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Malushahi Mera Chhalia Buransh

by Pragya
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Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9789392186783
  • Binding: Paperback
  • Subject: N/A
  • Publisher: Lokbharti Prakashan
  • Publisher Imprint: Lokbharti Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 160
  • Original Price: INR 199.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 190 grams
  • BISAC Subject(s): N/A

‘मालूशाही...मेरा छलिया बुरांश’ संग्रह की नौ कहानियाँ यथार्थ के विविध रूप हैं। कहीं अच्छे आदमी का अपने भीतर के बुरे को पहचाना जाना है तो कहीं प्रतिकूल समय की नब्ज़ को टटोलना है। कोई कहानी शिक्षा के दरीचे को पाठक के लिए नए सिरे से खोलती है तो कोई माटी का राग छेड़ देती है। यथार्थ के अन्तर्विरोधी स्वरों को पकड़ना हो या फिर उसके भीतर प्रवाहित छिपी हुई धवल लहर को देख पाना-कथाकार प्रज्ञा की कहानियाँ उसे पाठक के सामने लाती रही हैं। प्रज्ञा की कहानियों के विषय विविध हैं। श्रमशील वर्ग से लेकर मध्यवर्ग, शहर से लेकर गाँव और उसके सामाजिक-आर्थिक-राजनीतिक परिवर्तनों को पकड़ने की दृष्टि प्रज्ञा के पास है। उपेक्षित हाशिए के विविध चेहरों को, उनकी आवाज़ों को कथाकार ने बेहद मज़बूती के साथ दर्ज कराया है। उनकी कहानियाँ हों या उपन्यास यह ख़ासियत उनमें देखी जा सकती है। प्रज्ञा के रचे किरदार अनेक समस्याओं से जूझते हैं पर उम्मीद का दामन नहीं छोड़ते। प्रतिरोध की ताक़त और उत्कट जिजीविषा के साथ वे हौसले की डोर थामे रहते हैं। कई बार टूटते भी हैं पर जीवन से भागते नहीं। 

परिवेश, शिल्प और बारीक़ बुनावट ‘मालूशाही...मेरा छलिया बुरांश’ की कहानियों में देखी जा सकती है। स्वाभाविक की आशा और नियत की अनिश्चितता से प्रज्ञा अपनी कहानियों का संसार बुनती हैं। इसीलिए उनकी अधिकांश कहानियाँ रहस्य और जिज्ञासा से भरी होकर पाठक को उस अन्त पर ले जाकर खड़ा करती हैं जो उसकी चेतना में लगभग कल्पनातीत होता है। कथा-रस से भरपूर प्रज्ञा की कहानियाँ तेज़ी से भाग रहे समय को न सिर्फ़ ठहरकर देखती हैं बल्कि उनका घटनाक्रम समकाल के विविध ज्वलंत सवालों को साफ़गोई से सामने रखता है। एक दशक से अधिक की अपनी कथा-यात्रा में प्रज्ञा ने अपने समकालीन कथाकारों के बीच अपनी स्वतंत्र पहचान बनाई है।

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