी साहित्य की रॉयल सोसायटी के फेलो एवं कमांड्योर डेस आर्ट्स एट् डेस लैटर्स हैं।★★★अनुवादक परिचयनीरू -शिक्षा : पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ से हिन्दी साहित्य में एम.ए., एम. फिल. एवं अनुवाद डिप्लोमा ।हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला से पीएच.डी. ।प्रकाशन : अंग्रेज़ी से हिन्दी अनुवाद की अब तक पाँच और हिन्दी से अंग्रेज़ी अनुवाद की एक पुस्तक प्रकाशित ।विज्ञान विषयों के अनुवाद का व्यापक अनुभव । कहानियाँ एवं कैरियर व अन्य विषयों से सम्बन्धित लेख पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित ।

Trusted for over 49 years

Family Owned Company

Secure Payment

All Major Credit Cards/Debit Cards/UPI & More Accepted

New & Authentic Products

India's Largest Distributor

Need Support?

Whatsapp Us