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Meri Chuninda Kavitayein

by Balbir Madhopuri
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Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9789357755825
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 86
  • Original Price: INR 299.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 250 grams
  • BISAC Subject(s): General

मेरी चुनिन्दा कविताएँ - बलबीर माधोपुरी पंजाबी साहित्य और संस्कृति के मानवीय सरोकारों के साथ विगत चार दशकों से जुझारू लेखक की भाँति भूमिका अदा करते आ रहे हैं। वह भारत की सामाजिक-आर्थिक गैर-बराबरी, वंचित वर्गों की लाचारी, मानवीय पहचान और उनकी अधिकारहीनता को अपनी कविताओं और अन्य पुस्तकों के केन्द्र में रखते हैं। चिन्तक साहित्यकार के रूप में उनके पास यथार्थवादी तर्क-युक्ति और सान लगे हुए तीखे शब्दों का बड़ा अम्बार और भण्डार है। बलबीर की मौलिक रचनाएँ, ख़ासतौर पर आत्मकथा छांग्या रुक्ख अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी पहचान का सबब बनी। कई भारतीय भाषाओं सहित अंग्रेज़ी (ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस), उर्दू, शाहमुखी, रूसी और पोलिश में छपी और कुछ प्रकाशनाधीन हैं। आजकल उनका उपन्यास मिट्टी बोल पई चर्चा में है जिस हेतु उनको 'ढाहां इंटरनेशनल साहित्य अवार्ड 2021' मिला। इन सब कार्यों के साथ-साथ उन्होंने विश्व साहित्य में कहानियों-कविताओं को चुन-चुनकर उनका अपनी मातृभाषा पंजाबी में अनुवाद किया। उनकी ओर से अनुवादित पुस्तकों की गणना 45 से अधिक है और इतनी ही पुस्तकों का उन्होंने सम्पादन भी किया है।बलबीर की 14 मौलिक पुस्तकों में तीन काव्य-संग्रह हैं जो साधारण पाठकों हेतु प्रेरणास्रोत और शैक्षणिक उपक्रमों में समाजशास्त्र की दृष्टि से अहम माने जाते हैं। ...आशा है कि बलबीर माधोपुरी की पुस्तक मेरी चुनिन्दा कविताएँ (अनुवाद : राजेन्द्र तिवारी) का हिन्दी साहित्य जगत में उचित स्वागत होगा ।-डॉ. रेणुका सिंहभूतपूर्व प्रोफ़ेसर, समाज विज्ञान जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी, नयी दिल्ली

बलबीर माधोपुरी का पंजाबी समकालीन साहित्य में अनुपम स्थान है। इसलिए कि उन्होंने दलित चेतना और संवेदना के माध्यम से अपनी एक स्वतन्त्र पहचान बनायी है।इनकी ग्यारह मौलिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। जिनमें तीन काव्य संग्रह और आठ गद्य संग्रह हैं।इनके सन्दर्भ में उल्लेखनीय बात यह है कि इन्होंने पंजाबी साहित्य अपनी विलक्षण शैली और पृथक रचना कौशल से पाठकों को न केवल अपनी ओर आकर्षित किया है बल्कि उनकी अनुभूतियों को भी गहरे तक छुआ भी है।साहित्यिक क्षेत्र में ऐसा यदाकदा ही घटित होता है। हिन्दी साहित्य जगत में बलबीर का परिचय उनके द्वारा रचित पंजाबी पुस्तकों के हिन्दी अनुवादों के द्वारा पहले ही हो चुका है। इन्हें सरकारी और गैर-सरकारी अनेक पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं। जुलाई 1955 को पंजाब के ज़िला जालन्धर के गाँव माधोपुर में जन्मे ।इन्होंने अब तक 45 से अधिक पुस्तकों का पंजाबी अनुवाद किया है और इतनी पुस्तकों का सम्पादन भी किया है। अपने साहित्यिक सृजन के बलबूते और अजीत कौर के सहयोग से इन्होंने नेपाल और पाकिस्तान में हुए सार्क लेखक सम्मेलन में भाग लिया। पिछले साल उन्होंने कनाडा के चार प्रमुख विश्वविद्यालयों में भाषण दिये ।आत्मकथा छांग्या रुक्ख ने बलबीर की सृजन प्रक्रिया को शिखर तक पहुँचाया है। प्रस्तुत पुस्तक का कई भारतीय भाषाओं सहित अंग्रेज़ी में आक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस, रूसी, पोलिश, उर्दू, शहमुखी और अन्य भाषाओं में अनुवाद हो चुका है।सम्पर्क : आर. जैड ए-44, महावीर विहार, पालम, नयी दिल्ली-110045

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