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Maalgudi Ka Aadamkhor

by R.K. Narayan
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Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9788170288770
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Rajpal and Sons
  • Publisher Imprint: Rajpal
  • Publication Date:
  • Pages: 192
  • Original Price: INR 225.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 720 grams
  • BISAC Subject(s): Classics

"गोलगप्पों की तरह चटपटा 'मालगुडी का आदमख़ोर' उपन्यास, कहानी लेखन के विभिन्न तत्त्वों का शानदार मिश्रण है। हास्य और गंभीरता के चरम का ऐसा मेल और कहीं भी मिलना मुश्किल है...आर. के. नारायण के लेखन की खास बात उसका सहज और स्पष्ट होना है..." - टाइम्स लिटरेरी सप्लिमेंट, लंदन विश्व प्रसिद्ध 'मालगुडी की कहानियां' की तरह ही आर. के. नारायण के इस उपन्यास की पृष्ठभूमि भी उनका प्रिय काल्पनिक शहर मालगुडी है। यहां रहने वाले नटराज की शांत जि़ंदगी में तब भूचाल आ जाता है, जब उसकी प्रिंटिंग प्रेस की ऊपरी मंजि़ल पर वासु डेरा डाल लेता है। वासु अव्वल दर्जे का गुंडा और फसादी है। उसका पेशा मरे हुए जानवरों की खाल में भूसा भर उन्हें सजावटी रूप देना है, इसलिए वह खुलेआम उनका शिकार करता है। यहां तक कि नटराज की प्यारी बिल्ली भी वासु की भेंट चढ़ जाती है और वह कुछ नहीं कर पाता। बड़े शिकार की तलाश में वासु मंदिर के हाथी पर निशाना साधने की फिराक में है। आखिरकार, नटराज भी वासु को सबक सिखाने की ठान लेता है और बड़ी होशियारी और सावधानी से एक-एक कर उसकी सभी चालों को नाकाम कर देता है। मंदिर में नृत्य करने वाली दिलकश रंगी और नटराज का निजी सहायक शास्त्री 'मालगुडी का आदमखोर' को और भी रंगीन और दिलचस्प बनाते हैं। उनकी बातें और हरकतें भीतर तक गुदगुदा देती हैं।

अपने उपन्यास 'गाइड' के लिये साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित तथा पद्मविभूषण द्वारा अलंकृत उपन्यासकार आर. के. नारायण विश्वस्तरीय रचनाकार गिने जाते हैं। आर. के. नारायण शायद अंग्रेज़ी के ऐसे पहले भारतीय लेखक हैं जिनके लेखन ने केवल भारतीय बल्कि विदेशी पाठकों में भी अपनी जगह बनाई। उन्होंने अपने उपन्यासों और कहानियों के लिए न केवल रोचक विषयों को चुना, बल्कि उन्हें अपने चुटीले संवादों से इतना चटपटा भी बना दिया कि जिसने भी उन्हें एक बार पढ़ा उसमें नारायण की रचनाओं को पढ़ने की चाहत और बढ़ गई।

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