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Kahani Ke Naye Pratiman

by Kumar Krishna
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Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9788181433527
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 156
  • Original Price: INR 395.0
  • Language: Hindi
  • Edition: 2nd Edition
  • Item Weight: 300 grams
  • BISAC Subject(s): General

जब-जब रचनाकार आत्मचिन्तन, आत्मविश्लेषण अथवा आत्मसाक्षात्कार करता है, मुझे लगता है तब-तब उसके भीतर आलोचना की कोंपलें फूटती हैं। 'ग्यारह वर्ष का समय' का कहानीकार ही 'चिन्तामणि' की रचना कर सका तथा 'बाणभट्ट की आत्मकथा' के लेखक ने कबीर को हिन्दी साहित्य में प्रतिष्ठा दिलाई। फिर चाहे 'तार सप्तक' से यात्रा प्रारम्भ करने वाला आलोचक रामविलास शर्मा हो या 'नयी कविता' का कवि नामवर सिंह । सभी मूलतः रचनाकार रहे. हैं। अतः यहाँ प्रस्तुत मेरी चिन्ताएँ भी एक रचनाकार की मीमांसा हैं।हमारे आस-पास जो सच है उसे शब्दों में रूपान्तरित करने का नाम कविता है लेकिन अपने आस-पास के झूठ को सच में बदलने की बेमिसाल तरकीब का नाम कहानी है। दूसरे शब्दों में हम यों भी कह सकते हैं कि मिथ्या को तथ्य बनाकर उपस्थित करने का कलात्मक उपकरण कथा है। निश्चित रूप से इससे कहानी की विराट सामाजिक शक्ति का पता चलता है और इस दृष्टि से देखें तो कहानी साहित्य की दूसरे दर्जे की विधा हरगिज नहीं रह जाती।

कवि तथा आलोचक के रूप में कुमार कृष्ण का नाम हिन्दी पाठकों के लिए सुपरिचित है। इस पुस्तक से पूर्व इनकी आठ कविता - पुस्तकें- 'डरी हुई ज़मीन', 'पहाड़ पर बदलता मौसम', 'खुरों की तकलीफ़', 'घमर', 'पहाड़ पर नदियों के घर', चुनी हुई कविताओं का संग्रह - 'मेरी कविताएँ', गजल संग्रह- 'काठ पर चढ़ा लोहा' तथा सम्पूर्ण कविताओं का संग्रह - 'गाँव का बीजगणित', छह आलोचनात्मक पुस्तकें–‘समकालीन साहित्य : विविध, सन्दर्भ', 'कविता की सार्थकता', हिन्दी कथा-साहित्य : ‘परख और पहचान’, ‘दूसरे प्रजातन्त्र की तलाश में धूमिल', 'कबीर : विविध परिप्रेक्ष्य', 'समकालीन कविता का बीजगणित' प्रकाशित हो चुकी हैं। हिमाचल प्रदेश में रचित कविता, कहानी, उपन्यास, नाटक-एकांकी तथा आलोचना की पहचान करवाने वाले पहले प्रामाणिक ग्रन्थ 'हिमाचल वाङ्मय' के संयोजन के अतिरिक्त कुमार कृष्ण ने कई पुस्तकों तथा पत्रिकाओं का सम्पादन भी किया है जिसमें भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान की प्रथम पत्रिका 'चेतना', के अतिरिक्त 'हाँक' तथा 'वर्णमाला' जैसी चर्चित पत्रिकाएँ शामिल हैं। कुमार कृष्ण का जन्म हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले के गाँव नागड़ी में 30 जून 1951 को एक ब्राह्मण किसान परिवार में हुआ। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में छात्र कल्याण अधिष्ठाता, अधिष्ठाता भाषा संकाय, प्रोफ़ेसर एवं अध्यक्ष हिन्दी विभाग जैसे पदों का दायित्व निभाते हुए आजकल आप हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग में आचार्य तथा बौद्ध विद्या केन्द्र के अध्यक्ष हैं। आपका स्थायी पता है- 'सत्यप्रिया', कैथलीघाट, सोलन- 173215 (हिमाचल प्रदेश)।

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