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Nibandhon Ki Duniya: Nirala

by Ed. by Nirmala Jain
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Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9789350000519
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 216
  • Original Price: INR 395.0
  • Language: Hindi
  • Edition: 2nd Edition
  • Item Weight: 400 grams
  • BISAC Subject(s): Essays

निबंधों की दुनिया – निराला - 'हमारे साहित्य में यह क्या हो रहा है यह भारतीय है, यह अभारतीय है, असंस्कृत। धन्य है, हे संस्कृति के बच्चो! - नस-नस में शरारत भरी, हजार वर्षों से सलाम ठोंकते-ठोंकते नाक में दम हो गया, अभी संस्कृति लिये फिरते हैं।'- यह भाषा और ये विचार किसके हो सकते हैं सिवाय सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' के निबंध विधा की प्रकृति ही कुछ ऐसी है कि यह द्वंद्व और संघर्ष के वातावरण में और ज्यादा खिल उठती है। निराला की कविता भी ऐसी है और उनके निबंध भी। दोनों में एक ही ऊष्मा, एक ही ताप, एक जैसी प्रखरता और एक जैसी मानवीयता के दर्शन होते हैं। कहा जा सकता है कि निराला ने कविता में विप्लव लाने की जो ऐतिहासिक भूमिका निभायी, उसके सैद्धांतिक पक्ष का निर्माण अपने निबंधों में किया। निराला का गद्य इस दृष्टि से अनूठा है कि वह जिरह की जमीन को कभी नहीं छोड़ता, फिर भी रसात्मकता से भरपूर है। निराला सर्जक थे ही ऐसे कि सत्य और सौंदर्य के बीच पुल बनाते हुए भी उनकी तीक्ष्ण नजर यथार्थ पर हमेशा बनी रहती थी। इसलिए उनकी बहुत-सी स्थापनाएँ न केवल चौंकाती हैं, बल्कि यथार्थ का सामना करने के लिए झकझोरती भी हैं। अलोकप्रिय होने का खतरा उठाते हुए भी निराला समाज, संस्कृति, उपन्यास, कविता, परंपरा, आधुनिकता, स्त्री मुक्ति तथा जनता और साहित्य जैसे विषयों पर अपनी मौलिक स्थापनाएँ बड़ी ताकत के साथ प्रस्तुत करते थे। ये स्थापनाएँ आज भी उतनी ही मौलिक और न हैं। इसीलिए निराला के निबंध बार-बार पढ़े जाने की माँग करते हैं।

निर्मला जैन (प्रधान सम्पादक) - 'निबन्धों की दुनिया' श्रृंखला की प्रधान सम्पादक निर्मला जैन हिन्दी के विशिष्ट आलोचकों में हैं। वे दिल्ली विश्वविद्यालय में हिन्दी की प्रोफ़ेसर और विभागाध्यक्ष रही हैं। निर्मला जैन ने बहुत-सी किताबें लिखी हैं तथा अनेक महत्त्वपूर्ण रचनाओं का अनुवाद और कई पुस्तकों का सम्पादन किया है। उनकी कुछ प्रमुख रचनाएँ हैं: रस सिद्धान्त और सौन्दर्यशास्त्र, उदात्त के विषय में (लॉगिनुस की मूल पुस्तक के अनुवाद सहित), काव्य चिन्तन की पश्चिमी परम्परा और कथाप्रसंग : यथाप्रसंग। निर्मला जैन को अनेक सम्मानों तथा पुरस्कारों से समादृत किया गया है।रामेश्वर राय - रामेश्वर राय की आरम्भिक शिक्षा पश्चिम बंगाल और बिहार में हुई। दल्ली विश्वविद्यालय से उन्होंने डॉक्टरेट प्राप्त किया। अपनी आलोचना दृष्टि के लिए प्रशंसित रामेश्वर राय 1989 से दिल्ली के हिन्दू कॉलेज में अध्यापन कर रहे हैं।निराला - सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' (21 फ़रवरी, 1896-15 अक्टूबर, 1961) का नाम मूलतः छायावाद से जोड़ा जाता है, किन्तु उनके कृतित्व और व्यक्तित्व ने समूची सदी के साहित्य परिदृश्य को प्रभावित किया है। बंगाल के महिषादल में उनका जन्म हुआ और अवध प्रदेश के बैसवाड़ा अंचल में उनके जीवन का अधिकांश समय बीता। उनके कृतित्व में इन दोनों साहित्य-संस्कृतियों के गहरे रंग उभरकर सामने आते हैं। एक ओर उन पर तुलसीदास का गहरा रंग है, तो दूसरी ओर रामकृष्ण परमहंस, विवेकानन्द और रवीन्द्रनाथ ठाकुर का। वे वेदान्त दर्शन से गहरे तक प्रभावित थे और राष्ट्रीय चेतना और यथार्थवादी दृष्टि में उनका अगाध विश्वास था।प्रमुख कृतियाँ : (काव्य) राम की शक्तिपूजा, तुलसीदास, सरोज स्मृति, कुकुरमुत्ता, अनामिका, अणिमा, नये पत्ते, बेला, (उपन्यास) अप्सरा, निरुपमा, प्रभावती, कुल्ली भाट, बिल्लेसुर बकरिहा, (कहानी संग्रह) चतुरी चमार, सुकुल की बीवी, (निबन्ध तथा आलोचना) रवींद्र कविता कानन, चाबुक, प्रबन्ध पराग आदि।

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