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Neermati

by Smt. Vidya Vindu Singh
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Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9789380183206
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
  • Publisher Imprint: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
  • Publication Date:
  • Pages: 144
  • Original Price: INR 300.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 200 grams
  • BISAC Subject(s): General

नीरमती उपन्यास एक ऐसी भारतीय नारी की कहानी है, जो विषम परिस्थितियों से जूझती हुई हताश होकर एक बार मृत्यु का वरण करने की कोशिश करती है; किंतु फिर अपने जीवन को तपने के लिए तैयार कर लेती है । लोकनिदा के भय पर उसकी ममता विजय पा जाती है और वह संघर्ष के मार्ग पर निकल पड़ती है ।इसी समाज में यदि दुराचारी और वंचक हैं, जो केवल दु :ख और अपमान देते हैं, और अपने निजी स्वार्थ के लिए किसी की मजबूरी का लाभ उठाते हैं, तो कुछ ऐसे भी लोग हैं जो आश्रय देकर छाँह भी बन जाते हैं । नीरमती अपने परिश्रम और सौजन्य से इस तरह की छाँह पाती है और उस छाँह के हाथों में अपना भविष्य सौंप देती है ।नीरमती नदी की वह प्रवाहमयता है, जिसमें जीवन है, जो सबको जीवन देने में अपने जीवन की सार्थकता पाती है । नीरमती लांछित, मर्माहत स्त्री का वह सत्य है, जो अपमानित होती है, पर ममता की शक्‍त‌ि से जीवन का क्षय नहीं होने देती । वह आग में तपती, निखरती, कुंदन बनकर मूल्यवान हो जाती है ।बालिकाओं की शिक्षा और सुरक्षा व्यवस्था पर आज प्रश्‍न-चिह्न लग रहे हैं; दंड संहिता का खोखलापन बेनकाब हो रहा है । समाज और राजनीति के दोमुंहे साँप के चेहरे देखे जा रहे हैं, पर आज केवल देखने की नहीं, उन्हें बदलने की जरूरत है । ' नीरमती ' के पात्रों की यह कोशिश किसी के मन में कुछ सुगबुगाहट जगा सके तो नीरमती का जन्म सफल हो जाएगा । अत्यंत भावपूर्ण, मार्मिक एवं संवेदनाओं को झकझोरता एक सामाजिक उपन्यास ।

विद्या 'शंभु सिंहजन्म : 2 जुलाई, 1945 को ग्राम जैतपुर, सोनावाँ, फैजाबाद में ।कृतियाँ : अब तक कुल 68 कृतियाँ प्रकाशित, जिनमें पाँच कहानी संग्रह, चार हाइकू संग्रह, एक दोहा संग्रह, एक कृति क्षणिकाएँ तथा एक भक्‍त‌िगीत संग्रह, पंद्रह लोक साहित्य संग्रह, चार नाटक संग्रह, चार उपन्यास, सात पुस्तकें नवसाक्षर एवं बाल साहित्य, छह संपादित पुस्तकें । इनके अलावा विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में 2500 से अधिक रचनाएँ प्रकाशित एवं संकलित ।आकाशवाणी एवं दूरदर्शन के विभिन्न केंद्रों से निरंतर प्रसारण । देश व विदेश की संस्थाओं, विश्‍वविद्यालयों से संबद्ध एवं उनमें सक्रिय भागीदारी । ' डॉ. विद्या विंदु सिंह के व्यक्‍त‌ित्व और कृतित्व ' पर लखनऊ, गढ़वाल, कानपुर, पुणे आदि विश्‍वविद्यालयों द्वारा शोध कार्य संपन्न ।' प्रवासी भारतीय ', ' भाषा भारती ', ' साहित्य भारती ' आदि पत्रिकाओं से संबद्ध । अनेक संस्थाओं द्वारा सम्मानित ।

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