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Ramrajya Kahan Hai Loktantra

by Sharankumar Limbale
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Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9789355183286
  • Binding: Paperback
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 352
  • Original Price: INR 495.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 350 grams
  • BISAC Subject(s): General

रामराज्य कहाँ है लोकतन्त्र -आज भी वनवास में जी रहे लोगों की यह रामायण है। यह पग-पग पर सामने आता हुआ दाहक समाज-वास्तव है। आज़ादी मिली परन्तु किसे मिली?अभी भी यहाँ का भय ख़त्म नहीं हुआ है । यह लोकतन्त्र धर्म, जाति, भ्रष्टाचार और अपराध से जकड़ा हुआ है । फिर दलित समाज तो पूर्णतया हाशिये पर है। प्रभु रामचन्द्र ने बारह वर्ष का वनवास सहा । दलित हज़ारों वर्षों से यह वनवास भोग रहे हैं । उनका वनवास कब ख़त्म होगा? जिसके दुखों को हर समय उपेक्षा झेलनी पड़ी उस हाशिये पर धकेले गये इन्सान की यह कहानी है। आज़ादी मिली परन्तु किसे मिली?

शरणकुमार लिंबाले -जन्म : 1 जून 1956शिक्षा : एम.ए., पीएच.डी.हिन्दी में प्रकाशित किताबें अक्करमाशी (आत्मकथा) 1991, देवता आदमी (कहानी संग्रह) 1994, दलित साहित्य का सौन्दर्यशास्त्र (समीक्षा) 2000, नरवानर (उपन्यास) 2004, दलित ब्राह्मण ( कहानी संग्रह) 2004, हिन्दू (उपन्यास) 2004, बहुजन (उपन्यास) 2009, दलित साहित्य : वेदना और विद्रोह (सम्पादन ) 2010, झुण्ड (उपन्यास) 2012, प्रज्ञासूर्य : डॉ. बाबासाहेब आम्बेडकर 2013, गैर-दलित (समीक्षा) 2017, दलित पैन्थर (सम्पादन ) 2019, यल्गार ( काव्य ) 2020, गर्व से कहो (उपन्यास) 2020, सनातन (उपन्यास) 2021 ।ई-मेल : sharankumarlimbale@gmail.com܀܀܀सुनीता डागा - अनुवादक और कवयित्रीशिक्षा : एम. ए.प्रकाशित किताबें :दाह (मराठी लेखक ल.सि. जाधव की दलित आत्मकथा का हिन्दी अनुवाद) 2016, सुलझे सपने राही के (मराठी के शीर्ष लेखक भारत सासणे के उपन्यास का हिन्दी अनुवाद) 2017, हिन्दी उपन्यास बनारस टाकीज का मराठी अनुवाद 2021, सदानीरा का ग्रीष्मकालीन अंक- (2019), समकालीन मराठी स्त्री कविता (मराठी कवयित्रियों की कविताओं के हिन्दी अनुवाद) ।मो. : 8766589435ई-मेल : sunitadaga1@gmail.com

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