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Refugee Camp

by Ashish Kaul
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Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9789353221003
  • Binding: Paperback
  • Subject: N/A
  • Publisher: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
  • Publisher Imprint: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
  • Publication Date:
  • Pages: 256
  • Original Price: INR 300.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 186 grams
  • BISAC Subject(s): General

उसने कहा जब मरना ही है तो चलो मेरे साथ। और बस वो पाँच हजार जिंदा लाशें चल पड़ीं मौत की आँखों में आँखें डालने। वो चल पड़े शांति की तलाश में। कहते हैं अपनी जमीन और हक की एक लड़ाई सहस्रों साल पहले पांडवों को लड़नी पड़ी थी। अपनों को युद्ध में सामने खड़ा देख अर्जुन धर्मसंकट में थे और उन्हें इससे उबारने के समाधान के रूप में गीता का जन्म हुआ।पर सवाल यह है कि शांति चाहता कौन है? पैसा, बाजार और ताकत तो अशांति में उत्सव मनाते हैं। सरकार और शांति दोनों ही कश्मीर में हर पल हार रहे हैं। कभी पत्थरबाजों के पत्थरों से, कभी सीमापार की गोलियों से, कभी पढ़ाई से बहुत दूर जाते बस्तों से। अकेली आर्मी या सरकार शांति नहीं ला सकती। न्याय, धर्म, स्वाभिमान और मानवता तो सिर्फ और सिर्फ एक आम आदमी की पहल से ही संभव है। क्योंकि एक वो ही है, जिसे शांति में नफा या नुकसान नहीं, जिंदगी दिखती है।यह कहानी एक ऐसे ही आम आदमी ‘अभिमन्यु’ की कहानी है। वह अभिमन्यु, जिसने ‘अशांति’ के अर्थतंत्र पर सेंधमारी की और शांति के लिए पहला कदम बढ़ाया। और जब वो पहला कदम उठा, उसने एक ऐसी असाधारण परिस्थिति को जन्म दिया, जिसका किसी को भान न था। देखते-ही-देखते पाँच हजार जिंदा लोग एक आम लड़के अभिमन्यु के नेतृत्व में आत्मघाती दस्ते में तब्दील हो गए। शायद वो विश्व का सबसे बड़ा आत्मघाती दस्ता था। जीना तो मुश्किल था ही, पर क्या मरना आसान था? क्या होगा जब इनके आगे भी इनका अतीत खड़ा होगा? क्या इनके आगे भी इनके अपने युद्ध के लिए खड़े होंगे? कुरुक्षेत्र में लड़े गए महाभारत में गीता का जन्म हुआ। क्या यह कहानी ‘रिफ्यूजी कैंप’ वादी में चल रही लड़ाइयों का कोई समाधान खोज पाएगी?

आशीष कौलहर कदम एक नई मंजिल की आस, चुनौतियों से खेलने की फितरत, कुछ नया करने का शौक और पहाड़ों एवं परंपराओं से प्यार। इस पुस्तक के लेखक आशीष कौल का यह सबसे आसान परिचय है। वो जुनून ही था कि जिसने 24 साल के अपने मीडिया कॅरियर में कई नए बिजनेस आइडियाज दिए तो कहीं पुराने बिजनेस को नई शक्ल देकर उनमें जान फूँक दी। अपनी इसी अलग सोच और खास अंदाज के चलते बिजनेस लीडर और कम्यूनिकेशंस एक्सपर्ट के रूप में भी उन्होंने खूब प्रसिद्धि बटोरी। आज आशीष कौल मीडिया और एंटरटेनमेंट की दुनिया में एक जाना-माना नाम हैं। अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से विभूषित।आशीष कई सालों से तरह-तरह के सामाजिक और सांस्कृतिक विषयों पर लिखते रहे हैं। वैसे उनकी कलम भी उनके मन के करीब जो कुछ है, उसी को बयान करती रही है; और मन के करीब जो कुछ है, सब चुनौतियों से भरा है। उन चुनौतियों से लड़ने की भाषा अपने आप में चुनौती थी। एक कहानी, जिसे आम हिंदुस्तानी की भाषा में कहना जिद थी। ये कहानी ‘रिफ्यूजी कैंप’ भी कश्मीर घाटी में लंबे समय से खड़ी आतंकवाद की चुनौती को आशीष का जवाब है।

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