Skip to content

Booksellers & Trade Customers: Sign up for online bulk buying at trade.atlanticbooks.com for wholesale discounts

Booksellers: Create Account on our B2B Portal for wholesale discounts

Karpoori Thakur: Jannayak Se Bharat Ratn Tak

by Harinarayan Thakur
Save 35% Save 35%
Current price ₹228.00
Original price ₹350.00
Original price ₹350.00
Original price ₹350.00
(-35%)
₹228.00
Current price ₹228.00

Ships in 7-10 Days

Free Shipping in India on orders above Rs. 500

Request Bulk Quantity Quote
+91
Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9789362877666
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 124
  • Original Price: INR 350.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 350 grams
  • BISAC Subject(s): General

कर्पूरी ठाकुर : जननायक से भारत रत्न तक - भारत रत्न, जननायक कर्पूरी ठाकुर का व्यक्तित्व, त्याग, समर्पण और संघर्ष जितना बड़ा और महान है, उन पर स्तरीय जानकारी और प्रामाणिक पुस्तकों का उतना ही अभाव है। चर्चित लेखक और आलोचक डॉ. हरिनारायण ठाकुर की प्रस्तुत पुस्तक इसी दिशा में एक प्रामाणिक प्रयास है। लेखक ने कर्पूरीजी के जीवन के तमाम पहलुओं की छानबीन करके संक्षेप में उनके जीवन-संघर्ष और कार्यों का समीक्षात्मक ब्योरा प्रस्तुत किया है। तथ्यों, तर्कों, घटना और स्थिति-परिस्थितियों का यथार्थपरक आकलन और विश्लेषण किया गया है। पुस्तक में जुटाये गये आँकड़े और विवरण कर्पूरीजी के पुरजन-परिजनों और निकट सहयोगियों के सम्पर्क, साक्षात्कार और विभिन्न प्रामाणिक स्रोतों द्वारा सम्पुष्ट हैं। इसीलिए पुस्तक अपने आप में एक ऐतिहासिक दस्तावेज़ है।कर्पूरी ठाकुर ने गुलाम भारत को आज़ाद कराने में जितनी बड़ी भूमिका निभायी, उससे बड़ी भूमिका उन्होंने आज़ाद भारत में सामाजिक और आर्थिक न्याय की लड़ाई लड़कर ग़रीबों को ज़ुबान और उनका हक़-हुकूक दिलवाने में निभायी। उनका संघर्ष बहुआयामी था। वे जीवन-भर एक अथक योद्धा की तरह सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक विसंगतियों से लड़ते रहे। उन्होंने आज़ादी की लड़ाई लड़ी, किसान-मज़दूरों की लड़ाई लड़ी, छात्र-नौजवानों की लड़ाई लड़ी, ग़रीब-गुरबों की लड़ाई लड़ी, ऊँच-नीच, भेदभाव और गैर-बराबरी को मिटाने की लड़ाई लड़ी। उनकी हर लड़ाई संवैधानिक और लोकतान्त्रिक मूल्यों की रक्षा की लड़ाई थी।उनके पास न धनबल था, न बाहुबल; केवल जनबल के सहारे उन्होंने इतनी बड़ी लड़ाई लड़ी और बहुत हद तक सफल भी हुए। बिहार जैसे पिछड़े राज्य के सबसे पिछड़े और ग़रीब वर्ग में जन्म लेकर वे अपनी सेवा, समर्पण और त्याग की बदौलत सत्ता के सर्वोच्च शिखर पर पहुँचे ज़रूर, पर अपनी ईमानदारी और सामाजिक-नैतिक निष्ठा और मूल्यों की रक्षा के लिए जीवन-भर ग़रीब और अभावग्रस्त ही बने रहे। वे अपने युवाकाल से लेकर जीवन-पर्यन्त विधायक, सांसद, मन्त्री और मुख्यमन्त्री तक रहे, पर उन्होंने अपने लिए न एक धुर ज़मीन ख़रीदी और न कहीं मकान बनाया। उनके गाँव का घर 'इन्दिरा आवास योजना' से बना, जो उनके निधन के बाद ‘स्मृति-भवन’ बन गया। भारतीय इतिहास में ऐसे सेवापरायण, समर्पित, संघर्षशील और त्यागी राजनेता दुर्लभ हैं। उनके निधन के बाद उनके गाँव का नाम ‘कर्पूरी ग्राम' ज़रूर पड़ा, पर उनकी सेवा के अनुरूप उन्हें कोई सम्मान नहीं मिला। इस कमी को भारत सरकार ने उन्हें मरणोपरान्त वर्ष 2024 के लिए सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न' से सम्मानित करके पूरा किया है।पुस्तक में कर्पूरीजी के समय और समाज से लेकर आज की राजनीति और समाजशास्त्र पर पर्याप्त प्रकाश डाला गया है। डॉ. हरिनारायण ठाकुर की यह पुस्तक कर्पूरी ठाकुर : जननायक से भारत रत्न तक पाठकों और शोधकर्ताओं के लिए पठनीय और उपयोगी सिद्ध होने वाली है ।- प्रकाशक

हरिनारायण ठाकुर -जन्म : 23 फ़रवरी 1956, खैरबा (मेजरगंज), सीतामढ़ी (बिहार)।शिक्षा : एम.ए. (हिन्दी) प्रशिक्षित, पीएच. डी., ई-लर्निंग।लेखन : वर्ष 1994 से पत्र-पत्रिकाओं में नियमित लेखन-प्रकाशन एवं रेडियो, दूरदर्शन पर वार्ताएँ प्रसारित।पुस्तक-प्रकाशन : बिहार में अति पिछड़ा वर्ग आन्दोलन (2007), हिन्दी की दलित कहानियाँ (2008, कई संस्करण), दलित साहित्य का समाजशास्त्र (2009, अद्यतन संस्करण-2022), भारत में पिछड़ा वर्ग आन्दोलन और परिवर्तन का नया समाजशास्त्र (2009, अद्यतन संस्करण-2022), भारतीय साहित्य का शूद्र-पाठ (शुद्ध-पाठ) (2017), को बाभन को सूदा (आत्मकथा, 2024), कर्पूरी ठाकुर : जननायक से भारत रत्न तक (2024)। पुस्तकों में रचना-संकलन : अनेक स्तरीय पुस्तकों में रचनाएँ संकलित।सम्पादन : 'युद्धरत आम आदमी' का भंगी विशेषांक, 'मल-मूत्र ढोता भारत' (2008), राष्ट्रीय स्मारिकाओं सहित विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय स्तरीय स्मारिका एवं पत्रिकाओंका सम्पादन।पुरस्कार एवं सम्मान : साहित्यिक-सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक गतिविधियों के लिए कई अन्तरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय और प्रान्तीय सम्मान, ट्रॉफ़ी, शील्ड एवं प्रशस्ति-पत्र।सम्प्रति : अवकाश प्राप्त प्राचार्य, एम. एस. कॉलेज, मोतिहारी (बी.आर. अम्बेदकर बिहार विश्वविद्यालय, मुज़फ़्फ़रपुर)।

Trusted for over 49 years

Family Owned Company

Secure Payment

All Major Credit Cards/Debit Cards/UPI & More Accepted

New & Authentic Products

India's Largest Distributor

Need Support?

Whatsapp Us