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Nukkad Par Dastak (Samkalin Nukkad Natakon Ka Sangrah)

by Arvind Gaur
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Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9789388684590
  • Binding: Paperback
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 184
  • Original Price: INR 250.0
  • Language: Hindi
  • Edition: 4th Edition
  • Item Weight: 300 grams
  • BISAC Subject(s): General

अरविन्द गौड़ धारा के समानान्तर न चलकर, विपरीत दिशा में चलने वाले ऐसे लेखक, निर्देशक हैं जिन्होंने अपने रंगकर्म में सत्ता के बजाय हमेशा समाज के हाशिये पर रहने वाले वंचितों, उत्पीड़ितों के साथ खड़ा होना कबूला है। जहाँ भी किसानों, मज़दूरों, बेरोज़गारों की लड़ाई होती है, अरविन्द गौड़ का थियेटर वहाँ मौजूद रहता है। किसी तरह का जुल्म हो, अस्मिता के काले कुर्ते वाले रंगकर्मी मोर्चे पर डटे हुए दिखते हैं। डफली पर दिया गया थाप सत्ता के गुम्बद को हिलाने जैसा लगता है।अरविन्द गौड़ मंच और नुक्कड़ दोनों जगहों पर एक साथ पुरजोर दस्तक देते हैं। इनके लिखे-निर्देशित नाटक नुक्कड़ नाटक की उस ज़मीन को उर्वर करते हैं जिसे सिस्टम और कॉर्पोरेट अधिग्रहण कर अपनी सत्ता के प्रचार और मार्केट के लिए पिछले कुछ दशकों से टूल्स की तरह इस्तेमाल करते रहे हैं। प्रगतिशील और जनवादी विचारधारा के अरविन्द गौड़ अपने तेवर, भाषा और कहने के अन्दाज़ में पारम्परिक नुक्कड़ नाट्य आन्दोलन से ज़रा हटकर हैं। वे अपने नाटकों में व्यक्ति के स्थान पर समूह, चरित्र के बदले घटना, भाषा-बिम्ब रचते हैं, घुमा-फिराकर कहने के बजाय सीधी बात करते हैं, नाटक को किसी अन्धी गली में छोड़ने के बजाय एक निर्णय पर ले जाते हैं। सम्भवतः यह उनका नुक्कड़ नाटक का एक नया रंगशिल्प गढ़ने का प्रयास है, जो जनपक्षीय तो है ही, लोकप्रिय भी है। उतना ही इंटेंसिव और मारक भी।अरविन्द गौड़ समय की नब्ज़ पहचानते हैं और आसपास होने वाले आन्दोलनों से किसी न किसी रूप में रिश्ता बनाये रखते हैं। इसलिए वे जिस इंटेंसिटी से बलात्कार, महिला उत्पीड़न के सवाल को उठाते हैं, पितृसत्तात्मक व्यवस्था पर चोट करते हैं, घरेलू हिंसा से जूझ रही महिलाओं के पक्ष में खड़े होते हैं, वो दर्शकों को अपने पक्ष में करने के लिए कारगर साबित होता है। जहाँ सत्ता की संस्कृति नुक्कड़ नाटक की धारा को अपने प्रचार का भोंपू बनाने पर आमादा है, अरविन्द गौड़ अपने दर्जनों रंगकर्मियों के साथ देश के महानगरों, छोटे शहरों और गाँवों में घूम-घूमकर अस्मिता थियेटर ग्रुप के द्वारा रंग अलख जगा रहे हैं। अरविन्द गौड़ सही मायने में पोलिटिकल थियेटर के एक ऐसे एक्टिविस्ट हैं जो भले इस आन्दोलन में अकेले दिखाई देते हैं, लेकिन उनके पीछे एक व्यापक जन समुदाय दिखाई देता है। और यही नुक्कड़ नाटक आन्दोलन को एक आशा, भरोसा दिलाता है कि नुक्कड़ नाटक अभी ज़िन्दा है। इसकी आग कहीं-न-कहीं अभी भी बरकरार है।- राजेश कुमार, वरिष्ठ रंगकर्मी एवं नाटककार

अरविन्द गौड़ -अस्मिता नाट्य संस्था में निर्देशक, बहुचर्चित रंगकर्मी अरविन्द गौड़ समकालीन राजनीतिक मुद्दों पर केन्द्रित प्रस्तुतियों के लिए जाने जाते हैं। रंगमंच को जनता के संघर्षों और जन आन्दोलन से जोड़ने का महत्त्वपूर्ण कार्य किया है। देश के ज्वलन्त मुद्दों से गहरा जुड़ाव रखने वाले अरविन्द ने नुक्कड़ नाटकों की एक नयी ज़मीन तैयार की है। नुक्कड़ नाटक को समकालीन, प्रासंगिकता और रोज़मर्रा के मुद्दों से जोड़ने में और देशव्यापी जनता के बीच लोकप्रिय बनाने में अरविन्द गौड़ की अहम भूमिका रही है। मज़दूर, किसानों, दलितों, आदिवासियों के संघर्ष से लेकर भ्रष्टाचार विरोधी आन्दोलन और दामिनी आन्दोलन में बुनियादी भूमिका अदा करने वाले अरविन्द गौड़ आज नुक्कड़ नाटक का पर्याय बन चुके हैं।भारत के कोने-कोने में नाटकों के हज़ारों मंचनों के साथ अरविन्द गौड़ ने दुनिया भर के महत्त्वपूर्ण फेस्टिवल्स में शिरकत की है। उनके नाटक एडिनबर्ग फेस्टिवल से लेकर सिडनी, फ्रांस, रूस, आर्मेनिया, लन्दन, यू.ए.ई., हॉलीवुड फ्रिज, शिकागो, न्यूयॉर्क, वाशिंगटन, ओहाओ, लॉन्स एंजिल्स, ह्यूस्टन, डबलिन और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में भी मंचित हुए हैं।दर्जनों नाटकों का अनुवाद और कई चर्चित नाटकों का रूपान्तरण किया। आईआईटी, आईआईएम से लेकर देश भर के स्कूलों, कॉलेजों में भी सक्रियता के साथ कैम्पस थियेटर को भी विकसित करने में उनकी सक्रिय भूमिका है।थियेटर से पहले पत्रकारिता, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, पीटीआई-टी.वी. में कार्य करने के बाद अरविन्द गौड़, दिल्ली विश्वविद्यालय के 'थियेटर इन एजुकेशन' में तीन साल गैस्ट फैकल्टी रह चुके हैं। राँझना, गुड़गाँव और जे. डी. फिल्मों में अभिनय । सुप्रसिद्ध रंगकर्मी हबीब तनवीर के नाटकों में लाइट डिजाइनिंग और सहायक रहे। अरविन्द गौड़ ने बॉलीवुड की प्रसिद्ध अभिनेत्री कंगना रणौत समेत कई प्रसिद्ध कलाकारों को भी प्रशिक्षित किया है।सम्प्रति अस्मिता थियेटर ग्रुप के ऊर्जा और तेवर से लैस प्रतिबद्ध रंगकर्मियों के प्रशिक्षण में निरन्तर कार्यरत ।

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