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Nai Kavita: Nirala, Ajneya Aur Muktibodh

by Ed. by Vidya Sinha
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Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9788181430441
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 160
  • Original Price: INR 325.0
  • Language: Hindi
  • Edition: 2nd Edition
  • Item Weight: 300 grams
  • BISAC Subject(s): General

नई कविता : निराला, अज्ञेय और मुक्तिबोध - उपभोक्तावाद, बाज़ारवाद, वैश्वीकरण (ग्लोबलाइजेशन) और सूचना क्रान्ति के साथ-साथ विश्व के स्तर पर बढ़ रहे क्रूर आतंकवाद और वैचारिक ध्रुवीकरण ने विकास के समानान्तर विध्वंस की जो अमानवीय तस्वीर हमारे सामने गढ़ी है उसमें कविता का महत्त्व कम और नगण्य होने की बजाय बढ़ा ही अधिक है।★★★प्रगति और प्रयोग की सीमाएँ छोड़कर नई कविता ने अपनी वस्तु और दृष्टि दोनों को व्यापक विस्तार दिया, मानवता को खोजा और उसे उसकी वास्तविकता के साथ प्रतिष्ठित किया; इस अर्थ में नई कविता मानववादी कही जा सकती है।★★★तात्पर्य यह है कि यह नहीं कि हिन्दी में ही छायावाद के ख़िलाफ़ बगावत हो गयी, लगभग पूरी भारतीय कविता में जो रामांटिक भावबोध था, जो कल्पना का संसार था उसके ख़िलाफ़ एक प्रबल विद्रोह हुआ।★★★मुक्त आसंग की ही सजातीय पद्धतियाँ हैं स्वप्नचित्रण, स्वैरकल्पना (फैंटेसी) विरूपीकरण (डिस्टॉर्शन) आदि जिनका उपयोग नये कवियों ने किया है। इन पद्धतियों के द्वारा एक शब्द दूसरे शब्द की संगति या विसंगति में नये अर्थ की व्यंजना करने लगता है।★★★तुलसीदास, राम और वेदान्त निराला के लिए अभिजात्य का नहीं जन संस्कृति का पर्याय है। तुलसीदास के साक्ष्य पर कहा जा सकता है कि सांस्कृतिक क्षय को लेकर उनकी व्यग्रता का एक पक्ष राजनीतिक पराजय का क्षोभ है, दूसरा पक्ष सामाजिक विशृंखलता का है जिसे वह वर्ण व्यवस्था का विघटन कहकर समझते हैं। तीसरा पक्ष पहले दोनों पक्षों से उत्पन्न दीन-हीन सामान्य जन की आर्थिक शोचनीयता का दर्द है।इसी पुस्तक से...

विद्या सिन्हा -जन्म : बिहार के छपरा जिला के कतालपुर ग्राम में। पिता : प्रसिद्ध संस्कृत शिक्षाविद्, स्वाधीनता सेनानी एवं भोजपुरी कवि। पति : भारतीय प्रशासनिक सेवा में कार्यरत। प्रतिबद्ध, निर्भीक और कर्मठ अधिकारी के रूप में ख्यातिलब्ध।शिक्षा : दिल्ली विश्वविद्यालय से प्रथम श्रेणी में स्नातक एवं स्नातकोत्तर। एम.फिल. उत्कृष्ट एवं विशिष्ट योग्यता सहित। दिल्ली विश्वविद्यालय से ही पीएच.डी.।कविता लेखन, लोक साहित्य, आंचलिक साहित्य में विशेष रुचि और अध्ययन तथा इनके सृजन और समीक्षा से सम्बद्ध लेखन जारी।। प्रकाशित कृतियाँ : आधुनिक परिदृश्य : आंचलिकता और हिन्दी उपन्यास, स्वातन्त्र्योत्तर कहानी का परिदृश्य और फणीश्वरनाथ रेणु की कहानियाँ, लोक साहित्य : प्रासंगिकता के आयाम।

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