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Nari Ke Roop

by Sharad Pagare
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Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9788170557111
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 116
  • Original Price: INR 100.0
  • Language: Hindi
  • Edition: 2nd Edition
  • Item Weight: 300 grams
  • BISAC Subject(s): General

नारी के रूप - नारी ने हर युग में ज़िन्दगी, परिवार और समाज ही नहीं आर्थिक-राजनीतिक क्षेत्र के केन्द्र में अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज करायी है। साहित्य, कला और संस्कृति तो उसके बिना प्राणहीन है। दुनिया की इस आधी आबादी से ही जीवन, जीवन है। परन्तु मर्द ने उसे इन्सान मानने की बजाय इज़्ज़त, सम्पत्ति और लूट का माल अधिक माना है। मर्द अपने ताक़तवर दुश्मन से जब बदला नहीं ले पाता तो उसकी कायरता का शिकार औरत होती है। गुज़री सदियों का इतिहास इसका गवाह है। इक्कीसवीं ही नहीं आनेवाली सारी सदियों में भी उसे मर्द के अहं और वहशीपने को झेलना पड़ेगा। भावी सदियाँ भी उसे दुहरायेंगी।नारी मन की संवेदना, विचित्रता, और भावुकता के बीच अंगद पाँव न जमा पाने की दुर्बलता और कुछ के विद्रोही तेवर ही कहानी की आधारशिला बनते हैं। माँ, बहन, बेटी, बहू, प्रेमिका और गर्लफ्रेण्ड के रूप में वह पुरुष से तो जुड़ी ही है लेकिन इसके अलावा भी उसके पास बहुत कुछ होता है। वह देह मात्र ही नहीं है। देह के परे भी उसके पास बहुत कुछ है।संवेदना के अदृश्य और रेशम से भी बारीक एवं मज़बूत तार से पुरुष से जुड़ी नारी की संवेदनशीलता के क्षतिग्रस्त होने पर ही कहानी जन्म लेती है। पुरुष द्वारा उसके आसपास बुनी ढेर सारे झूठों की चादर को उसने भी जाने-अनजाने ओढ़ रखा है। जिसने भी इस चादर को फाड़ डाला उसे पुरुष ने माफ़ नहीं किया। नारी ने भी अपने ही कुल को नुक़सान पहुँचाने में कोई कसर बाकी नहीं रखी।कहने को बहुत कुछ है परन्तु जो थोड़ा-बहुत कहा है संग्रह की कहानियाँ नारी के उस कुछ और संवेदना के क्षतिग्रस्त, नारों के तेवरों का दस्तावेज़ हैं। औरत सिर्फ़ मादा तन ही नहीं है। उसने मर्द समाज ज़िन्दगी को बहुत कुछ दिया है और आगे भी देती ही रहेगी। इन कहानियों को पढ़कर और संग्रह में आकलित नारियों के विभिन्न रूपों को देखने के बाद ही आप समझ सकेंगे। नारी के प्रति नज़रिया बदलने में आपको झकझोरने में ही इनकी सफलता निहित है।

शरद पगारे - जन्म : खण्डवा-ज़िला पूर्व निमाड मध्य प्रदेश शिक्षा-इतिहास में एम.ए., पीएच.डी.। विदेश यात्राएँ : वर्ष 1987 में अतिथि प्राध्यापक के रूप में शिल्पकर्ण विश्वविद्यालय, बैंकाक-थाईलैण्ड में अध्यापन, हांगकांग-सिंगापुर की शैक्षणिक यात्राएँ।पुरस्कार/सम्मान: वर्ष 1981-82 में मध्य प्रदेश शासन एवं म. प्र. साहित्य परिषद, भोपाल द्वारा विश्वनाथ सिंह पुरस्कार। वर्ष 1998 में मध्य प्रदेश हिन्दी साहित्य सम्मेलन भोपाल द्वारा 'वागीश्वरी' पुरस्कार। मध्य प्रदेश हिन्दी लेखक संघ, भोपाल के प्रतिष्ठित 'अक्षर आदित्य अलंकरण' वर्ष 1998 एवं अखिल भारतीय अम्बिका प्रसाद दिव्य पुरस्कार वर्ष 1998 से सम्मानित।प्रकाशित कृतियाँ :गुलारा बेगम-ऐतिहासिक उपन्यास, वर्ष 1981-82 में म.प्र. साहित्य परिषद के विश्वनाथ सिंह पुरस्कार से सम्मानित, पाँच सजिल्द एवं एक पेपरबैक संस्करण अब तक प्रकाशित, उर्दू एवं मराठी में अनूदित गन्धर्व सेन-ऐतिहासिक उपन्यास, दो सजिल्द एवं एक पेपरबैक संस्करणों में प्रकाशित।बेगम जैना बादी-ऐतिहासिक उपन्यास; म.प्र. हिन्दी साहित्य सम्मेलन, भोपाल के वागीश्वरी एवं सागर के अखिल भारतीय दिव्य पुरस्कार से वर्ष 1998 में सम्मानित, सजिल्द एवं पेपरबैक संस्करणों में प्रकाशित। एक मुट्ठी ममता-कहानी संग्रह, संग्रह की अनेक कहानियाँ ड़िया, मलयालम, तेलगू में अनूदित।सान्ध्य तारा-ऐतिहासिक कथा संग्रह, संग्रह की अनेक कहानियाँ ओड़िया, तमिल, मलयालम, तेलगू में अनूदित।ठहरी हुई ज़िन्दगी-कहानी संग्रह।नारी के रूप-कहानी संग्रह। इतिहास पर दस पुस्तकें प्रकाशित। पूर्व मध्ययुगीन धार्मिक आस्थाएँ-शोध प्रबन्ध।

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