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Madhyakaleen Bharat: Ek Sabhyata Ka Adhyayan

by Irfan Habib
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Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9789357751575
  • Binding: Paperback
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 304
  • Original Price: INR 295.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 400 grams
  • BISAC Subject(s): General

इस पुस्तक में सामान्यतया और मुख्यतयासांस्कृतिक, राजनीतिक संगठन, धर्म, कलाऔर शिक्षा जैसे पहलुओं को समाहित करनेका प्रयास किया गया है लेकिन साथ ही उनपक्षों पर जैसे कि सामाजिक संरचना,अर्थव्यवस्था और तकनीक पर भी बल दियागया है जिन्हें परम्परागत और पूर्व के सर्वेक्षणमें अपर्याप्त प्राथमिकता दी जाती रही है। इसलम्बे कालखण्ड और दुरूह विषय केसुविधाजनक, समुचित और व्यवस्थितअध्ययन के लिए इसे तीन कालखण्डों क्रमशः600-200 ईसा, 900-500 ईसा और500-750 ईसा में विभाजित किया गयाहै। इस सन्दर्भ में यह तथ्य ध्यातव्य औरद्रष्टव्य है कि कथित अन्तिम चरण में पुस्तकका कमोबेश 60 फ़ीसदी भाग अन्तर्भूत है।ऐसा केवल दो-ढाई दशक के नजदीकीकालखण्ड होने के कारण लाजिमी औरस्वाभाविक दिलचस्पी का विषय नहीं हैबल्कि पूरे कालखण्ड से सम्बद्ध प्रामाणिकप्राथमिक सामग्री, ऐतिहासिक अभिलेखों,व्यापक एवं विस्तारित ऐतिहासिक सिद्धान्तों,पाण्डुलिपियों, विदेशी यात्रियों केयात्रापवृत्तान्तों और यूरोपीय वाणिज्यिकअभिलेखों की शक्ल में अनेक पुस्तकों कीउपलब्धता के कारण भी है, वास्तव में हमलोग पूर्ववर्ती सैकड़ों वर्षों की तुलना में इसकथित शताब्दी से अधिक अवगत हैं। यहहमें इस दौर के हर पहलू को विस्तार औरगहरे जाकर पड़ताल करने के लिए प्रेरितकरता है जो इसके पूर्ववर्ती कालखण्ड केलिए सम्भव नहीं था । मुझे ऐसा प्रतीत हुआकि इन परिस्थितियों के बरअक्स सर्वेक्षण केलिए की जाने वाली शताब्दियों को यान्त्रिकरूप से श्रेणीबद्ध और वर्गीकृत करनाअनुचित और अविवेकी होगा। बेहतर औरतार्किक यह होगा कि जिसके सन्दर्भ में हमेंअधिक ज्ञात है; अथवा जिनसे सम्बन्धितप्रामाणिक साक्ष्यों और स्रोतों की उपलब्धतासहज और सुलभ है उन्हें केन्द्रीय विषयबनाया. जाये और उनके बारे मेंअधिक-से -अधिक लिखा जाये ।-प्रस्तावना से

इरफ़ान हबीब (1931) भारत के अन्तरराष्ट्रीय स्तर के इतिहासकार हैं। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से इतिहास में एम.ए. करने के बाद ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय (इंग्लैंड) से उन्होंने डी. लिट्. की उपाधि ली है। ऐग्रेरियन सिस्टम ऑफ़ मुग़ल इंडिया जैसी विश्वविख्यात पुस्तक लिखने के अलावा एन अटलस ऑफ़ मुग़ल एम्पायर (1982) भी तैयार किया है। सौ से ऊपर शोध-पत्र लिखे हैं और कुछ महत्त्वपूर्ण पुस्तकों का सम्पादन किया है। वे पीपुल्स हिस्ट्री ऑफ़ इंडिया श्रृंखला के प्रधान सम्पादक हैं। इतिहास में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए रवीन्द्र भारती कलकत्ता विश्वविद्यालय, कलकत्ता ने उनको डी.लिट्. की मानद उपाधि से और अमेरिकन हिस्टोरिकल एसोसिएशन ने बाटमुल पुरस्कार से सम्मानित किया है। सम्प्रति वे अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग में प्रोफ़ेसर एमेरिटस हैं।

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