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Rashtriya Naak

by Vishnu Nagar
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Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9788126708703
  • Binding: Paperback
  • Subject: N/A
  • Publisher: Rajkamal Prakashan
  • Publisher Imprint: Rajkamal Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 188
  • Original Price: INR 250.0
  • Language: Hindi
  • Edition: 3rd Ed.
  • Item Weight: 250 grams
  • BISAC Subject(s): N/A

विष्णु नागर का व्यंग्य सबसे पहला हमला हमारी आदतों और ‘कंडीशनिंग्स’ पर करता है—वे आदतें जो हमारे ‘सामान्य नागरिक’ होने के अहं का निर्माण और पोषण करती हैं और जिनके आधार पर हमारी सुविधा और हमारा यथास्थितिवाद खड़ा होता है। यह व्यंग्य हमारे मुहावरों को विचलित कर देता है और हम यकायक, विकल होकर देखते हैं कि हमारे दैनिक जीवन की जो चीज़ें हमें तक़रीबन ‘परम’ प्रतीत होती हैं, सवाल उन पर भी उठाया जा सकता है, और सबसे बड़ी बात कि, उन पर हँसा भी जा सकता है।

स्थितियों के भीतर व्यंग्य की इस उपस्थिति को पकड़ने के लिए कई बार विष्णु नागर का व्यंग्यकार कल्पना और अतिरंजना का सहारा भी लेता है, लेकिन यह उनका यथार्थ से हटना या कटना नहीं है, बल्कि यथार्थ की एक सुलभ परत से आगे जाकर उसकी कुछ दुर्लभ और दुरूह छवियों तक पहुँचने की कोशिश करना है, इसीलिए कई बार ‘चोर की दाढ़ी में तिनका’ और ‘भैंस के आगे बीन बजाना’ जैसे मुहावरे भी उनकी व्यंग्य–रचना के प्रस्थान बिन्दु हो सकते हैं जो किसी व्यंग्य का निशाना होने के लिए इतने निरीह, निर्दोष और निष्पक्ष दिखाई देते हैं लेकिन विष्णु नागर उनसे भी अपना लक्ष्य साध लेते हैं।

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