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Patrakarita Ki Khurdari Zameen

by Rakesh Tiwari
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Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9789350729748
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 152
  • Original Price: INR 350.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 300 grams
  • BISAC Subject(s): Journalism

पत्रकारिता की खुरदरी ज़मीन - पिछले एक-डेढ़ दशक में पत्रकारिता बहुत तेज़ी से बदली है। बदलावों की शुरुआत भूमण्डलीकरण की पहली खेप के साथ ही होने लगी थी। इन वर्षों में 'प्रेस' देखते-देखते 'मीडिया' हो गया। मीडिया धन्धे में तब्दील होने लगा और धन्धे के लिए या तो मनोरंजन करने लगा या सूचनात्मक और प्रचारात्मक ख़बरों को तरजीह देने लगा। ख़बर की भाषा और कंटेंट बदलते-बदलते आज वास्तविक ख़बर हाशिये पर जाती दिख रही है। पत्रकार और पत्रकारिता को जिनके साथ खड़ा दिखाई देना चाहिए, उनकी सुध लेना उसने लगभग बन्द कर दिया। लोकतन्त्र का यह चौथा पाया एक तरह से शहरी मध्यवर्ग का कूड़ादान बन गया, क्योंकि ख़बर आबादी के उसी तक़रीबन एक तिहाई हिस्से का प्रतिनिधित्व करने लगी। इस तरह लोकतन्त्र के प्रहरी की उसकी भूमिका गौण हो गयी।दुखद पहलू यह है कि इस दौरान मीडिया पर राजनीतिकों और कारपोरेट जगत के स्वार्थी गठजोड़ में सहयोगी होने के आरोप लगने लगे हैं। इस वजह से भी उसने अपनी विश्वसनीयता काफ़ी हद तक खोई है। इन्हीं तमाम हालात के मद्देनज़र पत्रकारिता से कुछ ज़रूरी चीज़ों का, जिनमें उसके सरोकार प्रमुख हैं, सिरे से गायब हो जाना इस पुस्तक की चिन्ता के केन्द्र में है। पत्रकारों के रोज़मर्रा के कामकाज पर विचार करते हुए इस बात पर भी ग़ौर किया गया है कि इस पेशे में भूल-चूक कहाँ और क्यों हो रही है। मरती हुई ख़बर को बचाने और पत्रकारिता की घटती विश्वसनीयता फिर से क़ायम करने को इस पुस्तक में मौजूदा दौर की प्रमुख चुनौती के रूप में देखा गया है।

राकेश तिवारी - पत्रकारिता की तीन दशक से लम्बी पारी के दौरान न्यूज़ डेस्क और रिपोर्टिंग में अलग-अलग दायित्वों का निर्वाह करते हुए विविध अनुभव। राजनीति, खेल, फ़िल्म, पर्यावरण, जनान्दोलन व अन्य दूसरे विषयों पर लेखन और रोज़मर्रा की राजनीतिक गतिविधियों की रिपोर्टिंग। साथ ही सांस्कृतिक रिपोर्टिंग को नये तेवर और नया आयाम देने वाले पत्रकार के रूप में ख़ास पहचान। छिटपुट तौर पर पत्रकारिता का अध्यापन 1986 से इंडियन एक्सप्रेस समूह के हिन्दी दैनिक जनसत्ता में कार्यरत और वर्तमान में विशेष संवाददाता। पत्रकारिता की खुरदरी ज़मीन पत्रकारिता पर पहली पुस्तक।कृतियाँ : उसने भी देखा और मुकुटधारी चूहा (कहानी संग्रह), तोता उड़ (बाल उपन्यास)। कुछ कहानियों का दूसरी भारतीय भाषाओं में अनुवाद एक कहानी (तीसरा रास्ता) पर फ़िल्म बनी है और एक कहानी (दरोग्गा जी से ना कय्यो) के नाट्य रूपान्तरण के बाद कई शहरों में नाट्य प्रस्तुतियाँ व्यंग्य सहित साहित्य की अन्य विधाओं के अलावा बाल साहित्य लेखन। शुरुआती दौर में रंगकर्म और पटकथा लेखन से भी नाता। छिटपुट तौर पर अनुवाद कार्य भी।

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