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Meri Jail Diary

by Yashpal , Ed. Anand
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Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9788180318450
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Lokbharti Prakashan
  • Publisher Imprint: Lokbharti Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 199
  • Original Price: INR 400.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 400 grams
  • BISAC Subject(s): Essays

अपनी क्रान्तिकारी एवं साम्राज्य विरोधी गतिविधियों के लिए पुलिस-मुठभेड़ के बाद यशपाल 23 जनवरी, 1932 को इलाहाबाद में गिरफ़्तार हुए। इसके लिए उन्हें आजीवन कारावास की सज़ा हुई। अपने कारावास के दौर में वे नैनी, सुल्तानपुर, बरेली, फतेहपुर आदि विभिन्न जेलों में रहे। राजनीतिक बन्दी होने से बी क्लास की सुविधाओं के कारण, जीवन की कोई विशेष आशा न होने पर भी, उन्होंने अपने इस समय को पढ़ने-लिखने और विभिन्न भाषाएँ सीखने में लगाया। उन्होंने कहानियाँ लिखीं और पढ़ी गई सामग्री के विस्तृत नोट्स लिए। दोस्तोवस्की, जुलियस फ्युचिक, ग्राम्शी और भगत सिंह आदि की तरह जेल-जीवन में एक तरह से उनका अधिकतर समय इस रचनात्मक उद्यम में ही बीता। जेल-प्रवास का दौर यशपाल के लिए वस्तुतः ढेर सारे फ़ैसलों का दौर भी था। जीवित बाहर निकलने के बाद भविष्य की चिन्ता तो थी ही, यह भी तय करना था कि अब करना क्या है।

यशपाल की यह डायरी उनकी रचनात्मक तैयारी का साक्ष्य है। इसमें उन अनेक कहानियों का पहला ड्राफ़्ट मिलता है जो बाद में ‘पिंजरे की उड़ान’ और ‘वो दुनिया’ में संकलित की गई। इस सामग्री में महात्मा गांधी की अहिंसा और सत्याग्रह, लेनिन की राजनीतिक पद्धति और फ़्रायड के मनोविश्लेषण जैसे परस्पर-विरोधी विचार-सरणियों तक पहुँचने और चीज़ों को देखने, समझने की यशपाल की चिन्ता को देखा जा सकता है। कुल मिलाकर यह सारी सामग्री उनकी उस रचनात्मक बेचैनी का साक्ष्य है जिससे उबरकर ही वे एक पत्रकार और लेखक के रूप में अपना रूपान्तरण करते हैं। इन्हें उनके जीवन के समान्तर रखकर पढ़ा जा सकता है। ये सिर्फ़ कुछ उदाहरण हैं कि यशपाल की यह जेल-डायरी उन्हें कैसे एक बेहतर रूप में समझने का अवसर देती है।

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