Skip to content

Booksellers & Trade Customers: Sign up for online bulk buying at trade.atlanticbooks.com for wholesale discounts

Booksellers: Create Account on our B2B Portal for wholesale discounts

Pachas Kavitayen Nai Sadi Ke Liye Chayan: S.H. Vatsyayan 'Ajneya'

by S.H. Vatsyayan 'Ajneya'
Save 32% Save 32%
Current price ₹65.00
Original price ₹95.00
Original price ₹95.00
Original price ₹95.00
(-32%)
₹65.00
Current price ₹65.00

Ships in 7-10 Days

Free Shipping in India on orders above Rs. 500

Request Bulk Quantity Quote
+91
Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9789350007259
  • Binding: Paperback
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 104
  • Original Price: INR 95.0
  • Language: Hindi
  • Edition: 2nd Edition
  • Item Weight: 150 grams
  • BISAC Subject(s): General

संयोगवश जब मैं सोलह-सत्तरह वर्ष का था, तभी मुझे अज्ञेय की कविता पढ़ने का मौका मिला। उन दिनों गीतों की धूम थी। अज्ञेय की कविता ने नयी संवेदना से चकित कर दिया। यह भी समझ में आया कि कविता अपने आस-पास के अनुभवों से लिखी जा सकती है। यह भी ध्यान में आया कि पन्त, प्रसाद, निराला, महादेवी वर्मा, बच्चन, माखनलाल चतुर्वेदी और दिनकर से अलग काव्य-मुहावरे में भी कविता लिखी जा सकती है। अठारह उन्नीस वर्ष की उम्र से अज्ञेय की कविताओं से जो सम्बन्ध बना, वह आज तक अटूट है। अज्ञेय की कविता में जिन्दगी की छवियाँ और नयी लयों का आविष्कार निरन्तर आकृष्ट करता रहा। मैंने यह भी पाया कि अज्ञेय जैसी जीवन-विविधता अन्यत्र दुर्लभ है। अज्ञेय सजग आत्म-बोध के कवि हैं। इस आत्म-बोध में ‘सभ्यता-समीक्षा' का अपूर्व संसार है। परम्परा और आधुनिकता का एक बुनियादी सरोकार अज्ञेय में देशी रुझानों के साथ मौजूद है। यह सच है कि अज्ञेय आधुनिक भारतीय सभ्यता-संस्कृति के प्रश्नाकुल कवि हैं ।यह संचयन करते हुए अपनी रुचि के अलावा अन्य का भी ध्यान रखा गया है। कोशिश यही रही है कि अज्ञेय के समूचे काव्य-संसार की सर्जनात्मकता से अन्तरंग साक्षात्कार किया जा सके।-----------एक दिन देवदारु-वन बीच छनी हुईकिरणों के जाल में से साथ तेरे घूमा था।फेनिल प्रपात पर छाये इन्द्र-धनु की फुहार तले मोर-सा प्रमत्त-मन झूमा थाबालुका में अँकी-सी रहस्यमयी वीर-बहू पूछती है रव-हीन मखमली स्वर से :याद है क्या, ओट में बुरूँस की प्रथम बार धन मेरे, मैंने जब ओठ तेरा चूमा था ?

स. ही. वात्स्यायन 'अज्ञेय'मूल नाम : सच्चिदानन्द वात्स्यायन, जन्म : 07 मार्च, 1911, कुशीनगर, जिला देवरिया, उत्तर प्रदेश में एक पुरातत्त्व उत्खनन शिविर में शिक्षा : बी.एससी. (लाहौर) प्रथम श्रेणी में प्रथम स्थान । युवावस्था में चन्द्रशेखर आजाद, सुखदेव और भगवती चरण वोहरा से सम्पर्क, क्रान्तिकारी जीवन की शुरुआत। 1927 में पहली कविता की रचना। हिन्दुस्तान रिपब्लिकन आर्मी में सम्मिलित, बम बनाने के जुर्म में गिरफ्तारी। इसी दौरान चिन्ता एवं शेखर : एक जीवनी की रचना ।सेना में नौकरी। 1946 में सेना से त्यागपत्र । इसी वर्ष ऐतिहासिक तार सप्तक का सम्पादन। इलाहाबाद और दिल्ली से प्रतीक का प्रकाशन-सम्पादन । इसके अतिरिक्त दूसरा सप्तक, तीसरा सप्तक, थॉट, वाक्, नया प्रतीक, दिनमान, एवरीमेन्स वीकली, नवभारत टाइम्स, चौथा सप्तक का सम्पादन । कैलीफोर्निया, हॉइडेलबर्ग तथा बर्कले में अध्यापन । सत्तरह कविता-संग्रह, चार उपन्यास, सात कहानी-संग्रह, दो यात्रा-वृत्तान्त, बारह निबन्ध-संग्रह, दो संस्मरण, चार डायरियाँ, चार ललित निबन्ध-संग्रह, तीन साक्षात्कार-संग्रह तथा एक गीति नाट्य प्रकाशित । समग्र कविताएँ सदानीरा भाग 1 एवं 2 में संकलित ।इसके अतिरिक्त लगभग 20 से अधिक साहित्यिक ग्रन्थों का सम्पादन एवं अंग्रेजी-हिन्दी में अनुवाद की एक दर्जन पुस्तकें प्रकाशित। युगोस्लाविया के अन्तरराष्ट्रीय कविता सम्मान गोल्डन-रीथ, कबीर सम्मान, साहित्य अकादेमी पुरस्कार तथा ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित । ज्ञानपीठ पुरस्कार राशि के बराबर राशि अपनी ओर से जोड़कर 1980 में वत्सल निधि न्यास की स्थापना। 04 अप्रैल, 1987 को निधन |

Trusted for over 49 years

Family Owned Company

Secure Payment

All Major Credit Cards/Debit Cards/UPI & More Accepted

New & Authentic Products

India's Largest Distributor

Need Support?

Whatsapp Us