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Nibandhon Ki Duniya: Malyaj

by Ed. by Nirmala Jain
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Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9789350721650
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 176
  • Original Price: INR 395.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 350 grams
  • BISAC Subject(s): Essays

निबन्धों की दुनिया - मलयज -मलयज के निबन्ध अकादमिक आलोचना के सर्जनात्मक संस्करण हैं। चिन्तन की गहराई और काव्यानुभूति के ताप से लिखे गये उनके निबन्धों ने हिन्दी आलोचना की आधुनिक बहसों में एक सार्थक हस्तक्षेप किया है। मलयज की आलोचना दृष्टि का निर्माण और विकास शीत युद्ध के दौर में हुआ जब हिन्दी में प्रगतिशील लेखक संघ और परिमल का द्वन्द्व अपने चरम पर था। मलयज इन दोनों शिविरों में से किसी एक को स्वीकार कर लेने की आसान राह नहीं चुनते वे एक तीसरी राह की तलाश का जोख़िम उठाते हैं-यह तीसरी राह संवाद और एकालाप की है। मलयज को पता है कि शिविरबद्ध आलोचना के योद्धा “सौन्दर्य और आत्मा और मानव राग को फार्मूलों में ढाल दे सकते हैं। वे उत्पीड़न, आक्रोश और करुणा को सुखद, सौन्दर्यात्मक फुरफुरी में अंकित कर दे सकते हैं। वे विशिष्ट हैं, क्योंकि वे दूसरों से बड़े हैं गोकि ख़ुद से छोटे, छोटे और सीमित-अपने में बन्द, सुरक्षित किनारे पर।" मलयज के निबन्धों का दायरा छायावाद से नयी कविता के कवियों और रचनाओं तक फैला है। मलयज निष्कर्षो से विश्लेषण की ओर नहीं जाते। उनकी आलोचना रचना की जटिलताओं से जूझती है, उनमें विचारों को सपाट ढंग से कह डालने के अधैर्य के स्थान पर चिन्तनधर्मी ललित मन्थरता है। गहरा आलोचनात्मक विवेक और रचनात्मक ऊष्मा के कारण मलयज के निबन्ध पठनीय और विचारणीय है।

निर्मला जैन (प्रधान सम्पादक) - 'निबन्धों की दुनिया' श्रृंखला की प्रधान सम्पादक निर्मला जैन हिन्दी के विशिष्ट आलोचकों में हैं। वे दिल्ली विश्वविद्यालय में हिन्दी की प्रोफ़ेसर और विभागाध्यक्ष रही हैं। निर्मला जैन ने बहुत-सी किताबें लिखी हैं तथा अनेक महत्त्वपूर्ण रचनाओं का अनुवाद और कई पुस्तकों का सम्पादन किया है। उनकी कुछ प्रमुख रचनाएँ हैं: रस सिद्धान्त और सौन्दर्यशास्त्र, उदात्त के विषय में (लॉगिनुस की मूल पुस्तक के अनुवाद सहित), काव्य चिन्तन की पश्चिमी परम्परा और कथाप्रसंग : यथाप्रसंग। निर्मला जैन को अनेक सम्मानों तथा पुरस्कारों से समादृत किया गया है।रामेश्वर राय(सम्पादक)रामेश्वर राय की आरम्भिक शिक्षा पश्चिम बंगाल और बिहार में हुई। दिल्ली विश्वविद्यालय से उन्होंने डॉक्टरेट प्राप्त किया। अपनी आलोचना दृष्टि के लिए प्रशंसित रामेश्वर राय 1989 से दिल्ली के हिन्दू कॉलेज में अध्यापन कर रहे हैं।मलयज - मलयज का जन्म 1935 में पूर्वी उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ ज़िले के महुई गाँव में एक निम्न मध्यवर्गीय परिवार में हुआ। आरम्भिक शिक्षा गाँव में हुई। 1963 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से उन्होंने अंग्रेज़ी में एम.ए. किया। जीविका की तलाश में वे 1964 में दिल्ली आये। परिवार का दिया हुआ नाम 'भरतजी श्रीवास्तव' प्रमाण पत्रों में रह गया। साहित्य में वे मलयज नाम से आये। दिल्ली में मलयज ने केन्द्रीय कृषि और सिंचाई मन्त्रालय के विस्तार निदेशालय में अंग्रेज़ी पत्रिकाओं के सह-सम्पादक के रूप में नौकरी की। ‘पूर्वग्रह' के प्रारम्भिक सम्पादक मण्डल के सदस्य रहे। आकाशवाणी के लिए बालोपयोगी नाटक लिखे। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं के लिए स्तम्भ-लेखन और अनुवाद किये।उनका पहला काव्य संग्रह 'जख़्म पर धूल' 1971 में और दूसरा संग्रह 'अपने होने को अप्रकाशित करता हुआ' 1980 में प्रकाशित हुआ। विभिन्न पत्रिकाओं के लिए लिखे गये आलोचनात्मक निबन्धों का संकलन 'कविता से साक्षात्कार' 1979 में छपा।उनकी कहानियाँ, यात्रा-वृत्तान्त और डायरी के अंशों का मिलाजुला संग्रह 'हँसते हुए मेरा अकेलापन' मरणोपरान्त 1982 में प्रकाशित हुआ। अप्रैल 1982 ई. में मलयज के आकस्मिक निधन के कारण लेखन की अनेक योजनाएँ अधूरी रह गयीं। वे साहित्य अकादेमी के लिए रामचन्द्र शुक्ल पर एक पुस्तिका लिख रहे थे। एक निबन्ध-संकलन उन्होंने तैयार कर लिया था जो 1984 में 'संवाद और एकालाप' नाम से छपा रामचन्द्र शुक्ल पर लिखी गयी अधूरी किताब और बत्तीस वर्षों में लिखी हुई डायरी तीन खण्डों में नामवर सिंह के सम्पादन में 2000 ई. में प्रकाशित हुई।

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