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Pattal Ko Thali Ki Maryada

by Charu Goyal
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Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9789388434775
  • Binding: Paperback
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 402
  • Original Price: INR 695.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 600 grams
  • BISAC Subject(s): General

गुस्ताव जैनुक से बातचीत के क्रम में काफ़्का ने कहा है कि सच्ची कला समय का दर्पण होती है...एक ऐसी घड़ी है जो समय से तेज़ चलती है। यानी कि इसके बरअक्स कुछ कलाएँ ऐसी भी होती हैं जो सुस्त होती हैं और समय से काफ़ी पीछे होती हैं। त्रिलोचन के समय में ऐसी भी काव्य-कला थी जो यथास्थितिवादी थी और प्रयोग के नाम पर नग्नता का प्रदर्शन करती थी। इसके ही समान्तर एक ऐसी भी धारा थी जो प्रगति के नाम पर मार्क्सवाद का कीर्तन कर रही थी। इन दोनों काव्यधाराओं की शक्ति और सीमाओं को पहचान कर अपने जीवन-विवेक से काव्य-विवेक का आविष्कार त्रिलोचन ने किया तथा अपनी सर्जनशीलता के लिए नयी ज़मीन और ज़मीर की तलाश की। प्रगति, प्रयोग की आधुनिकता की आँधी में तथा उपेक्षा एवं तिरस्कार के आवर्त में अपनी अर्जित भावभूमि को सुरक्षित रख पाना त्रिलोचन के ही वश की बात थी।

चारु गोयल का जन्म-स्थान दिल्ली है। इनकी शिक्षा-दीक्षा दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली से हुई है। इनकी अध्ययन-रुचि के क्षेत्र भाषाविज्ञान, व्याकरण, गद्य एवं कविता है। इन्होंने शतरंज के खिलाड़ी : कहानी और फ़िल्म का तुलनात्मक अध्ययन विषय पर एम. फिल. किया है तथा त्रिलोचन के काव्य की भाषिक संरचना विषय पर पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की है। हिन्दी की अनेक प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्र-पत्रिकाओं में इनके आलोचनात्मक लेख प्रकाशित होते रहे हैं। सन् 2008 से सन् 2010 तक ये यू.जी.सी. प्रोजेक्ट फ़ेलो रह चुकी हैं। इनको यू.जी.सी से सीनियर एवं जूनियर रिसर्च फेलोशिप भी प्राप्त हुई है। दिल्ली विकास प्राधिकरण, दिल्ली की ओर से सन् 2006 में इन्हें 'हिन्दी विकास प्रतिभा पुरस्कार' से भी नवाज़ा जा चुका है। सम्प्रति : श्यामा प्रसाद मुखर्जी महिला महाविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग में सहायक प्रवक्ता (तदर्थ) के पद पर कार्यरत।

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