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Main Hindu Kyon Hoon

by Shashi Tharoor
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Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9789388434669
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 356
  • Original Price: INR 799.0
  • Language: Hindi
  • Edition: 3rd Edition
  • Item Weight: 500 grams
  • BISAC Subject(s): General

“इक्कीसवीं सदी में, हिन्दूवाद में एक सार्वभौमिक धर्म के बहुत से गुण दिखाई देते हैं। एक ऐसा धर्म, जो एक निजी और व्यक्तिवादी धर्म है; जो व्यक्ति को समूह से ऊपर रखता है, उसे समूह के अंग के रूप में नहीं देखता। एक ऐसा धर्म, जो अपने अनुयायियों को जीवन का सच्चा अर्थ स्वयं खोजने की पूरी स्वतन्त्रता देता है और इसका सम्मान करता है। एक ऐसा धर्म, जो धर्म के पालन के किसी भी तौर-तरीके के चुनाव की ही नहीं, बल्कि निराकार ईश्वर की किसी भी छवि के चुनाव की भी पूरी छूट देता है। एक ऐसा धर्म, जो प्रत्येक व्यक्ति को स्वयं सोच-विचार करने, चिन्तन-मनन और आत्म-अध्ययन की स्वतन्त्रता देता है।"“हिन्दूवाद एक अन्तर-निर्देशित या अन्तर- उन्मुख धर्म है जो आत्म-बोध पर और आत्मा और ब्रह्म (परमात्मा) के मिलन या एकात्मता पर जोर देता है। दूसरी तरफ़, हिन्दुत्व एक बाह्य उन्मुख धारणा है, जो एक राजनीतिक उद्देश्य के लिए सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान पर केन्द्रित है। इसलिए 'हिन्दुत्व' हिन्दूवाद के केन्द्रीय सिद्धान्तों और मान्यताओं से पूरी तरह कटी हुई धारणा है। फिर भी यह हिन्दूवाद की पीठ पर सवार होकर और इसका प्रतिनिधित्व करने का दावा करके अपने लक्ष्य को प्राप्त करना चाहती है। यह हिन्दू धर्म को ईश्वर के साथ जुड़ने के माध्यम की बजाय एक सांसारिक-राजनीतिक पहचान के बिल्ले के रूप में देखती है। इसका स्वामी विवेकानन्द या आदि शंकराचार्य के हिन्दूवाद से कुछ भी सम्बन्ध नहीं है।" 'हिन्दुत्व अभियान' आत्मविश्वास का प्रतीक न होकर असुरक्षा की भावना का सूचक है। यह अतीत में बार-बार मुसलमानों के हाथों हिन्दू राजाओं की पराजय और अपमान की कथाओं और विजेताओं द्वारा मन्दिरों के विनाश और ख़ज़ानों की लूट की घटनाओं की याद दिलाते रहने पर ही टिका हुआ है। दूसरे शब्दों में कहें तो हिन्दुत्व वृत्तान्त हिन्दुओं को 'पीड़ित' के रूप में प्रस्तुत करता है, न कि एक महान सभ्यता और धर्म के गर्वीले प्रतिनिधियों के रूप में। यह विफलता और पराजय की भावना का वृत्तान्त है, न कि एक महान और विश्व के सबसे उदात्त धर्म का आत्मविश्वास भरा वृत्तान्त। यह अतीत की विफलताओं की स्मृतियों में क़ैद वृत्तान्त है, इसलिए इसे एक विकासशील वर्तमान और सुनहरा भविष्य दिखाई ही नहीं देता । "“एक हिन्दू के रूप में मैं ऐसे धर्म से सम्बन्ध रखता हूँ जो मेरे पूर्वजों के प्राचीन ज्ञान से ओत-प्रोत है। मैं अपनी जन्मभूमि में अपने धर्म के इतिहास पर गर्व करता हूँ। मैं आदि शंकराचार्य की यात्राओं पर गर्व करता हूँ, जिन्होंने देश के दक्षिणी छोर से उत्तर में कश्मीर तक और पश्चिम में गुजरात से पूर्व में ओडिशा तक यात्राएँ करते हुए हर जगह विद्वानों के साथ शास्त्रार्थ किया, धार्मिक प्रवचन दिये और अपने मठ स्थापित किये। मेरी इस भावना को हार्वर्ड की विद्वान डायना ईक के भारत के 'पवित्र भूगोल' की इन पंक्तियों से और बल मिलता है- 'तीर्थयात्राओं के अनेकानेक भागों से आपस में गुँथे लोग' । महान दार्शनिक और भारत के राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने हिन्दुओं को परिभाषित करते हुए लिखा था - 'एक साझे इतिहास, साझे साहित्य और साझी सभ्यता वाली विशिष्ट सांस्कृतिक इकाई' । हिन्दूवाद के साथ अपना जुड़ाव व्यक्त करते हुए मैं सचेत रूप से इस भूगोल और इतिहास, साहित्य और सभ्यता का वारिस होने का दावा करता हूँ; (करोड़ों अन्य वारिसों के साथ) उस आराध्य परम्परा का उत्तराधिकारी होने का दावा, जो युगों-युगों से यूँ ही चली आ रही है।"

शशि थरूर विख्यात आलोचक एवं स्तम्भकार होने के साथ-साथ 15 कथा-साहित्य एवं अन्य पुस्तकों के लोकप्रिय लेखक हैं। आपकी पुस्तकों में महत्तवपूर्ण व्यंग्य पुस्तक ‘द ग्रेट इण्डियन नॉवेल 1989, इण्डिया : फ्रॉम मिडनाइट टू द मिलेनियम (1997) और हाल ही में इंडिया शास्त्रः रिफलैक्शन्स ऑन द नेशन इन आवर टाइम 2015 शामिल हैं। वे संयुक्त राष्ट्र के पूर्व अवर महासचिव और भारत सरकार के पूर्व मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री और विदेशी मामलों के पूर्व राज्य मंत्री रहे हैं। वे तिरुवनंतपुरम से दो बार लोकसभा सदस्य रहे हैं और संसद की विदेश मामलों की समिति के अध्यक्ष हैं। उन्हें कॉमनवेल्थ राइटर्स प्राइज़ सहित अनेक साहित्यिक पुरस्कार प्राप्त हुए हैं और एनडीटीवी द्वारा उन्हें न्यू एज पॉलिटिशियन ऑफ़ द इयर 2010 से सम्मानित किया गया। उन्हें विदेशों में रहने वाले भारतीयों के लिए भारत के सर्वोच्च सम्मान प्रवासी भारतीय सम्मान से भी सम्मानित किया गया।

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