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Pashchim Aur Cinema

by Dinesh Shrinet
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Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9789350009062
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 144
  • Original Price: INR 395.0
  • Language: Hindi
  • Edition: 2nd Edition
  • Item Weight: 300 grams
  • BISAC Subject(s): Film / General

पश्चिम के सिनेमा की समझ के बगैर भारतीय सिनेमा को भी पूरी तरह से नहीं समझा जा सकता है। अगर हम गौर करें तो अमेरिका की एक आम छवि हमारे मन में कैसे बनती है, ज़ाहिर सी बात है कि उसमें हॉलीवुड की तमाम फिल्मों की एक बड़ी भूमिका होती है। ठीक इसी तरह से भारतीय लोकप्रिय सिनेमा ने छवियाँ गढ़ने का काम किया। इसने कुछ दिलचस्प 'टाइप' गढ़े, खासतौर पर सत्तर और अस्सी के दशक के सिनेमा ने यह काम बखूबी किया। हर टाइप भारतीय समाज के सामाजिक ताने-बाने के एक हिस्से को दर्शाती थी। इनमें ज़िम्मेदार पिता, ज़िम्मेदार बड़ा भाई, बेटों का ख़याल रखने वाली सहनशील माँ, पति के प्रति कर्तव्यपरायण पत्नी, त्याग करने वाली बहनें, लालची किस्म के सूदखोर, क्रूर और घमंडी ज़मींदार जैसे चरित्र शामिल थे।बॉलीवुड को गढ़ने में कई तत्त्वों का समावेश रहा है। पहला तत्त्व भारतीय पौराणिक कथाओं का है, जो आमतौर पर बॉलीवुड के प्लाट में कथा के समानान्तर एक और कथा और कहानी के भीतर कहानी के समावेश में दिखता है। दूसरा तत्व संस्कृत के नाटकों से लिया गया, जिसमें कथा के समानान्तर उपकथा व प्रहसन को जोड़ना तथा रस के सिद्धान्त शामिल हैं। तीसरा असर भारत के लोक नाट्य और पारसी थिएटर का देखा जा सकता है। जो कहानी को एक मैजिकल रियलिज्म में बदल देता और कहानी यथार्थवादी ढाँचे के साथ गीतों, नाटकीय काव्यात्मक संवादों और सूत्रधार के इस्तेमाल की इजाज़त देता है। इसके अलावा बॉलीवुड पर सबसे बड़ा असर हॉलीवुड के सिनेमा का देखा जा सकता है। लगभग सभी पश्चिमी जॅनर भारतीय फिल्मों में भी देखे जा सकते हैं।

दिनेश श्रीनेतजन्मः 7 मई, 1972 को गोरखपुर मेंकथाकार, पत्रकार और न्यू मीडिया विशेषज्ञ । सिनेमा और पॉपुलर कल्चर में खास रुझान । दिलचस्पी का दायरा सिनेमा से लेकर दर्शन और कॉमिक्स से लेकर इंटरनेट तक। बतौर कथाकार 'विज्ञापन वाली लड़की' से पहचान बनी, जो पहली बार सन् 2006 में 'वागर्थ' में छपी, बाद में उसका उर्दू अनुवाद भारत और पाकिस्तान में छपा और सराहा गया।बतौर पत्रकार दिनेश 2007 से ऑनलाइन माध्यम की तरफ मुड़ गये। बेंगलुरु में टाइम वार्नर समूह की साइट 'एओएल (अमेरिका ऑनलाइन)' और 'वन इंडिया' के लिए कुछ साल काम करने के बाद उन्होंने जागरण प्रकाशन समूह के लिए युवाओं पर केन्द्रित वेब पोर्टल आइनेक्स्ट-लाइव लांच किया। इन दिनों बतौर सीनियर मैनेजर अमर उजाला के ऑनलाइन प्रोडक्ट्स की ज़िम्मेदारी ।दिनेश 'इंडियन बाइस्कोप' के नाम से बीते चार सालों से सिनेमा से जुड़ी निजी स्मृतियों पर एक ब्लाग भी लिखते हैं। उन्होंने मुख्यधारा की पत्रकारिता करते हुए छह-सात बरस इलाहाबाद, बरेली और गोरखपुर में भी बिताए हैं। इन दिनों गाज़ियाबाद में रहते हैं ।सम्पक : ई-104, जनसत्ता अपार्टमेंट्स, सेक्टर-9, वसुन्धरा, गाजियाबाद ।

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