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Pakistan Mein Urdu Kalam

by Ed. by Gyanranja , Kamla Prasad
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Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9789369445592
  • Binding: Paperback
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 236
  • Original Price: INR 350.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 250 grams
  • BISAC Subject(s): N/A

पाकिस्तान में उर्दू कलम पाकिस्तानी उर्दू साहित्य का एक महत्त्वपूर्ण संकलन है, जो विविध शैलियों और विषयों को समेटे हुए है। इसमें उर्दू ग़ज़ल, नज़्म, कहानी, लेख, सफ़रनामा, दस्तावेज़ी लेखन को एक मंच पर प्रस्तुत किया गया है। यह संकलन न केवल पाकिस्तान के साहित्यिक परिदृश्य को दर्शाता है, बल्कि अपने समय-समाज के प्रति लेखकों की गहरी संवेदनशीलता, राजनीति-संस्कृति के प्रति उनकी जागरूकता, विभाजन-विस्थापन की त्रासदी, ज़मीनी संघर्ष, व्यक्तिगत अनुभूतियों, ऐतिहासिक सन्दर्भों आदि को भी सजीव करता है।इस पुस्तक में फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ का आरम्भिक लेख 'ऐ अहले क़लम तुम किसके साथ हो' जहाँ पाकिस्तान में संजीदा लिखने वालों को बिना खौफ़ के साफ़-सच्ची बातें करने और इज़हारे-राय की आज़ादी पर अमल करने का आह्वान करता है, वहीं मुहम्मद सलीमुर्रहमान की 'ज़ालिम बादशाहों के लिए एक नज्म' रचना प्रतिरोध और क्रान्ति का स्वर उभारती है। इसी तरह फ़ैज़, नासिर काज़मी, परवीन शाकिर, अहमद फ़राज़, हबीब जालिब, शकेव जलाली, क़तील शिफ़ाई जैसे शायरों की ग़ज़लें और नज़्में प्रतिरोध, सामाजिक-राजनीतिक चेतना, प्रेम और दर्द के विविध आयाम प्रस्तुत करती हैं। इनके अलावा पुस्तक में इब्ने इंशा, किश्वर नाहीद, फ़हमीदा रियाज़, सरमद सहबाई, मुनीर नियाज़ी, ज़हूर नज़र, जमीलउद्दीन आली, असगर नदीम सैयद, अतहर नफ़ीस, अब्बास अतहर जैसे शायरों की उपस्थिति इसे और भी व्यापक और प्रभावशाली बनाती है।कहानी-विधा में यह पुस्तक अपने एक विशेष रूप में समृद्ध है। यूनुस जावेद की 'एक बस्ती की कहानी', नईम आरवी की 'गोधरा कैम्प' और अफ़सर आज़र की 'आने वाले लोग' जैसी कहानियाँ युद्ध, राजनीति, साम्प्रदायिकता, विस्थापन, ग्रामीण संघर्ष, असमानता, जनता की दुर्दशा, मानवता और शासन की नीतियों को गहराई से व्यक्त करती हैं। वहीं अनवर सज्जाद की 'गाय' और सादिक हुसैन की 'झोली' जैसी कहानियाँ सामाजिक यथार्थ, व्यक्ति की मनःस्थिति, पशु के प्रति संवेदनशीलता आदि को गहनता से मूर्त करती हैं।विचार-विमर्श के अन्तर्गत डॉ. वज़ीर आगा का लेख 'पाकिस्तान में उर्दू अदब के पच्चीस साल' उर्दू साहित्य के विकास को ऐतिहासिक सन्दर्भों में रखकर देखता है। डॉ. मोहम्मद हसन का 'तहज़ीबी शिनाख्त का मसला' सांस्कृतिक पहचान के प्रश्नों पर विचार करता है, तो वहीं दस्तावेज़ के तहत इसहाक़ मोहम्मद के परचे का अंश 'एक कम्युनिस्ट का क़त्ल' पाकिस्तान की ज़ालिम सरकार द्वारा एक साम्यवादी कार्यकर्ता और अदीब हसन नासीर के क़त्ल की ज़िन्दा हक़ीक़त पेश करता है।सफरनामा, शब्द-चित्र और पत्र-लेखन इस संकलन को एक खास कोण से उल्लेखनीय बनाते हैं। सफ़रनामा के रूप में डॉ. मोहम्मद हसन की रचना 'पाकिस्तान की झाँकी' और अनवर सज्जाद व अज़ीजुल हक़ के पत्र जहाँ साहित्य के साथ-साथ समाज और उसके लोक के प्रति नज़रिये की वास्तविकता को दर्शाते हैं, वहीं इब्राहीम जलीस द्वारा लिखा गया 'हसन नासिर का खाका' मेहनतकशों के पक्ष में ताउम्र लड़ने वाले एक विचारशील व्यक्तित्व की झलक प्रस्तुत करता है।निस्सन्देह, पाकिस्तान में उर्दू क़लम साहित्यिक सौन्दर्य और प्रतिरोध का एक विरल दस्तावेज़ है। यह उर्दू-हिन्दी साहित्य के तमाम पाठकों के लिए एक अद्भुत अनुभव प्रस्तुत करता है जो उन्हें सोचने, समझने और अपने पड़ोसी देश के साहित्य को गहरे जानने की एक नयी दिशा और दृष्टि भी प्रदान करता है।

ज्ञानरंजन जन्म : 21 नवम्बर 1936, अकोला (महाराष्ट्र) में। प्रारम्भिक जीवन निरन्तर प्रवास में बीता-महाराष्ट्र, राजस्थान, दिल्ली, मध्य प्रदेश, उड़ीसा और उत्तर प्रदेश में। पिता श्री रामनाथ सुमन प्रख्यात गांधीवादी विचारक, लेखक और पत्रकार तथा छायावाद काल के प्रमुख आलोचकों में थे। उनकी यायावरी का गहरा असर। शिक्षा : एम.ए. इलाहाबाद विश्वविद्यालय से। जीविका : जबलपुर विश्वविद्यालय से सम्बद्ध महाविद्यालय में हिन्दी के प्रोफ़ेसर पद से सेवानिवृत्त। पैंतीस वर्षों तक हिन्दी की साहित्यिक पत्रिका 'पहल' के सम्पादक। 'सोवियत लैंड नेहरू अवार्ड', उ.प्र. हिन्दी संस्थान का 'साहित्य भूषण पुरस्कार', म.प्र. साहित्य परिषद् का 'सुभद्राकुमारी चौहान पुरस्कार', 'शिखर सम्मान' (भोपाल), 'प्रतिभा सम्मान' (कोलकाता) और 'अनिल कुमार सम्मान' से विभूषित। देश के प्रमुख विश्वविद्यालयों में कहानियाँ पाठ्यक्रम में। साहित्य अकादेमी, नेशनल बुक ट्रस्ट और एन.सी.ई.आर.टी. द्वारा पाठ्यक्रम और एंथोलॉजी में संगृहीत। अंग्रेज़ी, पोलिश, रूसी, जर्मन और डच भाषाओं में कहानियों के अनुवाद। अब तक पाँच कहानी-संग्रह प्रकाशित। *** कमला प्रसाद जन्म : 14 फरवरी 1938 को सतना ज़िले के गाँव धौरहरा में। प्रकाशन : साहित्यशास्त्र, छायावादोत्तर काव्य की सामाजिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि, छायावाद, प्रकृति और प्रयोग, दरअसल, रचना और आलोचना की द्वन्द्वात्मकता, समकालीन हिन्दी निबन्ध और निबन्धकार, कविता तीरे, साहित्य और विचारधारा, मध्ययुगीन रचना और मूल्य, यशपाल (मोनोग्राफ़), गिरा अनयन, सम्पादक की क़लम, आलोचक और आलोचना आदि। 'पहल' पत्रिका से वर्षों जुड़े रहे और 'वसुधा' का भी सम्पादन किया। सम्मान : 'नन्ददुलारे वाजपेयी पुरस्कार' (मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी), 'सुब्रह्मण्यम भारती पुरस्कार' (केन्द्रीय हिन्दी संस्थान, आगरा), 'रामविलास शर्मा सम्मान', 'शमशेर सम्मान' तथा अनेक संस्थानों के सम्मान। निधन : 25 मार्च 2011

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