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Kya Kahoon Main, Main Kaun Hoon

by Mugdha Sinha
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Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9789357758970
  • Binding: Paperback
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 148
  • Original Price: INR 299.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 150 grams
  • BISAC Subject(s): General

मुग्धा की कविताएँ सवाल पूछती हैं ख़ुद से और पाठकों से जवाब देने का आसान रास्ता नहीं अपनातीं। सवाल पूछने वाले लड़के की तरह कविता की पंक्तियों के नाज़ुक धागे उलझे ही छोड़ देती हैं। सुलझे या नहीं इन कविताओं का सुख- दुःख इनको सुलझाने के प्रयास में है। अनेक शब्द चित्र/बिम्ब मर्मस्पर्शी हैं और ध्वनि की अनुगूँज देर तक हमारे साथ रहती है। किसी महाकवि ने कहा है—कोई भी कविता कभी पूरी नहीं होती। जब कवि उन्हें प्रकाशित कर उनको पाठकों के साथ साझा करता है तो महज़ सबसे ताज़ा मसौदा इन्हें सौंप रहा होता है। हम मुग्धा के आभारी हैं कि उन्होंने अपनी यह रचनाएँ हमारे रसास्वादन के लिए प्रस्तुत की हैं। वर्षों पहले मुग्धा को पढ़ाने का अवसर मिला था। इस बीच बहुत कुछ बदला, जो नहीं बदला वह है मुग्धा की ऊर्जा और उत्साह। मेरे लिए यह सन्तोष का विषय है कि मुग्धा ने इन कविताओं के संग्रह की भूमिका लिखने का मौका मुझे दिया। अशेष शुभकामनाओं के साथ मैं साभार इन्हें आप तक पहुँचाते हुए अनोखे हर्ष का अनुभव कर रहा हूँ। -पुष्पेश पन्त

मुग्धा सिन्हाजन्मस्थली उत्तर प्रदेश, दिल्ली-राजस्थान कर्मभूमि और मुम्बई को आपने अपना घर चुना। प्रारम्भिक शिक्षा चण्डीगढ़, दिल्ली व आगरा से ग्रहण की। इतिहास में बी. ए. ऑनर्स लेडी श्रीराम कॉलेज, नयी दिल्ली से एवं अन्तर्राष्ट्रीय सम्बन्ध में एम. ए. और अन्तर्राष्ट्रीय कूटनीति में एम.फिल. जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नयी दिल्ली से किया। आपने गोल्डमैन स्कूल ऑफ़ पब्लिक पॉलिसी, बर्किली यूनिवर्सिटी, कैलिफोर्निया यू. एस. ए. से पब्लिक पॉलिसी का अध्ययन किया। सन् 1999 में आपका चयन भारतीय प्रशासनिक सेवा में हुआ, जहाँ आप विभिन्न ज़िलों बूँदी, हनुमानगढ़, झुंझुनू, श्रीगंगानगर में कलेक्टर एवं केन्द्र और राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में कार्यरत रही हैं।स्कूल में बेस्ट ऑल-राउंडर स्टूडेंट और आई.सी.एस.ई. में प्रथम स्थान पर रहीं। कॉलेज में इतिहास में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर मनोरमा देसाई अवार्ड' और 'प्रिंसिपल प्राइज़ फ़ॉर प्रमोटिंग अकेडमिक्स एथॉज इन कॉलेज' से नवाज़ी गयीं। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के फोर्ड फाउंडेशन स्कॉलरशिप और यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन के नेशनल एलिजिबिलिटी टेस्ट में जूनियर रिसर्च फेलोशिप प्राप्त हुई। स्कूल में कविता पाठ, वाद-विवाद, नाटक एवं कला प्रतियोगिताओं में जमकर हिस्सा लिया। कॉलेज में आप स्पीकर्स फ़ोरम की कन्वीनर रहीं, जहाँ आप जानी-मानी हस्तियों से चर्चा करवाती थीं। गत चार वर्षों से आप आई.ए.एस. एसोसिएशन, राजस्थान की साहित्यिक सचिव के रूप में लेखकों से किताबों पर परिचर्चा कराती आ रही हैं। आप अभी भारत सरकार के संस्कृति मन्त्रालय में संयुक्त सचिव हैं।इन्हें किताबें पढ़ना, मेडिटेटिव मण्डाला डूडल करना, काँच की बोतलों को पेंट करना और तस्वीरें खींचने का शौक है। दुनिया में विचरण करना और एकान्त में रहना, दोनों के बीच नटनी जैसा समन्वय इन्हें स्थिरप्रज्ञ रखता है। बचपन से ही आपका शब्दों से एक गहरा रिश्ता रहा, जो समय और अनुभव से इस रचना के रूप में आपके समक्ष प्रस्तुत है। यह आपका हिन्दी में पहला कविता संग्रह है।

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