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Kala Aur Boodha Chand

by Sumitranandan Pant
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Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9788126714445
  • Binding: Hardcover
  • Subject: General Books
  • Publisher: Rajkamal Prakashan
  • Publisher Imprint: Rajkamal Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 208
  • Original Price: INR 795.0
  • Language: N/A
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 360 grams
  • BISAC Subject(s): General

‘कला और बूढ़ा br>चाँद’ सुविख्यात कवि सुमित्रानंदन पंत की साहित्य अकादेमी पुरस्कार प्राप्त काव्यकृति है। इसमें उनकी सन् 1958 में लिखी गई कविताएँ हैं। शैली और विषय-वस्तु दोनों ही दृष्टियों में कवि की परवर्ती रचनाओं में इनका विशिष्ट स्थान है। अरविन्द-दर्शन और भारतीय मनोविज्ञान के जो प्रभाव उनकी रचनाओं में कुछ समय से दृष्टिगोचर हो रहे थे, उनका पूर्ण परिपाक प्रस्तुत संग्रह में हुआ है। कवि ने उन तमाम प्रभावांे को आत्मसात् कर जिस अतींद्रिय भावमंडल का आख्यान यहाँ किया है, वह सर्वथा उसका अपना है, आत्मानुभूत है। चेतन-अवचेतन के स्तरों का भेदन करते हुए अतिचेतन का अवलोकन इन कविताओं की विषय-वस्तु है, जिसे कवि ने दार्शनिक और तात्त्विक प्रतीकों के माध्यम से अभिव्यक्त करने का प्रयत्न किया है। मुक्त छंद का प्रयोग पंत जी बहुत प्रारम्भ से ही करते रहे हैं, किन्तु छंद-भंग की वास्तविक स्थिति ‘वाणी’ से प्रारम्भ हुई और उसका पूर्ण विकास ‘कला और बूढ़ा br>चाँद’ में हुआ है। इन कविताओं में कवि ‘छंदों की पायलें उतार’ देता है, शब्दों को तोड़कर उनमें नई अर्थवत्ता का संचार करता है और इस प्रकार अपनी अभिव्यक्ति के उपकरणों को उसने इतना समर्थ बना लिया है कि उनके द्वारा ‘अविगत गति’ का प्रकाशन किया जा सके। वस्तुतः पंत जी के चेतनाशील काव्य के अध्येताओं के लिए यह एक अपरिहार्य कृति है।.

सुमित्रानंदन पंत जन्म: 20 मई, 1900 कौसानी (उत्तरांचल में) । शिक्षा: प्रारम्भिक शिक्षा कौसानी के वर्नाक्यूलर स्कूल में। 1918 में कौसानी से काशी चले गए, वहीं से प्रवेशिका परीक्षा पास की। प्रकाशित पुस्तके: कविताा-संग्रह: वीणा, ग्रन्थि, पल्लव, गुंजन, ज्योत्स्ना, युगपथ, युगवाणी, ग्राम्या, स्वर्णकिरण, स्वर्णधूली, मधुज्वाल, उत्तरा, रजत-शिखर, शिल्पी, सौवर्ण, युगपुरुष, छाया, अतिमा, किरण-वीणा, वाणी, कला और बूढ़ा चाँद, पौ फटने से पहले, चिदंबरा, पतझर (एक भाव क्रान्ति), गीतहंस, लोकायतन, शंखध्वनि,शशि की तरी, समाधिता, आस्था, सत्यकाम, गीत-अगीत,संक्रांति, स्वच्छंद ! कथा-साहित्य: हार, पांच कहानियां ! आलोचना एवं अन्य गद्य-साहित्य: छायावाद: पुनर्मूल्यांकन, शिल्प और दर्शन, कला और संस्कृति, साठ वर्ष: एक रेखांकन ! पुरस्कार: 1960 में कला और बूढा चाँद पर साहित्य अकादेमी पुरस्कार, 1961 में पद्मभूषण की उपाधि, 1965 में लोकायतन पर सोवियत लैंड नेहरु पुरस्कार, 1969 में चिदंबरा पर भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार ! 28 दिसम्बर 1977 को देहावसान !.

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