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Kavita Ki Mukti

by Dr. Nand Kishor Naval
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Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9789350720394
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 152
  • Original Price: INR 200.0
  • Language: Hindi
  • Edition: 2nd Edition
  • Item Weight: 300 grams
  • BISAC Subject(s): General

नये आलोचकों द्वारा लिखी जानेवाली हिंदी आलांचना की कई सीमाएँ हैं। गैर मार्क्सवादी आलोचना साहित्य के सामाजिक संदर्भ को तो अंशतः या पूर्णतः अस्वीकार कर चल ही रही है, वह भाषा में लगातार ऐसे चालू शब्दों की भी भरती करती जा रही है, जिनका अर्थ एक बड़ी हद तक अनिश्चित है। मार्क्सवादी आलोचना में प्रायः मार्क्सवादी सौंदर्यशास्त्र की बुनियादी और सुपरिचित अवधारणाओं की भी समझ की कमी दिखलाई पड़ती है, जिसके परिणामस्वरूप हिंदी की नई मार्क्सवादी आलोचना एक ओर संकीर्णतावाद की शिकार है और दूसरी ओर उदारतावाद की । नन्दकिशोर नवल हिंदी के ऐसे नये आलोचक हैं, जिनकी आलोचना 'चमचमाते वाग्जाल' से मुक्त है और जिन्होंने मार्क्सवादी सौंदर्यशास्त्र की निर्भ्रात समझ के आधार पर समकालीन और निकट पूर्व के हिंदी साहित्य की व्याख्या तथा मूल्यांकन का प्रयास किया है। उनकी अन्य विशेषता यह है कि वे हिंदी की परंपरागत प्रगतिशील आलोचना की ओर से विमुख नहीं हैं और उनमें साहित्य तथा आलोचना की ग्रंथियों में प्रवेश करने की भरपूर क्षमता है। प्रस्तुत पुस्तक में मुख्यतः कविता-संबंधी उनके चुने हुए पंद्रह निबंध संगृहीत हैं जिनसे इस कथन की पुष्टि होती है।

डॉ. नन्दकिशोर नवलजन्म : 2 सितंबर, 1937 (चाँदपुरा, वैशाली, विहार) शिक्षा : एम.ए. (हिंदी), पी-एच.डी. (पटना विश्वविद्यालय) वृत्ति : अध्यापक (हिंदी विभाग, पटना विश्वविद्यालय)काव्य-रचना से साहित्यिक जीवन का आरंभ। 1954 में, जबकि हाई स्कूल के विद्यार्थी थे, गीतों का एक संग्रह प्रकाशित हुआ । विश्वविद्यालय में हिंदी की ऊँची शिक्षा प्राप्त करने के साथ प्रवृत्ति कविता की तरफ से मुड़कर शोध और आलोचना की तरफ उन्मुख होती गई। 1970 में 'निराला का काव्य-विकास' शीर्षक विषय पर शोधोपाधि की प्राप्ति ।'हिंदी आलोचना का विकास' नामक लेखमाला त्रैमासिक 'आलोचना' में प्रकाशित। अब पुस्तक रूप में प्रकाश्य । शोध-प्रबंध भी नये रूप में प्रकाशन के क्रम में । प्रस्तुत पुस्तक प्रथम निबंध संग्रह । स्फुट आलोचनात्मक तथा शोधपूर्ण निबंध, टिप्पणियाँ तथा पुस्तक समीक्षाएँ हिंदी की विभिन्न छोटी-बड़ी पत्रिकाओं में प्रकाशित। मार्क्सवादी विचारधारा से प्रतिवद्ध ।

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