Skip to content

Booksellers & Trade Customers: Sign up for online bulk buying at trade.atlanticbooks.com for wholesale discounts

Booksellers: Create Account on our B2B Portal for wholesale discounts

Khwabon Ka Tana-Bana

by Ratan Kumar Srivastava 'Ratan'
Save 35% Save 35%
Current price ₹322.00
Original price ₹495.00
Original price ₹495.00
Original price ₹495.00
(-35%)
₹322.00
Current price ₹322.00

Ships in 7-10 Days

Free Shipping in India on orders above Rs. 500

Request Bulk Quantity Quote
+91
Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9789371123785
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 198
  • Original Price: INR 495.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 350 grams
  • BISAC Subject(s): General

इसी पुस्तक से...हो गई बेवफ़ा ज़िदंगी झूठे ऐतबार पर। और हम करते रहे नाज़ अपने प्यार पर। न मिली वफ़ाएँ और न ही खुशबू मिली, मैं हैराँ बहुत हूँ, गुल-ए-गुलज़ार पर।★★★कोई तो बताए कि ये ख़ुमारी क्यूँ है। बरसों बाद भी इतनी बेक़रारी क्यूँI कहते हो तुम कि बुझ गई आग है, उठ रही राख से फिर चिंगारी क्यूँ है।★★★मुद्दत से जो मेरे साथ है।वही मेरा दाहिना हाथ है।मिलकर चले यूँ साथ हम,न देखा, दिन है कि रात है।★★★सौदा किया ऐसा उसने प्यार में।खड़े हों जैसे हम सरे बाज़ार में।मेरी थी, मेरी है, मेरी रहेगी वो,खा गए धोका, इसी ऐतबार में।★★★दिल से...यह इन्सानी फ़ितरत ही है कि आदमी के पास जो कुछ होता है या जो कुछ उसे आसानी से हासिल हो जाता है, वह उसकी वाजिब क़द्र नहीं करता। वहीं दूसरी ओर, जिन चीज़ों को पाना थोड़ा मुश्किल होता है या जो चीज़ें उसकी पहुँच से थोड़ी दूर होती हैं, उसी को पाने की लालसा और उधेड़बुन में इन्सान हर घड़ी बेचैन-सा रहता है। मेरे विचार में। बस कुछ ऐसा ही फ़लसफ़ा ज़िन्दगी का भी है कि आदमी जो चाहता है, वह उसे आसानी से हासिल नहीं हो पाता है।... प्रायः यह भी देखा गया है कि जिन अपनों के साथ और सान्निध्य में आदमी अपनी ज़िन्दगी का जो अहम और ख़ूबसूरत पल गुज़ारना चाहता है, उससे भी वह कभी-कभी महरूम रह जाता है।... वर्ष 2009 में, मेरी माँ का अचानक इस दुनिया से अलविदा हो कर जाना भी मेरे लिए कुछ ऐसा ही था।... इसलिए कुछ ख़्वाबों, ख़यालों एवं अनायास के तानों - बानों से, यदि किसी ग़ैर से भी थोड़ी-सी ख़ुशी या थोड़ा-सा प्यार, गाहे-बगाहे मिल जाए तो इसे लेने में परहेज़ नहीं रखना चाहिए। ख़्वाबों में ही सही, ज़िन्दगी थोड़ी-सी जीवन्त और ख़ुशहाल बनी रहती है — रतन कुमार श्रीवास्तव 'रतन'

रतन कुमार श्रीवास्तव 'रतन'जन्म : 18 अप्रैल, 1971 जन्म-स्थान : ग्राम व पोस्ट-कोटवाँ, तहसील- मछलीशहर, जनपद-जौनपुर, उ.प्र.-222143पिता : श्री बृजनाथ प्रसाद श्रीवास्तवमाता : स्व. (श्रीमती) पद्मावती देवी शिक्षा : एम.ए. (प्राचीन इतिहास)सम्प्रति सेवा-स्थल : निजी सचिव, उ. प्र. सचिवालय, लखनऊ विशेष : वर्ष 2021 में प्रकाशित पहली किताब ‘ख़्वाबों में ज़िदंगी मुस्कुराती रही’ (ग़ज़ल-संग्रह) के लिए वर्ष 2021-2022 का उ. प्र. सरकार का एक लाख रुपए का 'जयशंकर प्रसाद पुरस्कार' एवं अन्तरराष्ट्रीय स्तर की प्रसिद्ध साहित्यिक एवं सामाजिक संस्था ' कादम्बरी', जबलपुर (म.प्र.) का वर्ष 2024 का प्रतिष्ठित 'साज़ जबलपुरी स्मृति सम्मान'। यह किताब वर्ष 2021 की अमेजन की बेस्ट सेलर रैंकिग में भी शामिल रही तथा किताब को अब तक रु. 51,000/- की रॉयल्टी भी प्राप्त हो चुकी है।• संस्कृति विभाग, उ.प्र. सरकार द्वारा वर्ष 2022 में प्रायोजित 'हर घर तिरंगा नारा लेखन प्रतियोगिता' में पूरे देश में दूसरे स्थान पर चयनित एवं पुरस्कृत।• उ.प्र. राज्य पुरातत्व विभाग द्वारा वर्ष 2022 में आयोजित 'निबन्ध-लेखन प्रतियोगिता' में तृतीय स्थान पर चयनित एवं पुरस्कृत।• मुम्बई (महाराष्ट्र) की प्रतिष्ठित संस्था (हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई क़ौमी एकता) द्वारा वर्ष 2023 में ‘भारत मेरी जान अवार्ड' से सम्मानित एवं पुरस्कृत।• रू-ब-रू फ़ाउंडेशन, लखनऊ का वर्ष 2024 का ‘साहित्य श्री सम्मान'।• रेवांत संस्था, लखनऊ का वर्ष 2024 का 'रेवांत साहित्य गौरव सम्मान'।• देश-प्रदेश की प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में समय-समय पर प्रकाशित एवं पुरस्कृत अनगिनत रचनाएँ।

Trusted for over 49 years

Family Owned Company

Secure Payment

All Major Credit Cards/Debit Cards/UPI & More Accepted

New & Authentic Products

India's Largest Distributor

Need Support?

Whatsapp Us