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Mughal Samrat Humayun

by Harishankar Srivastava
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Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9788181432131
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 442
  • Original Price: INR 795.0
  • Language: Hindi
  • Edition: 4th Edition
  • Item Weight: 700 grams
  • BISAC Subject(s): Asia / South / General

हुमायूँ तैमूरीवंश का विचित्र रत्न था। उस वंश में अद्भुत विभूतियों ने जन्म लिया, जिनका सिलसिला तैमूर से लेकर औरंगजेब तक, दस-बारह पीढ़ियों तक चलता रहा। मुश्किल से कोई राजवंश ऐसा होगा जिसमें इतने ओजस्वी नायक पैदा हुए हों। हुमायूँ इस लम्बी अनूठी जंजीर की एक विलक्षण कड़ी था। उसका चरित्र गुण-दोषों का अनोखा समूह था जिन्होंने उसे एक तरफ़ हिन्दुस्तान का बादशाह और दूसरी तरफ़ देश-निर्वासित ईरान के बादशाह का अनुजीवी बना दिया। उसे अपने पच्चीस वर्ष के राज्यकाल में से पन्द्रह वर्ष विदेश में बिताने पड़े ।ऐसे आश्चर्यजनक उतार-चढ़ाव का ब्यौरा सचमुच हृदय को आकर्षित करता है। काल की निठुरता और मनुष्य के धैर्य का अद्भुत संघर्ष हुमायूँ की कहानी को अत्यन्त रोचक बनाता है।लेखक ने हुमायूँ के जीवन से सम्बन्ध रखने वाले सभी फ़ारसी ग्रन्थों का अवलोकन किया है और अंग्रेज़ी में जितनी जीवनियाँ और मुग़लकालीन इतिहास लिखे गये हैं, उन सबका अच्छा निरीक्षण किया है। जीवन की घटनाओं और राज्य की कृतियों की पूरी जाँच-पड़ताल की है और अन्य लेखकों के विचारों पर युक्तियों के साथ निर्णय दिया है। हुमायूँ का विस्तृत, गम्भीर एवं विद्वत्तापूर्ण वर्णन प्रस्तुत किया गया है जिससे विद्यार्थियों कोइस बादशाह का अच्छा ज्ञान मिल जायेगा।

हरिशंकर श्रीवास्तव -इलाहाबाद विश्वविद्यालय से 1943 में इतिहास में एम.ए.; लगभग चालीस वर्ष तक स्नातक एवं स्नातकोत्तर कक्षाओं में अध्यापन, जिसमें 37 वर्षों तक अध्यक्ष पद पर कार्य करने का अनुभव; फ़ेलो-रायल, एशियाटिक सोसाइटी, लन्दन; फ़ेलो-इंस्टीच्यूट ऑफ़ हिस्टारिकल स्टडीज, कलकत्ता; दो दशक तक सदस्य- इंडियन हिस्टारिकल रेकाईस कमीशन, भारत सरकार; सदस्य यू.पी. रीजनल रेकाईस सर्वे कमेटी, उत्तर प्रदेश सरकार; सदस्य-उत्तर प्रदेश स्वतन्त्रता संग्राम इतिहास परामर्श दात्री समिति, उत्तर प्रदेश सरकार; अध्यक्ष-मध्यकालीन इतिहास, शाखा, इंडियन हिस्ट्री कांग्रेस (34वाँ अधिवेशन, 1973, चण्डीगढ़); अध्यक्ष-मध्यकालीन शाखा पंजाब हिस्ट्री कांग्रेस, पटियाला, 1979; सदस्य- भारतीय इतिहास अनुसन्धान परिषद्, नयी दिल्ली, 1991-94; भारत सरकार द्वारा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, दिल्ली के कोर्ट का नामित सदस्य-1991-94; अध्यक्ष - उत्तर प्रदेश, इतिहास कांग्रेस, 1987 ।प्रमुख कृतियाँ :1. मुग़ल सम्राट हुमायूँ (हिन्दी), प्रथम संस्करण, आगरा, 1965; द्वितीय संस्करण, भारत सरकार बुक ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया के माध्यम से 1985 में प्रकाशित । तीसरा संस्करण वाणी प्रकाशन, दिल्ली, 20042. हिस्ट्री ऑफ़ इंडियन फेमींस (1858-1918), (अंग्रेज़ी) आगरा, 19683. मुग़ल शासन प्रणाली, प्रथम संस्करण, मैकमिलन इंडिया; तृतीय एवं चतुर्थ संशोधित संस्करण, वाणी प्रकाशन, दिल्ली, 20034. मध्यकालीन भारतीय इतिहास-लेखन (1200-1445), (हिन्दी) 1997, वाराणसी।5. कल्चरल सिंथेसिस इन मेडिवल इंडिया, के.पी. जायसवाल मेमोरियल, लेक्चर, (अंग्रेजी) पटना, 2002इनके अतिरिक्त अस्सी (80) से अधिक शोध-लेख तथा स्नेहदान कहानी-संग्रह प्रकाशित ।

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