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Kunwarji Agarwal: Natya Ke Aksharbeej

by Archana Agrawal
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Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9789350724040
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 284
  • Original Price: INR 495.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 500 grams
  • BISAC Subject(s): General

नाट्य के अक्षरबीज - नाट्य के विविध पहलुओं पर लिखे गये अट्ठाईस विचारोत्तेजक लेखों का संग्रह, जिनकी रेंज हिन्दी नाट्यकर्म के विकास के प्रमुख पड़ावों की चर्चा, लिखित नाट्य और नाट्यप्रस्तुतियों की समीक्षा, दो-एक विशिष्ट नाट्यसिद्धान्तों का स्पष्टीकरण करने से लेकर वर्तमान समय की समग्र नाट्यचिन्ता और सरोकारों से रू-ब-रू कराना तक है। साहित्य के विद्यार्थी, नाट्य के विद्यार्थी, फ़िल्म के अध्येता, समीक्षक, विचारक और मंचकलाओं में रुचि रखने वाले किसी भी गम्भीर पाठक के लिए एक उपयोगी और ज़रूरी पुस्तक।

अर्चना अग्रवाल - संस्कृत से एम.ए. और नाट्यशास्त्रीय अभिनय पर पीएच.डी. की उपाधि के साथ भरतनाट्यम् नृत्य में प्रभाकर शोधकार्य के लिए जवाहरलाल नेहरू स्मारक छात्रवृत्ति के माध्यम से इंडोनेशिया जाकर वहाँ की मंचकलाओं का भारतीय सन्दर्भ में अध्ययन। शोधकार्याधारित पुस्तक 'नाट्यशास्त्रीय अभिनय : सिद्धान्त एवं प्रयोग' सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी से प्रकाशित। पाँच वर्षों तक आर्य महिला पी.जी. कॉलेज, वाराणसी में अध्यापन के पश्चात् सम्प्रति स्वतन्त्र लेखन एवं शोधकार्य में संलग्न।कुँवरजी अग्रवाल - कुँवरजी अग्रवाल वाराणसी के सांस्कृतिक परिवेश का जाना माना नाम हैं। रंगमंच कला के आजीवन कलाकार, सक्रिय कार्यकर्ता और अध्येता रहते हुए वे वाराणसी के सांस्कृतिक वातावरण को समृद्ध करने के प्रति जीवनपर्यन्त समर्पित हैं। मंचकलाओं, दृश्यकलाओं, साहित्य और सिनेकलाओं के आपसी अन्तःसम्बन्ध के प्रति विशिष्ट नज़रिये से युक्त : संस्कृति और कला का उनका अध्ययन उनके व्यक्तित्व को विशिष्टता प्रदान करता है।मुख्य रूप से स्वतन्त्र लेखन, प्रस्तुति इत्यादि करते हुए उन्होंने कुछ वर्ष नागरी प्रचारिणी सभा के सम्पादन विभाग में कार्य किया, दृश्यकला संकाय, का.हि.वि.वि. में शोध और अध्यापन किया और राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के अतिथि संकाय के सदस्य के पद पर अध्यापन और शोध करते रहे। हिन्दी में विभिन्न प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में अनेक तात्विक लेख और कुछ पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं और कुछ अन्य लेखन-प्रकाशन के क्रम में हैं। अपने जीवन के 78 वर्ष (जन्म 1933) पूर्ण करते हुए आप आज भी सक्रिय और कार्यसंलग्न हैं, निरन्तर सीखने और आत्मविकास की ओर अग्रसर!

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