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Namo Sarkar Ke Teen Varsh

by Praveen Gugnani
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Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9789352663248
  • Binding: Paperback
  • Subject: N/A
  • Publisher: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
  • Publisher Imprint: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
  • Publication Date:
  • Pages: 120
  • Original Price: INR 125.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 175 grams
  • BISAC Subject(s): Comparative Politics

नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्रित्व नहीं, अपितु उनके दिल्ली के सेवाकाल के दूसरे व तीसरे वर्ष पर केंद्रित इस पुस्तक में स्वाभाविक ही नरेंद्र मोदी सरकार के कार्यकलापों की चर्चा की गई है। ऐसा नहीं है कि भारत में यह प्रथम सत्ता-परिवर्तन है, सत्ता-परिवर्तन मोरारजी भाई देसाई, वी.पी. सिंह, देवेगौड़ा, गुजराल के समय भी हुआ, किंतु उस समय भिन्न-भिन्न कारणों से शासन का दृष्टिकोण पूर्ववत् ही रहा। अटल बिहारी वाजपेयी के समय भी सत्ता का दृष्टिकोण नहीं बदल पाया, क्योंकि अटलजी की सरकार एक अल्पमत व विभिन्न विचारों से बनी पार्टियों की बैसाखी पर चल रही थी, अतः इस सरकार का शीर्ष व शेष आकार कुछ जुदा-जुदा सा था। अब नरेंद्र मोदी को पूर्ण बहुमत प्राप्त हुआ व उन्हें सहयोगी दल की बैसाखियों की भी आवश्यकता नहीं रही, अतः यह समय भारत में केवल सत्ता-परिवर्तन का नहीं, अपितु वैचारिक आधार के बदलाव का समय है।एक सरकार के नाते नमो सरकार ने शासन-प्रशासन, जीवन के हर क्षेत्र में क्या कुछ किया है, उसका स्वस्थ विश्लेषण इस पुस्तक में है, जो पाठकों को सरकार की नीतियों और कार्यों से परिचित कराएगी।

एक स्तंभ-लेखक व नई कविता के एक सशक्त हस्ताक्षर के रूप में प्रवीण गुगनानी को देश भर में, विशेषतः हिंदी भाषी राज्यों में परिचय की आवश्यकता नहीं है। उनकी राजनैतिक समीक्षाएँ व आलेख देश के बीस-बाईस राज्यों की पत्र-पत्रिकाओं में साप्ताहिक रूप से प्रकाशित होते हैं। राजनैतिक, सांस्कृतिक, सामाजिक, शैक्षणिक व भौगोलिक घटनाओं में अंतर्निहित भाव, बहाव व तत्त्वों को चिह्नित करके उसपर अपनी कलम चलाना व नए चश्मे से इन घटनाओं के परिणामों का आकलन करने में इनकी विशेषज्ञता रही है। राष्ट्रवाद, भारतमाता की परम वैभव के शिखर पर स्थापना, कश्मीर, चीन, अर्थव्यवस्था में देशज या घरेलू तत्त्व के महत्त्व की पहचान व उसका अलंकरण, भारत में ऋषि परंपरा की पुनर्स्थापना आदि इनके प्रिय विषय हैं।इसके पूर्व दो पुस्तकें ‘नमो : 7, रेसकोर्स की ओर’ व ‘कांग्रेस मुक्त भारत की अवधारणा’ प्रकाशित हो चुकी हैं। दो पुस्तकों ‘संघ प्रवाह’ व ‘सतपुड़ा समग्र’ का संपादन कर चुके हैं। एक कविता-संग्रह ‘स्वप्न ही तो है’ शीघ्र प्रकाश्य।मूलतः बैतूल जिले (म.प्र.) के ग्राम आमला से हैं। संप्रति अखिल भारतीय साहित्य परिषद् के मध्य प्रदेश के महामंत्री व म.प्र. वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन के महासचिव हैं।

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