Skip to content

Booksellers & Trade Customers: Sign up for online bulk buying at trade.atlanticbooks.com for wholesale discounts

Booksellers: Create Account on our B2B Portal for wholesale discounts

Pooja Ki Pothi

by Pooran Chandra Joshi
Save 35% Save 35%
Current price ₹257.00
Original price ₹395.00
Original price ₹395.00
Original price ₹395.00
(-35%)
₹257.00
Current price ₹257.00

Ships in 7-10 Days

Free Shipping in India on orders above Rs. 500

Request Bulk Quantity Quote
+91
Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9788170559078
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 240
  • Original Price: INR 395.0
  • Language: Hindi
  • Edition: 2nd Edition
  • Item Weight: 450 grams
  • BISAC Subject(s): Social History

तमाम आधुनिकता के बावजूद हर कहीं जनसाधारण में कर्मकाण्ड के प्रति आस्था घटने के बजाय उल्टे कुछ बढ़ती चली जा रही है। इसके चलते एक विचित्र-सी स्थिति प्रस्तुत हुई है। जहाँ एक ओर कर्मकाण्ड जानने वाले तेजी से कम होते चले जा रहे हैं और पूजा-पाठ करानेवाले ब्राह्मणों के घरों तक में नयी पीढ़ी में कर्मकाण्ड के संस्कार नहीं पड़ रहे हैं, वहाँ दूसरी ओर कुछ पूजा-पाठ भी कर-करा लेने की ललक कुछ वैसे ही बढ़ रही है जैसे कुछ 'योगा' या 'रेकी' कर लेने की। नई पीढ़ी के इस तरह के लोग स्वयं पूजा करना जानते नहीं । उन्हें पूजा कराने वाले पण्डित भी बड़ी मुश्किल से मिल पाते हैं और मिलते भी हैं तो बहुधा वे ऐसे होते हैं जो कुछ भी उल्टी-सीधी पूजा कराकर तगड़ी दक्षिणा वसूल कर लेते हैं। पूजा करवाने वाले यजमान को कर्मकाण्ड का ककहरा भी नहीं मालूम होता इसलिए वह अज्ञानी पण्डित को टोक भी नहीं सकता।पूजा करने-कराने की बढ़ती हुई इच्छा, ठीक से पूजा करा सकने वालों का अभाव और स्वयं पूजा न कर सकने की यह असमर्थता भारत के बड़े शहरों और कस्बों के नागरिक तथा विदेश में बसे भारतीय इधर बहुत तीव्रता से अनुभव करते रहे हैं। दैनिक और वार्षिक पूजाएँ करने की इच्छुक इस नई पीढ़ी के लिए बाजार में ऐसी कोई पुस्तक भी उपलब्ध नहीं है जिसमें पूजा करने की विधि और पूजा में आनेवाले प्रमुख श्लोकों के अर्थ समझा दिये गये हों। पाठकों की इसी आवश्यकता की पूर्ति करेगी पूजा की पोथी।

पूरनचंद जोशी का जन्म 5 सितम्बर, 1921 को गल्ली अल्मोड़ा के एक कर्मकांडी और साहित्य अनुरागी परिवार में हुआ। माँ का देहांत बचपन में ही हो जाने के कारण उनके लालन, पालन की पूरी जिम्मेदारी इनके पिता कृपाल दत्त जोशी पर आ गयी, जो शिक्षा विभाग में डिप्टी इंस्पेक्टर होने के साथ-साथ ज्योतिष और कर्मकांड के ज्ञाता तथा अच्छे लेखक भी थे। जोशी जी का शुरू से साहित्य, कला व संस्कृति के प्रति गहन अनुराग रहा। आरंभ में आपने कुछ अच्छे ललित निबंध भी लिखे थे। इस उम्र में भी वह सभी संगीत सभाओं और कला प्रदर्शनियों में पहुँच ही जाते हैं। उत्तर प्रदेश के राजकीय महाविद्यालय के प्राचार्य पद से अवकाश ग्रहण करने के बाद सम्प्रति दिल्ली में निवास ।संपर्क सूत्र : बी.सी., सी-7, अग्रसेन अपार्टमेंट, सैक्टर-7, पॉकेट-10, द्वारिका, नई दिल्ली

Trusted for over 49 years

Family Owned Company

Secure Payment

All Major Credit Cards/Debit Cards/UPI & More Accepted

New & Authentic Products

India's Largest Distributor

Need Support?

Whatsapp Us