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Ramkatha Aur Ramcharitmanas - 2

by Raghavsharan Sharma
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Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9789357758956
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 272
  • Original Price: INR 695.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 400 grams
  • BISAC Subject(s): General

रावण के नाभि प्रवेश में अमृत का वास अध्यात्म रामायण, आनन्द रामायण, सानाथ रामायण, धर्मखण्ड, तत्त्वसंग्रह रामायण, भावार्थ रामायण और रामचरितमानस में हैं। वे पराक्रमी योद्धा के अलावा विद्वान और बुद्धिमान हैं। वे शास्त्रज्ञ भी हैं। मयरावण चरितम् के हनुमान रामचरितमानस की तरह ही ब्रह्मचारी हैं। यह वृत्तान्त, स्कन्दपुराण, अवन्तीखण्ड, रेवा अध्याय के 83 में भी है। पद्मपुराण के पातालखण्ड में भी हनुमान के ब्रह्मचर्य का वर्णन है। तुलसीदास के अनुसार वाल्मीकि की ही तरह हनुमान की माता अंजना और पिता वायु हैं। वे शिव के अवतार भी हैं। तुलसीदास की दृष्टि युग सापेक्ष रहकर भी युग की सीमाओं को अतिक्रान्त कर जाती है। यही कारण है कि जनक्रान्ति द्रष्टा कवि की सार्थकता कभी समाप्त नहीं होती। यह युग-युगीन हो जाती है और बदलती दुनिया में भी अपनी उपादेयता बरकरार रखती है। तुलसी ने धर्म को सर्वागीण मंगल उन्मुख व्यवस्था का रूप दिया। तुलसीदास ने वर्णाश्रम के मर्यादावाद को स्वीकार किया है।

बिहार सरकार की सेवा करते हुए अपने उत्कृष्ट कौशल की कसे बिहार सरकार एवं साहित्य सदन द्वारा पुरस्कृत किये जा चुके हैं। इनकी कई पुस्तकें देश-विदेश की प्रतिष्ठित प्रकाशन संस्थाओं द्वारा प्रकाशित हैं।प्रकाशित पुस्तकें द अनफॉट वार 1962, वार ऑफ़ इंडिपेंडेंस किसान डॉक्यूमेंट्स, स्वामी सहजानन्द सरस्वती रचनावली, स्वामी सहजानन्द और सुभाष चन्द्र बोस हिमालय का चप्पा-चप्पा भू-भाग इन्होंने पैरों से नापा है और उस अनुभव को कलमबद्ध किया है। सम्प्रति महात्मा गाँधी अन्तरराष्ट्रीय हिन्दी विश्व विद्यालय, वर्धा में अतिथि प्राध्यापक हैं।

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