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Kabir Ki Chinta

by Dr. Baldev Vanshi
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Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9788170558361
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 116
  • Original Price: INR 395.0
  • Language: Hindi
  • Edition: 2nd Edition
  • Item Weight: 250 grams
  • BISAC Subject(s): General

कबीर का मत और मूल आधार ज्ञान और प्रेम है।कबीर ने मानव के विकसित ज्ञान और भाव को इनके मूल स्वरूप और प्रकृति में पहचाना। इसी कारण वेद (ज्ञान) को संवेद बनाकर युग को समझने हेतु युग की पीड़ाओं, विसंगतियों, विभेदों को मिटाने की ओर बढ़े। समूचे ब्रह्माण्ड को भावना में लेकर, संवेदनात्मक जल से -भवजल से आपूरित माना और कहा- “जल विच मीन प्यासी, मुझे सुन-सुन आवै हाँसी।" ऐसी भरपूर संवेदना ! ऐसी विराट भावना !कबीर का चिन्तन, दर्शन के स्तर को यदि उपलब्ध करता है, तो वह भारतीय दार्शनिक परिप्रेक्ष्य में ही और वह भी पूर्ण ज्ञान के धरातल पर, जिसमें मनुष्य के जन्म से मरण तक, धरती से आकाश तक और जीवन के सर्वांग तक फैली स्थितियों के प्रति चेतनता, समानता और संवेदनीयता सन्निहित है।चैतन्य प्रकाश धरती पर मनुष्य के अतीत इतिहास को ही नहीं भावी अस्तित्व की राह को भी आलोकित करता है। मानवीय चैतन्य प्रकाश को विकिरणित करने वाली सन्तों की वाणी ही भावी विश्व की संरक्षिका भी होगी और पथ-प्रदर्शिका भी। इस वाणी में लोक और लोकायत की संवेदनशीलता सत्य पर आधारित होने से जीव-मात्र को ही नहीं, समूचे परिवेश को, ब्रह्माण्ड को आत्मीय सन्दर्भों में विराट अस्तित्व का अंग मानती है। सन्तों की दृष्टि में जड़-चेतन में जीव-अजीव का अन्तर तो है तथाकथित जड़-चेतन का अन्तर नहीं। आधुनिक विज्ञान ने जो स्थापनाएँ पिछले दो-ढाई सौ वर्षों में की हैं, वो स्थापनाएँ कबीर आदि सन्तों ने पाँच-छह सौ वर्ष पूर्व ही अपनी वाणी में दे रखी हैं ।कबीर भाव और भावना में तर्कशील अध्यात्म के संस्थापकों में, वैदिक ज्ञान और वेदान्तिक प्रेम के पथिक हुए हैं। अतः किसी भी वायवीय, अतर्क्स, पाखण्ड या ढोंग को अस्वीकार करते हैं। उनकी चिन्ता उत्तर-आधुनिक समय में काल, महाकाल, मन्वन्तरों तक को लाँघती हुई मानवीय चिन्ता है।

बलदेव वंशी -जन्म : 1 जून 1938 को मुलतान शहर (अब पाकिस्तान में) ।शिक्षा : एम.ए. (हिन्दी), पीएच.डी. ।कृतित्व : पन्द्रह कविता-संग्रह, चौदह आलोचना पुस्तकें, बीस सम्पादित पुस्तकें, चार भाषा आन्दोलन पर तथा पाँच बालोपयोगी पुस्तकें, दो नाटक । सन्त मलूकदास तथा सन्त दादू ग्रन्थावलियाँ, सन्त मीराबाई, सन्त सहजो कवितावलियाँ, भारतीय सन्त परम्परा तथा सन्त कबीर पर पाँच पुस्तकें। सन्त पुस्तकमाला के लेखन-सम्पादन-समन्वय के अन्तर्गत इक्कीस पुस्तकें प्रकाशित ।सम्मान पुरस्कार : विभिन्न अकादमियों, संस्थाओं, विश्वविद्यालयों द्वारा सम्मानित । छह पुस्तकों पर केन्द्र व राज्य सरकारों द्वारा पुरस्कृत जिनमें 'कबीर शिखर सम्मान', 'मलूक रत्न सम्मान', 'दादू शिखर सम्मान' आदि शामिल ।यात्राएँ : 'विश्व रामायण सम्मेलन' तथा 'कबीर चेतना-यात्रा' के सिलसिले में मॉरिशस, हालैंड, इंग्लैंड, बेल्जियम, नेपाल आदि ।कार्यभार : 'विश्व कबीरपन्थी महासभा' के अध्यक्ष, 'अखिल भारतीय श्री दादू सेवक-समाज' के महानिदेशक, सन्त साहित्य अकादमी के अध्यक्ष रहे ।निधन : 7 जनवरी 2017 को दिल्ली में निधन ।

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