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Ritivigyan

by Vidyaniwas Mishra
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Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9788170556633
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 176
  • Original Price: INR 495.0
  • Language: Hindi
  • Edition: 3rd Edition
  • Item Weight: 350 grams
  • BISAC Subject(s): Essays

पश्चिम में प्रायः 'लिंग्वो स्टाइलिस्टिक' अध्ययन के अन्तर्गत लेखक-विशेष की शैली के अध्ययन अभी बहुत हाल तक किये जाते रहे हैं, किन्तु इनमें सर्वमान्य वस्तुनिष्ठ पद्धति नहीं अपनायी जाती रही है और प्रायः ये अध्ययन अध्ययनकर्ता की अपनी रुझान से प्रभावित रहे हैं या अध्येय लेखक की व्यक्तिगत विशिष्टताओं से जिसके कारण किसी वस्तुनिष्ठ वैज्ञानिक पद्धति के अनुसार सर्वग्राह्य प्रतिपादन सम्भव नहीं हो पाया है। वस्तुतः व्यक्ति की शैली को समझने से पूर्व भी यह आवश्यक है कि रीतिविज्ञान के विभिन्न उद्देश्यों और प्रकारों की सीमाएँ पहले निर्धारित की जाएँ ।इस पुस्तक में कोशिश यह की गयी है कि प्राचीन प्रकार की व्याख्या पद्धति को आधुनिक सन्दर्भ की अपेक्षाओं को ध्यान में रखते हुए बिना कोई पारिभाषिक नाम दिये अर्थ-ग्रहण का एक मार्ग निर्धारण करने में उपयोजित किया जाये और इसको प्रामाणिक एवं तर्कबद्ध रूप में प्रस्तुत किया जाये ।

विद्यानिवास मिश्रजन्म : मकर संक्रान्ति, 1982 वि. गाँव पकड़डीहा, जिला गोरखपुर में, संस्कृत की पारम्परिक शिक्षा घर पर और वाराणसी में । 1945 में प्रयाग विश्वविद्यालय से संस्कृत में एम.ए.। हिन्दी साहित्य सम्मेलन में स्व. राहुल की छाया में कोश कार्य, फिर पं. श्रीनारायण चतुर्वेदी की प्रेरणा से आकाशवाणी में कोश कार्य, विन्ध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के सूचना विभागों में सेवा, गोरखपुर विश्वविद्यालय में संस्कृत विश्वविद्यालय और आगरा विश्वविद्यालयों में क्रमशः अध्यापन-संस्कृत और भाषा विज्ञान का। 1960-61 और 1967-68 में कैलीफोर्निया और वाशिंगटन विश्वविद्यालयों में अतिथि अध्यापक । केन्द्रीय हिन्दी संस्थान, आगरा के निदेशक पद पर कार्य करने के बाद काशी विद्यापीठ विश्वविद्यालय, वाराणसी के कुलपति रहे ।प्रकाशननिबन्ध संग्रह : शेफाली झर रही है, गाँव का मन, संचारिणी, लागौ रंग हरी, भ्रमरानन्द के पत्र, अंगद की नियति, छितवन की छाँह, कदम की फूली डाल, तुम चन्दन हम पानी, आँगन की पंछी और बनजारा मन, मैंने सिल पहुँचाई, साहित्य की चेतना, बसन्त आ गया पर कोई उत्कण्ठा नहीं, मेरे राम का मुकुट भीग रहा है, परम्परा बन्धन नहीं, कँटीले तारों के आर-पार, कौन तू फुलवा बीनन हारी, अस्मिता के लिए।शोध : दि डिस्क्रिप्टिव टेकनीक ऑफ पाणिनि, रीति विज्ञान, भारतीय भाषा दर्शन की पीठिका, हिन्दी की शब्द- सम्पदा, हिन्दू धर्म: जीवन में सनातन की खोज । कविता-संग्रह पानी की पुकार ।सम्पादन : रसखान रचनावली, रहीम ग्रन्थावली, देव की दीपशिखा ।

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