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Raghuvir Sahay Aur Pratirodh Ki Sanskriti

by Abhay Kumar Thakur
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Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9789350726716
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 148
  • Original Price: INR 325.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 300 grams
  • BISAC Subject(s): General

रघुवीर सहाय और प्रतिरोध की संस्कृति - "वही ख़बर नहीं है, जो लोगों की चौकाती है, वह भी है जो लोगों को भरोसा देती है, हिम्मत बँधाती है और समाज में अपनी शक्ल का प्रतिविष्य देखने को देती है। मगर ख़बर के पूरी तौर पर ख़बर बनने के लिए आवश्यक है कि वह उन तक भी पहुँचे जिन्होंने उसे पैदा किया है सिर्फ़ उन्हीं तक न रह जाये जिन्होंने उसे लिखा है - शायद बहुत ही सुन्दर भाषा में भी।"रघुवीर सहाय का यह वक्तव्य इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि वे स्वाधीन भारत के महत्वपूर्ण लेखक ही नहीं, अपने जमाने के सजग पत्रकार भी थे। अतः यह स्वाभाविक है कि उनका सम्पूर्ण रचना कर्म अपने समय और समाज के साथ लगातार संवाद है। स्वातन्त्र्योत्तर भारत में राजनीतिक और सांस्कृतिक दमन के ज़रिये आम आदमी को किस तरह मानवीय अधिकारों से वंचित कर मनुष्य से एक दर्जा नीचे रहने के लिए मजबूर किया गया है, यही उनकी रचना का मुख्य सरोकार है।प्रस्तुत पुस्तक में रघुवीर सहाय के रचना कर्म के में माध्यम से स्वाधीन भारत के महत्त्वपूर्ण मुद्दों- 'लोकतंत्र की विसंगति', 'सांस्कृतिक दासता', 'भाषा की विकृति', 'जनसंचार माध्यमों की भूमिका', 'जातिप्रथा', 'साम्प्रदायिकता' इत्यादि पर विस्तार से विचार किया गया है।उम्मीद है कि राजनीति, साहित्य और संस्कृति के सवालों पर नये ढंग से सोचने के लिए यह पुस्तक पाठकों को उद्वेलित करेगी।अन्तिम पृष्ठ आवरण -हमको तो अपने हक़ सब मिलने चाहिएहम तो सारा का सारा लेंगे जीवन कम से कम वाली बात न हमसे कहिएराष्ट्रगीत में भला कौन वहभारत भाग्य विधाता है फटा सुथन्ना पहने जिसकागुन हरचरना गाता है बनिया बनिया रहे बाम्हन बाम्हन और कायस्थ कायस्थ रहे पर जब कविता लिखे तो आधुनिक हो जाये। खीसें बा दे जब कहो तब गा दे।-रघुवीर सहाय

अभय कुमार ठाकुर - जन्म : 04 फ़रवरी, 1972, रघुनाथपुर, बेगूसराय, बिहार। शिक्षा : प्रारम्भिक शिक्षा ग्रामीण विद्यालय में। बी.ए. (ऑनर्स) एम.ए., एम.फिल. एवं पीएच.डी. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिन्दी विषय में किया। विश्वविद्यालय में अध्ययन के दौरान प्रो. सावित्री सिन्हा स्मृति स्वर्ण पदक, मैथिलीशरण गुप्त पुरस्कार, हिन्दी अकादमी प्रतिभा पुरस्कार से नवाजे गये।कार्यक्षेत्र : वर्ष 1997 में संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित प्रतिष्ठित परीक्षा सिविल सेवा परीक्षा में चयनित तथा भारतीय राजस्व सेवा के अधिकारी के रूप में योगदान किया। तदोपरान्त देश के अनेक हिस्सों में सहायक आयकर आयुक्त, उप आयकर आयुक्त, संयुक्त आयकर आयुक्त तथा अपर आयकर आयुक्त के रूप में सफलतापूर्वक उत्तरदायित्व का निर्वाह किया। वरिष्ठ आयकर अधिकारी के रूप में अनेक संवेदनशील मामलों के अन्वेषण से जुड़े रहे तथा कर संग्रह के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान किया। सम्प्रति बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में वित्त अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं।रुचियाँ : देश के विभिन्न स्थानों का भ्रमण एवं संस्कृति तथा साहित्य के मुद्दों से जुड़ाव। भ्रमण के दौरान विभिन्न संस्कृतियों जोड़ने वाले तत्त्वों की अनवरत तलाश।

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