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Kali Chhoti Machhli

by Nasira Sharma
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Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9789350005125
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 164
  • Original Price: INR 350.0
  • Language: Hindi
  • Edition: 3rd Edition
  • Item Weight: 350 grams
  • BISAC Subject(s): General

काली छोटी मछली - समद बहरंगी की यह कहानियाँ फारसी से हिन्दी में अनूदित हुई जरूर हैं मगर पढ़नेवाले को लगेगा कि यह कहानियाँ लेखिका की हिन्दी भाषा में लिखी उनकी मौलिक कहानियाँ हैं। भाषा का प्रवाह, हिन्दी मुहावरा, कहानियों का रोचक परिवेश पाठक को सोचने पर मजबूर करता है। ये कहानियाँ जैसे उसकी अपनी कहानियाँ हैं। ये क़िस्से, ये घटनाएँ, यह किरदार, भूख और बेकारी, प्यार और बेबसी, दरअसल दुनिया के हर मुल्क़ की दास्तान है चाहे 'नारंगी का छिलका' कहानी हो या फिर 'चौबीस घण्टे सोते-जागते' लम्बी कहानी हो।'काली छोटी मछली' एक ऐसी कहानी है जो हर शख़्स की कहानी हो सकती है। हर वह पाठक जो आगे बढ़ने की ललक अपने सीने में छुपाए हुए है उसे 'काली छोटी मछली' में अपनी भावनाओं की परछाईंयाँ और अभिव्यक्तियाँ डोलती नज़र आयेंगी। काली छोटी मछली का विद्रोह वास्तव में अपने परिवेश में व्यापक घुटन और पिछड़ापन के प्रति एक यथार्थ है जिसको हम सब रोज़ झेलते हैं। कुछ उससे निकल पाते हैं कुछ नहीं। ये कहानियाँ रोचक हैं। सारे चरित्र हमारे आस-पास के हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि इस कहानी में अन्त में जो एक और कहानी की शुरुआत मौजूद है कहानी सुनने के बाद जहाँ सारी मछलियाँ सो जाती हैं वहीं लाल छोटी मछली समन्दर के बारे में सोचते-सोचते पूरी रात आँखों ही आँखों में गुज़ार देती है।

नासिरा शर्मा - 1948 में इलाहाबाद (उ.प्र.) में जन्मी नासिरा शर्मा को साहित्य के संस्कार विरासत में मिले। फारसी भाषा साहित्य में जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय से एम.ए. किया। हिन्दी, उर्दू, फारसी, अंग्रेज़ी और पश्तो भाषाओं पर उनकी गहरी पकड़ है। वह ईरानी समाज और राजनीति के अतिरिक्त साहित्य, कला और संस्कृति विषयों की विशेषज्ञ हैं। इराक़, अफ़ग़ानिस्तान, पाकिस्तान, सीरिया तथा भारत के राजनीतिज्ञों तथा प्रसिद्ध बुद्धिजीवियों के साथ साक्षात्कार किये जो बहुचर्चित हुए। युद्ध बन्दियों पर जर्मन व फ्रांसीसी दूरदर्शन के लिए बनी फ़िल्म में उनकी महत्त्वपूर्ण भूमिका रही। साथ ही साथ स्वतन्त्र पत्रकारिता में उनका महत्त्वपूर्ण योगदान रहा है।उपन्यास : बहिश्ते ज़हरा, शाल्मली, ठीकरे की मंगनी, ज़िन्दा मुहावरे, अक्षयवट, कुइयाजान, ज़ीरो रोड, पारिजात; कहानी संग्रह : शामी काग़ज़, पत्थरगली, इब्ने मरियम, संगसार, सबीना के चालीस चोर, ख़ुदा की वापसी, दूसरा ताजमहल, इन्सानी नस्ल, बुतखाना; रिपोर्ताज़ : जहाँ फौव्वारे लहू रोते हैं; संस्मरण यादों के गलियारे; लेख संग्रह : किताब के बहाने, राष्ट्र और मुसलमान, औरत के लिए औरत ; अध्ययन : अफ़ग़ानिस्तान: बुज़कशी का मैदान, मरजीना का देश इराक़; अनुवाद :शाहनामा फिरदौसी, इकोज आफ़ इरानियन रेवुलूशन : प्रोटेस्ट पोयट्री, बर्निंग पायर, काली छोटी मछली; नाटक पत्थर गली, सबीना के चालीस चोर, दहलीज़, इब्ने मरियम, प्लेटफार्म नम्बर सात; बाल साहित्य : भूतों का मैकडोनल, दिल्लू दीमक, बदलू (उपन्यास), गुल्लू; नवसाक्षरों के लिए : धन्यवाद, पढ़ने का हक़, गिल्लो बी, सच्ची सहेली, एक थी सुल्ताना; टी.वी. फ़िल्म व सीरियल : तड़प, माँ, काली मोहिनी, आया बसंत सखी, सेमल का दरख़्त (टेलीफ़िल्म), शाल्मली, दो बहनें, वापसी (सीरियल)।

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