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Ras Siddhant Aur Saundarya Shastra

by Dr. Nirmala Jain
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Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9788170556749
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 468
  • Original Price: INR 895.0
  • Language: Hindi
  • Edition: 2nd Edition
  • Item Weight: 700 grams
  • BISAC Subject(s): General

रस सिद्धान्त और सौन्दर्य शास्त्र - कला-चिन्तन की परम्परा में स्वतन्त्र अनुशासन के रूप में 'तुलनात्मक सौन्दर्यशास्त्र' का इतिहास बहुत पुराना नहीं हैं। बीसवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में स्वयं पश्चिम के विचारकों ने इस बात पर बल देना आरम्भ किया था कि 'तुलनात्मक सौन्दर्यशास्त्र' की परिव्याप्ति में पूर्व को भी सम्मिलित करना आवश्यक है। प्रस्तुत ग्रन्थ में रस-सिद्धान्त को आधार मानकर प्राच्य एवं पाश्चात्य प्रमुख सौन्दर्यशास्त्रीय अवधारणाओं का तुलनात्मक अध्ययन किया गया है।अध्ययन की प्रक्रिया में न तो इस बात का आग्रह है कि प्रत्येक पाश्चात्य मान्यता अपने यहाँ भी पहले ही से प्राप्त है और न संस्कृत काव्यशास्त्रीय अवधारणाओं को पाश्चात्य चिन्तन की शब्दावली में प्रस्तुत करके उन्हें आधुनिक प्रदर्शित करने का उत्साह दिखाया गया है। इस प्रकार युक्ति-कल्पना की अपेक्षा दृष्टि तथ्य-चयन एवं वस्तु-निरूपण पर ही केन्द्रित रही है।इस प्रयास में रस-सिद्धान्त के व्यापक स्वरूप को ग्रहण करते हुए उसका पुनर्निर्माण इस रूप में किया गया है कि वह काव्यसृजन से काव्य के आस्वाद तक एक समग्र-सम्पूर्ण काव्य-सिद्धान्त के रूप में सामने आता है। रस-सिद्धान्त से तुलना के लिए प्रायः पश्चिम की रोमांटिक और प्रत्ययवादी परम्परा के कला-सिद्धान्तों को प्रस्तुत करने की परिपाटी से भिन्न इस ग्रन्थ में पाश्चात्य सौन्दर्यशास्त्र की नवीन प्रवृत्तियों और नव्य-समीक्षा की वस्तु केन्द्रित दृष्टि का आकलन किया गया है।इस रूप में रस-सिद्धान्त के वस्तुनिष्ठ पक्षों को उभारते हुए, पश्चिम के समानान्तर सिद्धान्तों से उसकी तुलना, तुलनात्मक अध्ययन के क्रम को एक नयी दिशा देने का प्रयास है। यह अध्ययन कवि, कृति और पाठक में से किसी एक को उसकी एकांगिता में नहीं बल्कि सृजन से ग्रहण और आस्वाद तक सम्पूर्ण प्रक्रिया की अनिवार्य कड़ी के रूप में प्रस्तुत करता है।

निर्मला जैन - जन्म : दिल्ली, 19321शिक्षा : एम. ए., पीएच. डी., डी. लिट्, दिल्ली विश्वविद्यालय।अध्यापन : 1956 से 1970, स्थानीय लेडी श्रीराम कालेज में हिन्दी विभागाध्यक्ष । 1970-81, दिल्ली विश्वविद्यालय (दक्षिण परिसर) हिन्दी विभाग में रीडर। 1981-84, हिन्दी विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रोफेसर एवं अध्यक्ष। 1984-96 तक प्रभारी प्रोफेसर, दिल्ली विश्वविद्यालय (दक्षिण परिसर)।सम्प्रति : सेवा निवृत्त ।प्रकाशन : 1962 से अनेक मौलिक ग्रन्थों की रचना, अनुवाद और सम्पादन।प्रमुख रचनाएँ : आधुनिक हिन्दी काव्य में रूप- विधाएँ, रस-सिद्धान्त और सौन्दर्यशास्त्र, आधुनिक साहित्य : मूल्य और मूल्यांकन, हिन्दी आलोचना की बीसवीं सदी, आधुनिक हिन्दी काव्य : रूप और संरचना, पाश्चात्य साहित्य-चिन्तन, कविता का प्रति संसार।अनुवाद : उदात्त के विषय में, बंगला साहित्य का इतिहास, समाजवादी साहित्य : विकास की समस्याएँ, साहित्य का समाजशास्त्रीय चिन्तन, भारत की खोज, एडविना और नेहरू।

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