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Krishnayan

by Kaajal Ozavaidya
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Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9788173158162
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
  • Publisher Imprint: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
  • Publication Date:
  • Pages: 120
  • Original Price: INR 500.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 175 grams
  • BISAC Subject(s): General

कृष्णायन—काजल ओझा-वैद्यअनुवाद : डॉ. अंजना संधीरकृष्ण एक ऐसा व्यक्तित्व हैं, जिन्हें आप ‘विराट्’ कह सकते हैं। ‘महाभारत’ में कृष्ण एक राजनीतिज्ञ के रूप में प्रकट होते हैं तो ‘भागवत’ में उनका दैवी स्वरूप दिखाई देता है। ‘गीता’ में वे गुरु हैं, ज्ञान का भंडार हैं। ईश्वर होते हुए भी उन्होंने मानव का ही जीवन जीया। वे एक ऐसे इनसान हैं, जिनका शरीर शायद यह दुनिया छोड़कर चला गया, परंतु आत्मा की प्रबलता, स्वच्छता या दिव्यता सर्वव्यापी बन गई।मृत्यु को देख चुके, अनुभव कर चुके कृष्ण जीवन के अंतिम क्षणों में जीवन की कुछ घटनाओं को फिर एक बार देखते हैं, उनकी अनुभूति करते हैं, उन्हें फिर जीते हैं। जीवन के अंतिम प्रयाण से पहले के कुछ क्षणों का एक सूक्ष्म पड़ाव है—‘कृष्णायन’।प्रस्तुत पुस्तक में वह कृष्ण हैं, जिन्हें आप कॉफी की टेबल पर सामने देख सकते हैं। ये वह कृष्ण हैं, जो आपकी दैनिक चर्या में आपके साथ रहेंगे। ये कोई योगेश्वर, गिरधारी, पाञ्चजन्य फूँकनेवाले, गीता का उपदेश देनेवाले कृष्ण नहीं हैं। ये तो आपके साथ मॉर्निंग वॉक करते-करते आपको जीवन का दर्शन समझानेवाले आपके ऐसे मित्र हैं, जिन्हें आप कुछ भी कह सकते हो और वे वैल्यूशीट पर बैठे बिना आपको समझाने का प्रयास करेंगे।हमारा विश्वास है कि अगर आप कृष्ण को अपना मानोगे तो वे आपको इतना अपना लगेंगे कि आपको कभी किसी मित्र की, साथी की, किसी सलाहकार अथवा किसी के सहारे की खोज नहीं करनी पड़ेगी।

काजल ओझा वैद्य गुजराती साहित्यिक जगत् का एक विशिष्‍ट नाम है, जिन्होंने मीडिया, थिएटर और टेलीविजन पर विविध भूमिकाएँ निभाई हैं।उन्होंने सात लोकप्रिय नाटक लिखे हैं—‘सावका’, ‘गुरु ब्रह्मा’, ‘पितृदोष’, ‘अश्‍वमेध’, ‘द परफैक्ट हस्बैंड’, ‘चुंग चिंग’ तथा ‘डॉक्टर, तमे पान!’ साथ ही अनेक उपन्यास—‘छाल’ (दो भागों में), ‘मनुराग’, ‘योग-वियोग’ (तीन भागों में), ‘पारिजात न परोध’, ‘पोत पोतनी पाँखर’ (दो भागों में), ‘लिलु सागपान लोही नू’, ‘तारा चेहरा नी लागो लाग’, ‘मध्य बिंदु’, ‘कृष्णायन’, ‘सर्च लाइट’, ‘बदली आस्था’, ‘तारा विनान सहेरमा’ तथा ‘एक संजना सरनेम’ भी लिखे हैं। ‘संबंध...तो आकाश’ (कहानी-संग्रह) तथा ‘शेष यात्रा’ (कविता-संग्रह) के अलावा अनेक टी.वी. सीरियल यथा ‘एक डालना पाँखी’, ‘माँ’, ‘सात ताडी’, ‘एक मोती एकलव्यून’, ‘धाबकार’, ‘तलाश’, ‘अपने पराए’, ‘कोई सपनों के दीप जलाए’, ‘कुछ ख्वाब कुछ हकीकत’ और ‘महासती सावित्री’ का भी लेखन किया है।अनुवादक परिचयअंजना संधीर1 सितंबर को रुड़की (उ.प्र.) में जनमी डॉ. अंजना संधीर मनोविज्ञान में पी-एच.डी. हैं हिंदी, अंग्रेजी, गुजराती और उर्दू में समान अधिकार से लेखन। कई विधाओं में दर्जन भर पुस्तकें प्रकाशित। दूरदर्शन के लिए धारावाहिक का निर्माण। ‘तुलसी सम्मान’, ‘अदिति शिखर सम्मान’ सहित अनेक सम्मानों से-सम्मानित।संप्रति : अध्यापन, गुजरात विद्यापीठ, अहमदाबाद।

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