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Mauritius Ek Sanskritik Yatra

by Arjun Chahvan
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Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9789352295029
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 108
  • Original Price: INR 225.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 250 grams
  • BISAC Subject(s): General

मॉरिशस एक सांस्कृतिक यात्रा - जैसे यात्रा के प्रयोजन विविध होते हैं वैसे उसके साधन भी अनेक होते हैं। आदियुग से आधुनिक युग तक यात्रा के प्रयोजन और साधनों में लगातार बदलाव आता रहा। आज यात्रा को सम्पत्ति अधिक सुकर बनाती है किन्तु उससे समय और श्रम को बचाया जा सकता है। विश्वग्राम और विश्वमानव की संकल्पना के मूल में यात्रा और उसके अधुनातन साधन ही निहित हैं। दुनिया की दूरियाँ मिटाने के लिए यात्रा ही सबसे अहम साधन साबित होती है। यात्री ही अपनी यात्रा के मकसद को हासिल कर सकता है।मॉरिशस का माहौल ही ऐसा था जिसने लिखने के लिए बाध्य किया। मेरी यह धारणा है कि एक हज़ार किताबें पढ़ने से उतना नहीं पा सकते, जितना एक लम्बी यात्रा से। इस रचना का एक और तात्कालिक कारण भी मानना पड़ेगा। साहित्यिक सांस्कृतिक शोध संस्था, मुम्बई, हिन्दी प्रचारिणी सभा, मॉरिशस तथा महात्मा गाँधी संस्थान, मॉरिशस द्वारा भारत-मॉरिशस अन्तरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन करना और उसमें प्रतिभागियों के लिए यात्रा वृत्तान्त लेखन प्रतियोगिता होना। यदि यह प्रतियोगिता न होती तो शायद यह रचना भी न लिखी जाती।अपने जीवन में मैंने भारतवर्ष की यात्राएँ तो काफ़ी कीं, जम्मू-कश्मीर से कन्याकुमारी तक, हिमालय, शिमला, हरिद्वार और ऋषिकेश से लेकर त्रिवेन्द्रम, पांडिचेरी तक। लेकिन ये यात्राएँ अपनी धरती, अपने लोगों के बीच की थीं। मॉरिशस की यात्रा ही मेरी पहली विदेशी यात्रा थी। इसके पहले अमेरिका के न्यूयॉर्क में वर्ष 2007 में आयोजित आठवें विश्व हिन्दी सम्मेलन के आयोजक द्वारा मुझे निमन्त्रित किया गया था लेकिन वीज़ा न मिलने के कारण जा नहीं सका। मॉरिशस यात्रा ही पहली विदेशी यात्रा होने की वजह से 'क्या होगा? कैसे होगा?' को लेकर जिज्ञासा के साथ-साथ चिन्ता भी थी। लेकिन मॉरिशस की इस यात्रा को केवल लाजवाब कहना पड़ेगा। पहले जो 'चिन्ता' थी मॉरिशस के पूरे माहौल को देख 'चेतना' में बदल गयी और चेतना 'चिन्तन' में। यही चेतना और चिन्तन प्रस्तुत रचना की पंक्तियों में साकार है।

प्रो. (डॉ.) अर्जुन चव्हाण - शिक्षा: एम.ए. (हिन्दी), बी.एड. (हिन्दी, इतिहास), पीएच. डी. (हिन्दी)।प्रकाशन: 35 से अधिक पुस्तकें - समीक्षात्मक, सृजनात्मक, अनूदित, सम्पादित, शोधपरक आदि प्रकाशित। 100 से अधिक शोध-पत्रों का लेखन।पुरस्कार एवं सम्मान: 'हिन्दी साहित्य अकादमी, मॉरिशस सम्मान’; ‘साहित्य शिरोमणि सम्मान'; 'यात्रा वृत्तान्त लेखन' प्रथम पुरस्कार; 'भारत से बाहर भारत' यात्रा वृत्तान्त की पुस्तक की पांडुलिपि के लिए ताशकन्द (उजबेकिस्तान) में सम्पन्न अन्तरराष्ट्रीय संगोष्ठी में रु. 51 हज़ार का पुरस्कार प्राप्त; 'साहित्य निधि सम्मान'; हिन्दी साहित्य अकादमी (महाराष्ट्र राज्य) का 'पंडित महावीर प्रसाद द्विवेदी' पुरस्कार, 'अहिन्दी भाषी हिन्दी लेखक' राष्ट्रीय पुरस्कार; 'श्रेष्ठ सृजनात्मक साहित्य' सम्मान; 'राष्ट्रीय हिन्दी सेवी सहस्राब्दी सम्मान'; 'युवा प्रेरक मार्गदर्शक सम्मान'; 'भारतेन्दु भूषण राष्ट्रीय सम्मान' से सम्मानित।

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