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Loktantra Ke Paye

by Manohar Puri
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Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9788188266746
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
  • Publisher Imprint: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
  • Publication Date:
  • Pages: 176
  • Original Price: INR 200.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 250 grams
  • BISAC Subject(s): Political Ideologies / Democracy

लोकतंत्र के पायेअनूठा व्यंग्य शिल्पीमनोहर पुरी में वैचारिक संप्रेषण संसार रचने की अपूर्व विशेषता है। वे दुखती रग को पहचानते हैं। वे उपदेष्‍टा नहीं हैं, किंतु एक उपदेशकीय दृष्‍टि की सृष्‍टि अवश्य ही रच देते हैं। उनके व्यंग्य का कैनवास बहुआयामी तथा सर्वग्राही है। उनकी व्यंग्य-क्षुधा किसी भी विद्रूपता या विडंबना को वर्ज्य नहीं मानती।—बालेंदु शेखर तिवारीस्पष्‍ट दृष्‍टिकोण का व्यंग्यकर्मीमनोहर पुरी एक ऐसे सजग, चिंतनशील रचनाकार हैं जो अपने स्पष्‍ट दृष्‍टिकोण एवं विचारधारा के तहत राजनीतिक क्षेत्र में व्याप्‍त विसंगतियों की व्यंग्यात्मक आलोचना कर रहे हैं। उनकी रचनाओं में व्यंग्य के नए शिल्प की पकड़ दिखाई देती है। गद्यात्मक व्यंग्य रचनाओं में पद्य की एक अलग लय है, जो पाठक को कविता का आनंद देती है।—प्रेम जनमेजयविशिष्‍ट शैली के रचनाकारमनोहर पुरी का व्यंग्य-संसार बहुत विस्तृत है। उन्होंने राजनीति, समाज, संस्कृति, प्रशासन, धर्म आदि क्षेत्रों की विसंगतियों की बहुत गहरे तक जाकर पड़ताल की है। उनकी शैली में एक अलग किस्म का चुटीलापन है।—सुभाष चंदरतेजाबधर्मी व्यंग्य हस्ताक्षरमनोहर पुरी के व्यंग्य में एक पत्रकार की खोजी ‘दीठ’ है, जो उनके लेखकीय कैनवास को विराट् आयाम देती है। उनकी व्यंग्य भाषा में एक निश्‍च‌ित ‘राग’ है, जो उसे काव्यमय बना देता है। इसीलिए इनका व्यंग्य-शूल तुकांत शैली की पंखुड़ियों में छुपकर चुभन का दंश देता है।—नंदलाल कल्ला

मनोहर पुरीजन्म : 2 अक्‍तूबर,1944शिक्षा : राजनीति विज्ञान में एम.ए.। कृतित्व : ‘प्लेटो और अरस्तू के दार्शनिक सिद्धांत’, ‘प्राचीन यूनानी विचारक’, ‘ट्रकवाहिनी रेल व्यवस्था’, ‘समकालीन भारत’ (समीक्षात्मक ग्रंथ), ‘अतीत की परछाइयाँ’, ‘सीप में समुद्र’ (काव्य-संकलन), ‘रौंदकर दौडि़ए’, ‘मेरा भारत महान’, ‘चंद बीवियों की तलाश’, ‘जूठन’ (व्यंग्य-संकलन), ‘उन्नीस महीने’, ‘जिंदगी और जुगाड़’ (उपन्यास), ‘तूलिका’, ‘यूँ ही कह दिया होगा’ (कहानी संग्रह) तथा अब तक बच्चों के लिए साठ शिक्षाप्रद पुस्तकें प्रकाशित।हिंदी, अंग्रेजी एवं अन्य भारतीय भाषाओं में पत्रकारिता, संचार, पर्यटन तथा पर्वतारोहण इत्यादि विषयों पर अनेक पुस्तकें प्रकाशित। वर्षों से आकाशवाणी, अनेक प्रतिष्‍ठित भारतीय व विदेशी संचार माध्यमों एवं पत्रों के लिए लेख, कविताएँ, कहानियाँ, व्यंग्य और संसद् समीक्षा लिख रहे हैं।सम्मान : हिंदी अकादमी, दिल्ली द्वारा ‘साहित्यकार सम्मान’ तथा रेल मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा मौलिक हिंदी लेखन के लिए पुरस्कृत।संप्रति : बहुभाषायी समाचार एवं प्रसंग लेख सेवा एक्सप्रेस मीडिया सर्विस के राजनीतिक संपादक।

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