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Papa Restart Na Hue

by Aalok Puranik
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Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9788177212495
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
  • Publisher Imprint: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
  • Publication Date:
  • Pages: 184
  • Original Price: INR 250.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 250 grams
  • BISAC Subject(s): Short Stories (single author)

ज़िंदगी जीने की तकनीक भले ही सबको समझ न आई हो, पर तकनीक बहुत गहराई से जिंदगी में घुस गई है। मोबाइल फोन जीवनसाथी से भी बड़ा जीवनसाथी हो गया है—24×7 का साथ है। नई पीढ़ी को फ्रेंडशिप के नाम पर फेसबुक याद आने लगता है। बहुत चीजें बदली हैं, पर बहुत चीजें नहीं भी बदली हैं। यह असंभव है कि जिसके फेसबुक पर पाँच हजार फ्रेंड हों, मौकेजरूरत पर उसे चार फ्रेंड का साथ भी उपलब्ध न हो। नई पीढ़ी नए फेसबुक के संदर्भ में नई फ्रेंडशिप के आशय को बखूबी समझने की कोशिश कर रही है। यह व्यंग्यसंग्रह बदलती तकनीक के संदर्भ में बुनियादी मानवीय रिश्तों को जाननेसमझने की कोशिश करता है। बाजार, तकनीक के बदलावों ने इनसान को किस तरह से बदला है और कहाँ से न बदल पाया है, इसका लेखाजोखा इस संग्रह में है। बदलते समाजशास्त्रअर्थशास्त्र को पकड़ने की कोशिश आलोक पुराणिक ने इस व्यंग्यसंग्रह में की है। वे इस काम को बेहतर तरीके से इसलिए कर पाते हैं कि वे एक तरफ कॉमर्स के एसोसिएट प्रोफेसर हैं, तो दूसरी तरफ समाज, तकनीक के महीन बदलावों पर पैनी नजर रखनेवाले व्यंग्यकार। बदलती तकनीक, बदलते बाजार के आईने में बदलते समाज को समझने के लिए यह व्यंग्यसंग्रह पढ़ना जरूरी है। व्यंग्यसंग्रह पूरा पढ़ने के बाद सिर्फ हँसी ही आपके साथ नहीं होगी, बल्कि अपने वक्त के बारे में ज्यादा समझदारी भी आप पैदा कर चुकेंगे।

जन्म : 30 सितंबर, 1966, आगरा।शिक्षा : एम.कॉम., पीएच.डी.।रचनासंसार : ‘नेकी कर अखबार में डाल’, ‘लव पर डिस्काउंट’, ‘बालम तू काहे ना हुआ एनआरआई’, ‘नेता बनाम आलू’, ‘व्हाइट हाउस में रामलीला’, ‘मर्सीडीज घोड़े बनाम 800 सीसी घोड़े’ (व्यंग्यसंग्रह); नवभारत टाइम्स, दैनिक हिंदुस्तान, राष्ट्रीय सहारा, दैनिक ट्रिब्यून, आई नेक्स्ट समेत कई अखबारों में नियमित व्यंग्यकॉलम लेखन; करीब दो हजार व्यंग्यलेख प्रकाशित। सब टीवी, सहारा न्यूज, जी न्यूज पर व्यंग्यपाठ।पुरस्कारसम्मान : ‘आर्थिक पत्रकारिता’ पुस्तक पर ‘भारतेंदु हरिश्चंद्र पुरस्कार’, हिंदी अकादमी दिल्ली का ‘हास्यव्यंग्य सम्मान’, ‘काका हाथरसी पुरस्कार’, ‘व्यंग्यकार के.पी. सक्सेना सम्मान’।संप्रति : दिल्ली विश्वविद्यालय के महाराजा अग्रसेन कॉलेज के कॉमर्स विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर।

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