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Meeranbai Granthawali

by Prof. Kalyan Singh Sekhawat
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Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9788170557623
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 320
  • Original Price: INR 950.0
  • Language: Hindi
  • Edition: 4th Edition
  • Item Weight: 600 grams
  • BISAC Subject(s): N/A

राजस्थान का इतिहास बिना राजस्थानी भाषा के अध्ययन के प्रामाणिक रूप से प्रस्तुत नहीं किया जा सकता। राजस्थानी भाषा के हज़ारों दोहे हैं जिन्हें समझे बिना राजस्थान के इतिहास का अध्ययन हो ही नहीं सकता। इसी तरह राजस्थानी साहित्य का अध्ययन भी इतिहास के अध्ययन बिना अधूरा है। यदि किसी लेखक को इतिहास का सम्यक ज्ञान नहीं है तो वह राजस्थानी भाषा में किसी ग्रन्थ का अध्ययन नहीं कर सकता । अतः इतिहास, भाषा और साहित्य का पूर्ण अध्ययन करके ही राजस्थान के इतिहास और साहित्य का प्रामाणिक अध्ययन प्रस्तुत किया जा सकता है।इस ग्रन्थ में राजस्थान के इतिहास और साहित्य का अध्ययन इसी दृष्टि को समक्ष रखकर प्रस्तुत करने का प्रयास किया है और इस आधार पर मीराँबाई के जीवन की घटनाओं को प्रमाण-पुष्ट करके प्रस्तुत करने का प्रयास किया है। यह एक प्रयास है जिसके माध्यम से मीराँबाई के जीवनवृत्त से सम्बन्धित अनेक जिज्ञासाओं को शान्त किया जा सकेगा।܀܀܀मीराँबाई एक ओर पुनीत भक्त आत्मा है तो दूसरी ओर लोकनिधि । इस लोक में रहकर ही आदर्श भक्ति का प्रस्तुतीकरण करने वाली मीराँ को लोक से परे रखकर नहीं समझा जा सकता । उसकी अनुभूति और अभिव्यक्ति लौकिक है। यही कारण है कि एक ओर उसके पदों में मीराँ युगीन राजनैतिक, धार्मिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक परिस्थितियों, लोकप्रचलित धारणाओं, लोक-विश्वासों तथा मान्यताओं का दिग्दर्शन है तो दूसरी ओर लोकभाषा और उसकी लौकिक शब्दावली भी अपने सहज रूप में है। तत्कालीन आवागमन एवं मनोरंजन के साधन, रीति-रिवाज, खान-पान, वेशभूषा, यहाँ तक कि लोक एवं व्यक्ति-चिन्तन तथा लोक और व्यक्तिपरक शकुन एवं आस्थाओं का स्वाभाविक चित्रण मीराँ के पदों में हुआ है। संक्षिप्त रूप से यही कहा जा सकता है कि मीराँ के पदों में मीराँ युग की भव्य सांस्कृतिक झाँकी विद्यमान है। मीराँ के पदों के एक-एक शब्द से मीराँ का युग मुखरित होता है। यह सच भी है कि जिस परिवार तथा समाज में मीराँ पल्लवित हुई, जिन परिस्थितियों ने उसके जीवन-निर्माण में योग दिया, उन्हें वह कैसे विस्मृत करती क्योंकि मीराँ भी तो अपने युग और परिस्थितियों की ही देन थी। यदि हम मीराँ के पदों का सामाजिक एवं सांस्कृतिक अध्ययन करें तो हमें लगेगा जैसे उनमें मीराँ का युग साकार हो उठा है।

प्रो. (डॉ.) कल्याणसिंह शेखावत -जन्मतिथि : 07 जुलाई, 1942 व एम.ए., पीएच.डी. की शिक्षा ।विषय विशेषज्ञ : संस्कृति मन्त्रालय, भारत सरकार, नयी दिल्ली; विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी), नयी दिल्ली; राजस्थान लोक सेवा आयोग, अजमेर (राजस्थान) ।सदस्य : राजस्थानी भाषा सलाहकार मंडल साहित्य अकादमी, नयी दिल्ली (The National Academy of letters, New Delhi) |विशेष उल्लेखनीय : विश्वविख्यात भक्त कवयित्री मीराँबाई के जीवनवृत्त, भक्तिकाव्य तथा भक्ति-साधना विषय के अधिकारी विद्वान ।प्रकाशित ग्रन्थ : मीराँबाई का जीवनवृत्त एवं काव्य; मीराँ वृहद् पदावली (द्वितीय भाग); मीराँबाई ग्रन्थावली (दो भाग); मीराँ वाणी; राजस्थानी भाषा एवं साहित्य; वीरवरराव जयमल (मोनोग्राफ); मीराँबाई की प्रामाणिक जीवनी।विशेष : वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय कोटा के प्रमाण पत्र बी.ए. तथा एम.ए. पाठ्यक्रमों के लिए पुस्तकों का सम्पादन एवं संयोजन ।पत्रिका सम्पादन : 'जागतीजोत' (त्रैमासिक पत्रिका); 'ओळखाण' (त्रैमासिक पत्रिका); 'शोधमाळ' (वार्षिक पत्रिका) ।मान-सम्मान : 'राजस्थान रत्नाकर' दिल्ली द्वारा सम्मानित एवं पुरस्कृत; मीराँ स्मृति संस्थान, चितौड़गढ़ द्वारा सार्वजनिक अभिनन्दन स्वर्ण पत्र एवं सम्मान; भारतीय साहित्य संगम, नयी दिल्ली द्वारा 'साहित्य वागीश' की मानद उपाधि से सम्मानित; मीराँ कला केन्द्र, उदयपुर द्वारा मीराँ समारोह पर सम्मानित; राजस्थान सरकार की ओर से ज़िला प्रशासन, जोधपुर द्वारा सम्मानित; वीरदुर्गादास राठौड़ स्मृति समिति, जोधपुर द्वारा साहित्य सेवा के लिए सम्मानित; राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादमी, बीकानेर द्वारा राजस्थानी भाषा के उन्नयन एवं संवर्धन हेतु सम्मानित; मीराँ सम्मान एवं पुरस्कार से पुरस्कृत; महाराजा जोधपुर द्वारा हाथी सिरोपाव से सम्मानित; मारवाड़ रत्न सम्मान-2011, मेहरानगढ़ म्यूज़ियम ट्रस्ट, जोधपुर द्वारा सम्मानित ।पता : 15, सुभाषचन्द्र बोस कॉलोनी, रक्षा प्रयोगशाला मार्ग, रातानाडा, जोधपुर-342001 (राज.)मोबाइल : 9314710732

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