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Kranti Hai Prem

by Ranjana Jaiswal
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Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9789350728598
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 78
  • Original Price: INR 200.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 200 grams
  • BISAC Subject(s): General

क्रान्ति है प्रेम - हज़ारों वर्षों से साहित्य-संस्कृति और जीवन में प्रेम की बातें की जा रही हैं, पर प्रेम चिर नवीन बना हुआ है, अपरिभाषित है, शास्त्र और सिद्धान्त उसकी व्याख्या नहीं कर पाये क्योंकि प्रेम का न कोई शास्त्र हो सकता है, न परिभाषा और न कोई सिद्धान्त। प्रेम को जानना, प्रेम में होना, प्रेम में जीना तो आसान है। पर प्रेम क्या है यह कहना आसान नहीं है। भला गूँगा मिठाई का स्वाद कैसे बतायेगा? बस इतना ही कहा जा सकता है कि संसार में जो भी सबसे सुन्दर, सत्य और उत्तम है वही प्रेम है। हर इन्सान के लिए प्रेम का रूप अलग है, अनुभव का स्तर भी। कोई देह स्तर पर प्रेम को पाकर सन्तुष्ट हो जाता है तो कोई मन की गहराई तक उतरता है। थोड़े से वे लोग भी होते हैं जो तन-मन से भी गहरे उतर कर आत्मा तक जा पहुँचते हैं और वे ही प्रेम की पूर्णता का अनुभव प्राप्त कर पाते हैं। संसार में जिन प्रेमियों के नाम अमर हैं उन्होंने प्रेम के आत्मिक स्वरूप का आनन्द लिया था तभी तो दुनियावी चीज़ों का उनके लिए कोई महत्त्व नहीं रहा। वे ख़ुशी-ख़ुशी अपना सब कुछ न्योछावर करके शून्य हो गये। जानते थे कि शून्य होकर ही वे प्रेम की पराकाष्ठा तक पहुँच सकते हैं। शून्य से ही प्रेम का जन्म होता है क्योंकि एक शून्य ही दूसरे शून्य से मिल सकता है, और कोई नहीं।

रंजना जायसवाल - मैं रंजना जायसवाल, एम.ए., पीएच.डी. (हिन्दी), जन्म स्थान पड़रौना (उत्तर प्रदेश) वर्तमान में एक मिशनरी कालेज में शिक्षिका हूँ। वैसे तो लेखन की शुरुआत बचपन में ही हो गयी थी, यदा-कदा छपती भी रहती थी, पर 1997 से ज़्यादा सक्रिय हूँ। अब तक मेरी निम्न पुस्तकें प्रकाशित हैं- मछलियाँ देखती हैं सपने, दुःख-पतंग, ज़िन्दगी के काग़ज़ पर, माया नहीं मनुष्य, जब मैं स्त्री हूँ, सिर्फ़ काग़ज़ पर नहीं (काव्य-संग्रह)। तुम्हें कुछ कहना है भर्तृहरि, औरत के लिए (कहानी-संग्रह), स्त्री और सेंसेक्स (लक्ष-संग्रह)।...और मेघ बरसते रहे (उपन्यास)।देश की सभी महत्त्वपूर्ण पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएँ छपती रहती हैं। अब तक मुझे निम्न सम्मान मिल चुके हैं- अ.भा. अम्बिका प्रसाद दिव्य पुरस्कार (मध्य प्रदेश), भारतीय दलित साहित्य अकादमी पुरस्कार (गोंडा), स्पेनिन साहित्य गौरव सम्मान (राँची, झारखंड), विजय देव नारायण साही कविता सम्मान (लखनऊ, हिन्दी संस्थान) साहित्य ही मेरा साध्य व साधन दोनों है।

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