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Paryavaran Aur Samkaleen Hindi Sahitya

by Dr. Prabhakaran Hebbar Illath
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Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9789388684095
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 152
  • Original Price: INR 595.0
  • Language: Hindi
  • Edition: 2nd Edition
  • Item Weight: 300 grams
  • BISAC Subject(s): General

पर्यावरण और समकालीन हिन्दी साहित्य - पर्यावरणीय विध्वंस का परिणाम मानव के लिए और घातक सिद्ध होता जा रहा है। मनुष्य प्रकृति में हस्तक्षेप करता है। पर्यावरण विमर्श के आलोक में पर्यावरण और साहित्य के सह-सम्बन्ध पर अध्ययन करते समय पर्यावरण में होने वाले परिवर्तनों तक उस अध्ययन को सीमित रखना विषय को लघु बनाने के बराबर है। साहित्य का सम्बन्ध मानव के सांस्कृतिक धरातल से है, इसलिए सांस्कृतिक पर्यावरण को इस चचा से बाहर करना युक्तिसंगत नहीं कहा जा सकता। अतः यहाँ पर्यावरण समस्याओं से तात्पर्य केवल पर्यावरण में होने वाले फेर-बदल से मात्र नहीं है। इसलिए विषय के वैज्ञानिक विवेचन के सन्दर्भ में प्रकृति के साथ हुए द्वन्द्वात्मक सम्बन्ध के आधार पर विकसित हुई संस्कृति एवं सभ्यता में पर्यावरण विनाश और पूँजीवादी संस्कृति से होने वाले परिवर्तनों पर भी विचार करना होगा जिससे विषय को व्यापकता एवं अर्थवत्ता प्राप्त होगी । अतः आज के मनुष्य का संघर्ष अपनी पृथ्वी को, अपनी संस्कृति को, अपनी जैविक अस्मिता को तथा आगामी पीढ़ी की ज़िन्दगी को कल्याणमय बनाने का संघर्ष है। आज का संवेदनशील मन प्रकृति के समस्त चर-अचर के साथ भावात्मक स्तर पर अभिन्नत्व की कल्पना करता है तथा हर वस्तु के भीतर समाये हुए चैतन्य का अंगीकार करता है। साहित्य पूँजी के विस्तार के परिणाम स्वरूप विकसित औद्योगिकीकरण, उदारीकरण, उपभोक्तावाद, बाज़ारीकरण, भूमण्डलीकरण, पर्यावरण विध्वंस, वैयक्तिकरण, पृथक्करण, प्रदूषण आदि का साहस के साथ प्रतिरोध करता है। सत्ता एवं धन की शक्तियों के अमानवीय पक्ष को समकालीन साहित्य खोलकर सामने रखता है। यह प्रतिरोध निर्माणात्मक सामाजिक कार्यकलाप है, सामाजिक परिवर्तन की आधारशिला है। यह प्रतिरोधात्मक संघर्ष नवीन विकल्पों को हमारे सामने पेश करता है।

डॉ. प्रभाकरन हेब्बार इल्लत -जन्म : केरल के कण्णूर ज़िले के पाणप्पुषा गाँव में।शैक्षणिक योग्यताएँ : एम.ए. (हिन्दी), एम.ए. (अंग्रेज़ी), एम.ए. (भाषाविज्ञान), एम.ए. (अनुवाद अध्ययन), बी.एड., एम.फ़िल., पीएच.डी., पी.जी.डी.टी.एस., पी.जी. एन.एल.पी., यूजीसी-नेट, स्लेट ।प्रकाशित रचनाएँ : निराला के काव्य निर्माण में वैदिक संस्कृति की भूमिका, नारायण गुरु की यात्रा (पेरुंबडवम श्रीधरन की मलयालम कृति 'नारायणम' का हिन्दी अनुवाद), गंगा (के.पी. सुधीरा के मलयालम उपन्यास 'गंगा' का हिन्दी अनुवाद), Rajaravi Varma : The Colossus of Indian Painting, राजभाषा हिन्दी : विविध आयाम, सिद्धार्थ (हेरमन हेस्से के 'सिद्धार्थ' उपन्यास का हिन्दी अनुवाद), संस्कृति भाषा साहित्य, नवत्युत्तर हिन्दी कविता की नूतन प्रवृत्तियाँ, रामविलास शर्मा का अवदान, मानवाधिकार और समकालीन हिन्दी कविता, भाषा एवं साहित्य : विविध परिदृश्य, आधुनिक हिन्दी कविता से साक्षात्कार, पर्यावरण और समकालीन हिन्दी साहित्य, मानवाधिकार की राजनीति।पुरस्कार : उत्तम शोध-ग्रन्थ के लिए केरल हिन्दी साहित्य अकादमी का पुरस्कार (2004), अनुवाद के लिए राष्ट्रीय हिन्दी साहित्य सम्मेलन का पुरस्कार (2008), 'हिन्दीतर लेखक हिन्दी पुरस्कार', केन्द्रीय हिन्दी निदेशालय, भारत सरकार (2013), 'बालकृष्ण गोइंका अनुवाद पुरस्कार' (2015), 'डॉ. सुनीताबाई आलोचना पुरस्कार' (2020) आदि ।अनुसन्धान : यूजीसी की दो कनिष्ठ परियोजनाएँ पूरी कीं, यूजीसी का रिसर्च पुरस्कार (2014), पोस्ट डॉक्टरल फ़ेलो-केरल सरकार ।सदस्यता : कण्णूर विश्वविद्यालय, कण्णूर एवं श्रीशंकराचार्य संस्कृत विश्वविद्यालय, कालडी के बोर्ड ऑफ़ स्टडीज़ का सदस्य ।रुचि : कविता, आलोचना, भाषाविज्ञान, अनुवाद ।सम्प्रति : एसोसिएट प्रोफ़ेसर, हिन्दी विभाग, कुसाट, कोच्चिन, केरल-682022स्थायी पता : एम.एम. बाज़ार, कण्णूर ज़िला, केरल-670306

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