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Rashtrineta Dr. B.R. Ambedkar

by Nitish Vishwas
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Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9788181430571
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 82
  • Original Price: INR 225.0
  • Language: Hindi
  • Edition: 2nd Edition
  • Item Weight: 250 grams
  • BISAC Subject(s): General

इस देश में सैकड़ों शताब्दियों से जो लोग असम्मान के बोझ से दबे-पिसे, दमित; गुलामी से मलिन-जर्जर, अपमानित, मंत्रहीन हैं, उन्हीं सब शूद्र और अतिशूद्रों के मूढ़, म्लान, मूक दर्द के अंतहीन अंधेरे के दामन में, एक अन्त्यज महार समाज में-बाबा साहब भीमराव अंबेडकर ने जन्म लिया था। डॉ. बी.आर. अंबेडकर ! उनके समूचे तन-बदन पर जन्मजात् काले-नीले दर्द के धब्बे ! भारतीय जाति-प्रथा की ज़हरभरी यन्त्रणा के सियाह निशान् इस देश में चूंकि उन्होंने दलित समाज में जन्म लिया था इसलिए वे अछूत, उपेक्षित और हेय थे। भारतवर्ष वर्णाश्रम धर्म की क्लेदभरी नर्कभूमि है। यहाँ शूद्र जन्म से ही सेवादास, वर्णदास या श्रमदास होते हैं। क्रीतदास के विरुद्ध, बगावत का शंख फूंकनेवाले महान नेता, स्पार्टाकस की तरह ही डॉ. बी.आर. अंबेडकर ने भी भारत में अन्त्यज-दास समाज के हाथों में, जागरण और उन्नयन की पताका थकाकर कहा- 'तुम लोग स्वयं, अपने हाथों से इस दासत्व को खत्म करो। इसके लिए किसी भगवान या अतिमानव पर निर्भर मत करो। किसी तीर्थयात्रा के पुण्य या धार्मिक व्रत-उपवास के जरिये तुम्हें मुक्ति कदापि नहीं मिलेगी। राजनैतिक क्षमता ही तुम्हें मुक्ति दिलायेगी। कोई भी धर्मशास्त्र, तुम्हारी गुलामी, अनाहार और दरिद्रता दूर नहीं कर सकता। इसके लिए, ओ दलितों, कानून-संगत अधिकार दखल करो ।'- इसी पुस्तक से

नीतीश विश्वास -बांग्ला के प्रतिष्ठित गद्यशिल्पी व प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता नीतीश विश्वास का जन्म 15 मार्च 1952 को फरीदपुर (बांग्लादेश) के गोपालगंज के माझीगाटी गांव में हुआ। वहीं आरंभिक शिक्षा । 1964 में सभी छह भाई-बहनों को लेकर पिता नगेन्द्रनाथ विश्वास और माता हरिदासी विश्वास कोलकाता आ गये। पश्चिम बंगाल बोर्ड से हायर सेकेण्डरी के बाद नीतीश विश्वास ने रवीन्द्र भारती विश्वविद्यालय से बांग्ला साहित्य में ऑनर्स के साथ बी. ए. किया, फिर एम.ए. । अरसे तक 'गणशक्ति', 'सतयुग', 'बसुमती' में पत्रकारिता/पत्रकारीय लेखन। अभी भी विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में नियमित लेखन। 1977 से 1986 तक आकाशवाणी में कार्यक्रम अधिकारी। कॉलेज सेवा आयोग में चयन के बाद एक शिक्षण संस्थान में कुछ समय तक अध्यापन। 1990 में कलकत्ता विश्वविद्यालय में डिप्टी रजिस्ट्रार के पद पर नियुक्त। फिलहाल वहीं सेवारत। रवीन्द्र भारती विश्वविद्यालय के सिंडीकेट के सदस्य। 'दलित समन्वय समिति', 'सहमर्मी', प. बंग जनतांत्रिक लेखक संघ, मातृभाषा समिति कलकत्ता विश्वविद्यालय और आल बंगाल यूनिवर्सिटीज ऑफिसर्स एसोसिएशन जैसे प्रमुख संगठनों के सचिव। कई अन्य संगठनों से भी सम्बद्ध । सामाजिक कार्यकलापों में बढ़-चढ़कर हिस्सेदारी ।कृतियां : 1. डॉ. बी.आर. अंबेडकर 2. जातीय नेता अंबेडकर 3. देशनायक सुभाषचन्द्र 4. सोमेनचन्द्र : जीवन व साहित्य 5. नैनीताले पथे-पथे 6. बांग्लार उपभाषा (बोलियां)। संपादित पुस्तकें : 1. वाक् शिल्पाचार्य 2. दलित साहित्य (बंगाल में दलित आन्दोलन) 3. रवीन्द्र चर्चा प्रसंगे 4. मातृभाषा: बांग्ला भाषा 5. जोड़ासांको ठाकुरवाड़ी: ऐतिह्य व अवदान 6. कवि मुकुलेश विश्वास स्मारक संकलन 7. प्रगतिशील सांस्कृतिक कविता आन्दोलन 8. 'एकतान' शोध पत्रिका का संपादन।सम्पर्क : डी.एल. 224/डी, साल्ट लेक, कोलकाता-700091܀܀܀सुशील गुप्ता -लगता है, मैं किसी ट्रेन में बैठी, अनगिनत देश, अनगिनत लोग, उनके स्वभाव-चरित्र, उनकी सोच से मिल रही हूँ और उनमें एकमेक होकर, अनगिनत भूमिकाएँ जी रही हूँ। ज़िन्दगी अनमोल है और जब वह शुभ और सार्थक कार्यों और सरोकारों से जुड़ी हो, तभी हम इन्सान बन पाते हैं। लेकिन, अपनी समूची ईमानदारी और सच्चाई के बावजूद, मेरी राह, मेरे रिश्ते, मेरी ज़िन्दगी गडमड हो गयी। मुखौटे पहने खुदगर्ज़, क्रूर लोग, मुझे मौत की यतीम खाई में धकेलकर, जब ज़िन्दगी का जश्न मनाने चल पड़े, तो औरों के सच... और ख्यालों... और तजुर्बो के अनुवाद और अनुकृति ने मुझे थाम लिया - मैं हूँ न ! और मेरी राह गुम होने से बच गयी। ये अनुकृतियाँ इस बात की सनद हैं कि सरोकारों में सच भी है और झूठ भी। जिसे, जो नसीब हो या हम जो भी चुन लें, हमें सुविधा है।अब तक लगभग 50 उपन्यासों का अनुवाद ! 3 काव्य-संग्रह ! कई-कई पुरस्कारों सहित, अपने हिन्दी पाठकों के अमित प्यार का पुरस्कार ।

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