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Pita Hona Ek Chunauti Stories Book

by Veerpal Yadav
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Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9789392013799
  • Binding: Paperback
  • Subject: N/A
  • Publisher: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
  • Publisher Imprint: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
  • Publication Date:
  • Pages: 128
  • Original Price: INR 250.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 100 grams
  • BISAC Subject(s): N/A

एक ऐसा विषय, जिस पर अब बात बात करने की आवश्यकता है। हमारे समाज में पिता को परमात्मा का दर्जा प्राप्त है। उचित भी है, क्योंकि पिता के संरक्षण, मार्गदर्शन, प्रेम और समर्थन के बिना जीवन अधूरा है, परंतु इससे पिता को यह अधिकार तो प्राप्त नहीं हो जाता कि अपनी संतान को अपनी आकांक्षाओं, अपेक्षाओं, स्वार्थपरता और आत्ममुग्धता (Narcissism) के तले दबा दे। पिता की अनावश्यक दबाव वाली इस मानसिकता से कितनी संतानें आत्महत्या करने पर मजबूर हो जाती हैं। पिता संतान की शिक्षा, कॅरियर, शादी आदि में महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं। वहीं कुछ पिता इस अधिकार का अनुचित लाभ उठाकर अपने अहंकार की संतुष्टि करते हैं; भले ही संतान को जीवन भर उसका भुगतान करना पड़े। किस प्रकार पिता एक आदर्श पिता बन सकते हैं ? किस प्रकार पुत्र को पिता के प्रति अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए अपना जीवनयापन करना चाहिए? पिता को अपने अधिकार और कर्तव्यों एवं पुत्र को अपने अधिकार व कर्तव्यों के बीच सामंजस्य कैसे बैठाना चाहिए? इन सब विषयों पर इस पुस्तक में उदाहरण सहित विस्तृत व्याख्या की गई है। उदाहरण हमारे समाज के बीच से ही लिये गए हैं, जिनसे कहीं-न-कहीं हम और आप जुड़ाव महसूस करेंगे। पारिवारिक संबंधों में माधुर्य और सामंजस्य बनाकर एक स्वस्थ-समन्वित समाज बनाने के लिए आधारभूत पुस्तक ।

वीरपाल यादव का जन्म उत्तर प्रदेश के इटावा में हुआ। ग्रामीण जीवन की सादगी और संघर्षों ने उन्हें संवेदनशीलता और गहरा चिंतन करना सिखाया। यही उनके लेखन की नींव बना। कॉलेज के दिनों से उन्हें लिखने में रुचि रही। अब उनकी पहली पुस्तक 'पिता होना एक चुनौती' पाठकों के सामने है, जो पितृत्व की जिम्मेदारियों और पिता-पुत्र के रिश्तों के उतार-चढ़ाव को उजागर करती है। यह पुस्तक उनके व्यक्तिगत अनुभव और सामाजिक दृष्टिकोण से उपजी है।

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