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Qaid Bahar

by Geeta Shri
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Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9789395737708
  • Binding: Paperback
  • Subject: N/A
  • Publisher: Rajkamal Prakashan
  • Publisher Imprint: Rajkamal Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 232
  • Original Price: INR 299.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 225 grams
  • BISAC Subject(s): N/A

प्रेमी जहाँ पति मैटेरियल में बदलने लगता है और प्यार विवाह नाम के नरक में, क़ैद की दीवारें वहीं उठना शुरू होती हैं, जिनसे निकलने का संघर्ष इस उपन्यास की स्त्रियाँ कर रही हैं। लेकिन इस मुक्ति का निर्वाह क्या इतना आसान है? प्रेम से रहित हो जाना और अपने एकान्त के वैभव को चारों तरफ जगमगाती-दहाड़ती पारिवारिकताओं के ठीक सामने खड़ा कर देना; क्या यह उतना ही सरल है जितना विचार के रूप में सोच लेना!

यह एक मुश्किल फ़ैसला है, एक कठिन इरादा जिसके लिए अपने आप से भी लड़ना होता है, और अपने आसपास की दुनिया से भी, उन मूल्यों-मान्यताओं से भी जिन्हें जीवन की एकमात्र और स्वीकृत पद्धति के रूप में स्थापित कर दिया गया है। लेकिन आज की स्त्री को यह संघर्ष, यह ख़तरा, यह बहुआयामी युद्ध फिर भी वरेण्य लगता है, बनिस्बत उस ‘सुख’, ‘संतोष’ और ‘पूरेपन’ के जिसकी गारंटी विवाह नाम की संस्था देती रही है, और बदले में स्त्री से ही नहीं, कई बार पुरुष से भी उसकी आज़ादी को छीनती रही है।

स्त्री-स्वातंत्र्य की अवधारणाओं को अपने लेखन से नई धार देनेवाली गीताश्री का यह उपन्यास कथाओं और उपकथाओं में चलती एक बहस ही है। यह उन स्त्रियों के अन्तर्बाह्य संघर्षों का कोलाज है जो समाज को पारम्परिक परिवार के स्थान पर एक नया केन्द्र देना चाहती हैं जहाँ किसी की संवेदना को रौंदा न जाए, न स्त्री की, न पुरुष की; जहाँ इन दोनों का सम्बन्ध आरम्भ से अन्त तक एक-दूसरे को अपने-अपने ‘व्यक्ति’ में खिलने-खुलने-पूरा होने में मदद देता हो।

इस उपन्यास से गुज़रना स्त्री-विमर्श के एक जटिल, लेकिन ज़रूरी पड़ाव से साक्षात्कार करना है।

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