Skip to content

Booksellers & Trade Customers: Sign up for online bulk buying at trade.atlanticbooks.com for wholesale discounts

Booksellers: Create Account on our B2B Portal for wholesale discounts

Kitne Janam Vaidehi

by Rita Shukla
Sold out
Current price ₹210.00
Original price ₹300.00
Original price ₹300.00
Original price ₹300.00
(-30%)
₹210.00
Current price ₹210.00

Ships in 7-10 Days

Free Shipping in India on orders above Rs. 500

Request Bulk Quantity Quote
+91
Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9788173151231
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
  • Publisher Imprint: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
  • Publication Date:
  • Pages: 250
  • Original Price: INR 300.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 177 grams
  • BISAC Subject(s): Short Stories (single author)

कैसा वर खोज रही हैं आजी, अपने रामचंद्रजी की तरह. .जीवित जानकी को आग की लपटों में बिठानेवाले, वानर- भालुओं के साथ मिलकर एक सती के सतीत्व का परीक्षण-पर्व निहारनेवाले..? मुझे तुम्हारे राम से एक बड़ी शिकायत है.. .पुरुषार्थ की कमी तो नहीं थी उनमें. .फिर क्यों नहीं सारे संसार को प्रत्यक्ष चुनौती दे सके-मैं राम अपनी प्रलंब भुजा उठाकर घोषणा करता हूँ-सीता के अस्तित्व पर, उनकी दृढ़ इच्छाशक्‍त‌ि पर मेरी उतनी ही निष्‍ठा है जितनी अपने आप पर..! फिर किसी अनलदहन का औचित्य किसलिए? जानकी जैसी हैं.. .जिस रूप में हैं, मैर लिए पूर्ववत् वरेण्या हैं...नहीं आजी, राम के अन्याय को भक्‍त‌ि, ज्ञान और अध्यात्म के तर्क से तुम उचित भले करार दो; लेकिन मेरा मन नहीं मानता.. ।जागेश्‍‍वरी आजी का संशय नंदिनी के सोच की प्रखरता में साकार हो चुका था । नंदिनी, उनकी तीसरी पीढ़ी.. भोजपुर का नया तिरिया-जनम..उनका मन हुआ था-बुद्धि को चिंतन की शास्ति देनेवाले अपने उस नए जनम से पूछें-अच्छा, बोल तो नंदू तुझे रामकथा लिखने का हक हमने दे दिया तो तू क्या लिखेगी.. अपने अक्षरों का तप कहाँ से शुरू करेगी..? -इसी उपन्यास से क्या आज की हर सीता का प्रारंभ भी वनवास और अंत अनलदहन से नहीं हो रहा ? यदि नंदिनी भी अपनी कथा सीता वनवास से ही प्रारंभ करे तो क्या वह आज की हर नारी का सच नहीं होगा? आधुनिक भारतीय समजि, मानव जीवन, विशेष रूप से स्त्री जीवन, को आधार बनाकर लिखा गया यह उपन्यास अपने समय की श्रेष्‍ठतम कृति है ।

ऋता शुक्लहिंदी के प्रख्यात साहित्यकार श्री रामेश्‍वरनाथ तिवारी की सुपुत्री ऋता शुक्ल का जन्म गाँव तिवारीपुर (निकट बक्सर), बिहार में हुआ । ऋताजी ' चाँद ' पत्रिका के आद्य संपादक पंडित नंदकिशोर तिवारी की वंशजा हैं । आपने ' हिंदी कहानी के विकास में महिला कथाकारों का योगदान ' विषय पर शोध की । आपकी कविताएँ कहानियाँ उपन्यास एवं शोधपरक वैचारिक आलेख देश- भर की लगभग सभी उच्च स्तरीय पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं । आपका पहला कथा-संकलन ' क्रौंचवध तथा अन्य कहानियाँ ' वर्ष 1984 में भारतीय ज्ञानपीठ द्वारा देश- भर से आमंत्रित कुल छियासी पांडुलिपियों में सर्वश्रेष्‍ठ घोषित, पुरस्कृत तथा प्रकाशित किया गया ।आपकी अब तक प्रकाशित कृतियाँ हैं-दंश, अग्निपर्व, समाधान, श्रेष्‍ठ आंचलिक कहानियाँ, शेषगाथा, कनिष्‍ठा उँगली का पाप तथा कितने जनम वैदेही ।

Trusted for over 49 years

Family Owned Company

Secure Payment

All Major Credit Cards/Debit Cards/UPI & More Accepted

New & Authentic Products

India's Largest Distributor

Need Support?

Whatsapp Us