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Pakka Mahaal

by Ajay Mishra
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Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9788181431189
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 292
  • Original Price: INR 595.0
  • Language: Hindi
  • Edition: 2nd Edition
  • Item Weight: 400 grams
  • BISAC Subject(s): General

आप ही तय करें कि बनारस और बनारसी जीवन पर आप जो पढ़ने जा रहे हैं, वह उपन्यास है या मुहल्ला स्तर की कहानियों, गलियों में फैली दंत कथाओं और पान दुकानों के गलचौर का एक ऐसाअनगढ़ संकलन, जिसमें गलियां तो हैं पर गालियां नहीं, जिनसे कई लेखकों ने बनारस की पहचान खड़ी की है। आपने उपन्यास माना तो सौभाग्य। क्योंकि न इसमें नायक है न नायिका । मुझ सरीखेअरसिक को गलियां मुग्धा, स्वकीया, परकीया नायिका बन लुभाती रही हैं। मैंने बनारस को महानायक के रूप में देखा और जाना है ।बनारस को पकड़ने का मेरा सारा कल, बल और छल विफल हो गया जब मैंने पाया कि यह शहर हर बार हाथों से फिसल जाता है। अंततः, इसे छूने मात्र से संतोष कर रहा हूं। शीघ्र ही बनारसके प्राचीनतम निवासियों-पंडों, घाटियों, नापितों, मल्लाहों और डोमराजा को समेटते हुए फिर कोशिश करूंगा इसे पकड़ने की – यह जानते हुए कि बनारस पर दर्जनों उपन्यास लिखे जायं तब भी मात्रइसकी अंगुली ही पकड़ी जा सकेगी। मैं बनारस पर अपनी उपन्यास त्रयी का समापन काशी के पंडितों पर करूंगा। घाटकिनारे की संस्कृति और समाज, जहाँ बनारस आज भी जिंदा है, को पंडों, घाटियों, मल्लाहों, नापितों, डोम और पंडित परम्परा को जाने बिना नहीं समझा जा सकता। यही तो बनारस है ।उपन्यास सरीखी रोचकता न हो, कहानी जैसी कहानी न हो, कथ्य में रवानी न हो और गद्य का अंग भंग हो तो इन दोषों का ठीकरा निःसंकोच मेरे ही सिर फोड़ें। यदि पसंद आये तो प्रकाशकको साधुवाद दें जिसने कछाड़ा बांध पुस्तक छोप कर छापी और आप तक पहुंचाई।अजय मिश्र

अजय मिश्रजन्म/शिक्षा : 12 नवंबर 1948 को बनारस के एक संस्कृतज्ञ परिवार में जन्म। पिता बलदेव प्रसाद मिश्र अपने समय के चर्चित कथाकार, व्यंग्य लेखक तथा प्रखर आलोचक। मई 1956 में पिता के असामयिक निधन वाद 8 वर्ष की अल्पायु से ही जीवन के कटुतम अनुभवों से साक्षात्कार तथा शिक्षा में अनेक बार व्यवधान। काशी हिंदू विश्वविद्यिलय हद्ध 70 में स्नातक ।पत्रकारिता : विद्यार्थी जीवन से ही लेखन आजीविका का सहारा । सन् 65 से 'आज', 'भारत', स्वतंत्र भारत', 'नवजीवन' तथा 'नवभारत टाइम्स' से शुरू कर 'साप्ताहिक हिंदुस्तान', 'धर्मयुग', त्रिपथगा' तथा सरस्वती में 76 तक नियमित लेखन तथा नागरी प्रचारिणी सभा की 'नागरी पत्रिका' में पुस्तक समीक्षा। 70 में 'कालक्षेप' के लिए धनबाद आ स्वतंत्र पत्रकारिता । सन् 77 से आनंद बाजार पत्रिका समूह के 'संडे', 'रविवार', बिजनेस स्टैंडर्ड', तथा 'द टेलीग्राफ' में नियमित लेखन। अनेक महत्वपूर्ण लेखों का तमिल, कन्नड़ तथा गुजराती में अनुवाद । 90 से पत्रकारिता छोड़ व्यवसाय में।संपादन : का.हि.वि.वि. में 'निकाय' का संपादन, वि.वि. पत्रिका 'परिवेश' की परिकल्पना तथा संयोजन । वार्षिक प्रकाशन 'उलूक' तथा 'पहली अप्रैल' में संपादकीय योगदान । धनबाद में 'दस्तक' का संपादन।लेखन : अगस्त 2001 से धनबाद के 'आवाज' में 'अंततः' नाम से दैनिक व्यंग्य स्तंभ तथा 'प्रभात खबर' में 'खरी-खोटी' स्तंभ के अन्तर्गत सामयिक टिप्पणियां तथा अनेक पत्र-पत्रिकाओं के लिए पुस्तक समीक्षा । व्यंग्य के मूल स्वर के साथ बनारस पर अनेक कहानियां। 'शुभकामनाओं का मौसम' व्यंग्य-संकलन प्रकाशनाधीन । धनबाद की कोयलाखानों के इतिहास, अंग्रेज खान-मालिकों के अत्याचार, कोयला मजदूरों के यातना-गृह 'गोरखपुरी लेबर कैंप', कोयला माफिया के खूनी पंजों में दम तोड़ती अर्थ-व्यवस्था तथा राजनैतिक शोषण के दस्तावेज के रूप में धनबाद कोयलांचल पर 'अंगूठाछाप' उपन्यास अपने अंतिम चरण में। बनारस पर दो और उपन्यासों की योजना पर शोध कार्य जारी ।स्थायी पता : डी. 7/15 सकरकंद गली, दशाश्वमेध, वाराणसी-1संपर्क : रेड हार्ट एंड कंपनी, कतरास रोड, धनबाद - 826001

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