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Pragtisheel Kavita Ke Saundarya Moolya

by Ajay Tiwari
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Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9789352290277
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 324
  • Original Price: INR 695.0
  • Language: Hindi
  • Edition: 2nd Edition
  • Item Weight: 500 grams
  • BISAC Subject(s): General

अजय तिवारी की यह किताब ‘प्रगतिशील कविता के सौन्दर्य-मूल्य’ हिन्दी की प्रगतिशील कविता को पूरी काव्य परम्परा के सन्दर्भ में समझने की कोशिश करती है। उसका स्पष्ट मत है कि प्रगतिवाद जिन नये मूल्यों के साथ एक ऐतिहासिक आन्दोलन के रूप में सामने आता है वे सारे मूल्य पूर्ववर्ती भारतीय कविता में भी देखे जा सकते हैं। इस कविता की महत्त्वपूर्ण उपलब्धि यह है कि इसने पहले की कविता के जिन मानवतावादी मूल्यों और अन्तर्वस्तु को धारण किया है, उसे आधुनिक युग की वैज्ञानिक दृष्टि से लैस कर दिया है। अजय तिवारी मानते हैं कि प्रगतिशील साहित्य भारतीय साहित्य की समस्त मानवतावादी परम्पराओं से विकसित सुसंगत, वैज्ञानिक चेतना का साहित्य है। इस किताब का विशेष महत्त्व इस बात में है कि यह वस्तुतः प्रगतिशील कविता के सौन्दर्य-मूल्यों का अध्ययन भी है और क्रिटीक भी। इसलिए यह प्रगतिशील कविता के सौन्दर्य बोध और वैज्ञानिक सौन्दर्यशास्त्रा के सम्बन्ध में आलोचना के क्षेत्रा में व्याप्त अनेक भ्रांतियों का निराकरण करने का काम भी करती है। अजय तिवारी हमेशा, चाहे मुद्दा साहित्य का हो, साहित्यिक सैद्धान्तिकी का या संस्कृति के किसी पक्ष का, निरन्तर जिरह करते आलोचक हैं। तर्क-वितर्क करते एक सजग और सतर्क आलोचक। उनकी यह किताब केवल प्रगतिशील कविता के सौन्दर्य-मूल्यों और सौन्दर्य बोध को समझने के लिए ही सहायक नहीं है, यह वस्तुतः सौन्दर्य बोध और सौन्दर्य-मूल्यों की भारतीय परम्परा को समझने की भी एक सही दृष्टि प्रदान करती है।

अजय तिवारी, जन्म: 6 मई, 1955, शिक्षा: इलाहाबाद से हाईस्कूल करने के बाद पी-एच.डी. तक दिल्ली विश्वविद्यालय से अध्ययन। पुस्तकंे: प्रगतिशील कविता के सौंदर्यमूल्य, कुलीनतावाद और समकालीन कविता, साहित्य का वर्तमान, पश्चिम का काव्य-विचार। संपादन: केदारनाथ अग्रवाल, कवि-मित्रों से दूर (केदारनाथ अग्रवाल के साक्षात्कार), आज के सवाल और मार्क्सवाद (रामविलास शर्मा से संवाद), तुलसीदास: एक पुनर्मूल्यांकन। सम्मान: केशव-स्मृति सम्मान, भिलाई (1996); देवीशंकर अवस्थी सम्मान, नयी दिल्ली (2002)। संप्रति: दिल्ली विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग में प्रोफेसर।

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